तेजी से बदलते जमाने में भी पत्रकारिता के मूल्य जिंदा रखे है अमर उजाला : डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा
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उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि तेजी से बदलते जमाने में भी ‘अमर उजाला’ पत्र समूह पत्रकारिता के पुराने मूल्यों को जिंदा रखे हैं। उसमें छपा प्रत्येक शब्द निष्पक्षता और निडरता की गवाही दे रहा होता है। ‘अमर उजाला’ कभी अपने सामाजिक सरोकारों के साथ समझौता नहीं करता है। डॉ. शर्मा ने ये विचार ‘अमर उजाला’ लखनऊ की स्थापना के 10 वर्ष पूरे होने पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘अमर उजाला गौरव सम्मान’ समारोह में बतौर मुख्य अतिथि रखे।
इस अवसर पर डॉ. दिनेश शर्मा और परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह ने राजधानी की अपने-अपने क्षेत्र की 10 मशहूर हस्तियों को सम्मानित किया। डॉ. शर्मा ने कहा कि उच्च मानवीय मूल्यों व आदर्शों के लिहाज से आज हर क्षेत्र में गिरावट महसूस की जा रही है। पत्रकारिता और राजनीतिक क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। पहले कुर्ता-पायजामा पहने नेताजी को लोग देखते ही नमन करने लगते थे, पर अब पहले जैसा वह भाव नहीं रहा। इसी तरह आजादी के आंदोलन के दौरान अखबारों में छपे एक वाक्य से जन सैलाब उमड़ पड़ता था।
बिखरे बाल, पैरों में हवाई चप्पल और चेहरे पर ओज देखकर लोग समझ जाते थे कि ये व्यक्ति या तो पत्रकार होगा या फिर शिक्षक। लेकिन, अब वैसी स्थिति नहीं रही। डॉ. शर्मा ने कहा, मैं पत्रकारों के रहन-सहन के ढंग में आए बदलाव को गलत नहीं मानता, पर चारित्रिक मूल्यों को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। इस चुनौती पर ‘अमर उजाला’ एकदम खरा उतर रहा है। निष्पक्षता और निडरता से भरे शब्दों की उसकी चयन प्रक्रिया कभी भी बाधित होती नहीं दिखती।
डॉ. शर्मा ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि वे गृहस्थ जीवन में काफी देर से आए। पहले अखबारों में प्रतिदिन प्रथम पृष्ठ पर भगवान की फोटो छपती थी, इसलिए वे सुबह उठते ही या तो अखबार को माथे से लगाते थे या भगवान की मूर्ति को। एक दिन ऐसा ही किया तो भतीजे के कहने पर मेरी मां ने बखेड़ा खड़ा कर दिया। बाद में पता चला कि मैंने रोज की तरह अखबार के जिस प्रथम पृष्ठ को माथे से लगाया था, उस पर भगवान का नहीं, बल्कि अभिनेत्री मल्लिका शेरावत का चित्र छपा था। मां इस बात से नाराज थीं कि कहने से शादी नहीं करता और व्यवहार उसका इस तरह का है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि पाठकों की बदलती रुचि को देखते हुए अखबारों के प्रबंधन को भी अपने कलेवर में बदलाव करना पड़ रहा है। समय के साथ आवरण बदले हैं, पर इसमें हमें सदैव शुचिता का ध्यान जरूर रखना चाहिए। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि इन बदली हुई परिस्थितियों में भी ‘अमर उजाला’ लोकतंत्र का प्रहरी बनकर चट्टान की मानिंद खड़ा है। गंगा-जमुनी तहजीब के इस शहर में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
...जब हॉल में गूंजे ठहाके
डॉ. शर्मा ने कवि सुरेंद्र शर्मा का हास्य भरे अंदाज में जिक्र करके सभागार में मौजूद लोगों को खूब गुदगुदाया। कहा, चार कवियों में पुल्लिंग नाम सिर्फ सुरेंद्र शर्मा का ही है। शेष पवन आगरी, अशोक सुंदरानी और गौरी मिश्रा के नाम से तो स्त्रीलिंग का ही बोध हो रहा है। उनकी इस बात से हॉल ठहाके से गूंज गया।
ये 10 हस्तियां हुईं सम्मानित
‘अमर उजाला गौरव सम्मान’ समारोह में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ज्ञान प्रकाश गुप्ता, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस हैदर अब्बास, हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. मंसूर हसन, रंगकर्मी पद्मश्री राज बिसारिया, पूर्व लोकायुक्त जस्टिस एससी वर्मा, शिक्षाविद् भूमित्र देव, वरिष्ठ रंगकर्मी विलायत जाफरी, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मंदाकिनी प्रधान, सेवानिवृत आईएएस डॉ. एसएन शुक्ला और लोक गायिका कमला श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया।
समाज को दे रहे दिशा : स्वतंत्र देव सिंह
परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि ‘अमर उजाला’ प्रत्येक क्षेत्र में जनजागरण अभियान को आगे बढ़ा रहा है। मेधावी छात्रों का सम्मान हो या फिर किसानों या महिलाओं का, किसी में भी पीछे नहीं है। आज लखनऊ शहर की 10 हस्तियों को सम्मानित करके इस दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि जिसके पास लक्ष्मी होती है, उसके पास सरस्वती का आशीर्वाद नहीं होता। इसी तरह इसका उल्टा भी होता है। देश के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा सरस्वती पुत्र ही करते हैं, जो कार्य ‘अमर उजाला’ अच्छी तरह से कर रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के लोगों के पास अपनी निजी स्कूटी तक नहीं होती, पर वे देश व समाज को न सिर्फ दिशा देने, बल्कि उसे आगे बढ़ाने का काम भी करते हैं। ‘अमर उजाला’ के इन प्रयासों का वे सरकार और संगठन की तरफ से शुक्रिया अदा करते हैं।