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देवपुर पारा में छह साल में पूरा हुआ एक तिहाई प्रोजेक्ट, भटक रहे सैकड़ों आवंटी

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2021 02:20 AM IST
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After six years Samajwadi awas plan is not complete
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अतुल भारद्वाज

वर्ष 2014 में एलडीए ने देवपुर पारा में समाजवादी आवास बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया। हालांकि, छह साल बाद भी यहां 35 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है।
जिस कंपनी (सिंटेक्स) को ठेका दिया गया, वह काम छोड़ कर भाग चुकी है। जिस प्रोजेक्ट को 2018 में पूरा कर आवंटियों को कब्जा देने की तैयारी थी, अब वहां बाकी काम पूरा कराने के लिए नई कंपनी की तलाश चालू है।
हालांकि, वह कब तक काम शुरू करेगी, यह अभी तय नहीं है। ऐसे में 2860 आवंटी अपने आशियाने के लिए एलडीए के चक्कर लगा रहे हैं।
एलडीए अधिकारियों के मुताबिक देवपुर पारा का बचा काम नई कंपनी से कराया जाना है। इसके लिए दो बार टेंडर हुआ, लेकिन कंपनी का चुनाव नहीं हो सका।
मौजूदा वीसी अभिषेक प्रकाश ने पहले चल रही टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उसे निरस्त कर दिया। अब नए सिरे से टेंडर कराया जाएगा। यह काम डीपीआर बनाकर होगा।
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पूर्व में प्लिंथ एरिया के आधार पर टेंडर किए गए। इस तरीके को अब वीसी ने बंद करा दिया है। वीसी ने डीपीआर बनाने का आदेश भी कर दिया है। सचिव पवन गंगवार ने मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह से पूरे प्रकरण पर रिपोर्ट मांगी है।
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3088 फ्लैट बनने हैं, तीन चौथाई आवंटित
एलडीए को देवपुर पारा में तीन वर्ग में 3088 फ्लैट बनाने हैं। इनमें से तीन चौथाई यानी 2860 का आवंटन भी हो चुका है। अब 228 फ्लैट ही आवंटन के लिए बाकी हैं। यहां 2024 ईडब्ल्यूएस, 608 एलआईजी और 456 एमएमआईजी आवास बनाए जाने हैं। आवंटन के लिए सबसे अधिक 166 फ्लैट एमएमआईजी में ही बचे हैं।
हालात : 100 परिवारों के बीच एक लिफ्ट
एलडीए की यह योजना पहले ही दिन से सवालों में रही है। ईडब्ल्यूएस आयवर्ग के लिए 12 मंजिला अपार्टमेंट बना दिया। एलआईजी के लिए तो यह ऊंचाई 19 मंजिल है। वहीं, औसतन 100 परिवार के बीच एक लिफ्ट लगाई गई है। खुद एलडीए के इंजीनियर मान रहे हैं कि सुबह-शाम लिफ्ट इस्तेमाल के लिए मारामारी रहेगी। औसतन 20 मिनट में दोबारा उपयोग के लिए लिफ्ट मौजूद होगी। यानी, इंतजार बढ़ेगा। इसके अलावा कॉमन एरिया की सुविधाओं से बिजली, सफाई, लिफ्ट संचालन के लिए खर्च कैसे निकलेगा? इसका जवाब भी एलडीए को ढूंढना होगा।
270 करोड़ रुपये खर्च कर रहा प्राधिकरण
प्रोजेक्ट पर एलडीए करीब 270 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। यह तब है जब एमएमआईजी के 10 टावर में से सात का निर्माण प्राधिकरण निरस्त कर चुका है। यानी, करीब 1064 फ्लैट वह नहीं बनाएगा। इस जमीन का उपयोग अब एलडीए व्यावसायिक करेगा, जिससे प्रोजेक्ट का खर्च निकाला जा सके।
डीपीआर बनते ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू
सचिव पवन गंगवार ने कहा कि प्रोजेक्ट में और अधिक देरी नहीं होगी। आवंटियों को कब्जा देने के लिए निर्माण पूरा कराना होगा। सर्वे कराकर डीपीआर तैयार कराई जा रही है। इसके बनते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। कोशिश है कि कम से कम समय में काम शुरू कर पूरा कराया जाए। वीसी खुद इसकी लगातार समीक्षा कर रहे हैं।
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