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'कमरे' के लिए शायरों के अल्फ़ाज़

kamra shayari collection
                
                                                         
                            

ये कमरा और ये गर्द-ओ-ग़ुबार उस का है
वो जिस ने आना नहीं इंतिज़ार उस का है
- यासमीन हबीब 


तू अकेला है बंद है कमरा
अब तो चेहरा उतार कर रख दे
- शीन काफ़ निज़ाम 

यही कमरा था जिस में चैन से हम जी रहे थे
ये तन्हाई तो इतनी बे-मुरव्वत अब हुई है
- शारिक़ कैफ़ी 


सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है
- जावेद अख़्तर 

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4 वर्ष पहले

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