पति बोला, मी लॉर्ड, मेरी पत्नी को सिपाही से बचाओ!
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एक पति ने अपनी पत्नी को सिपाही के चंगुल से छुड़ाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कृष्णानगर थाने में तैनात सिपाही इतेश कुमार मोहन के चंगुल से अपनी 25 वर्षीया पत्नी को छुड़ाने की पति की गुहार पर हाईकोर्ट ने लखनऊ के डीआईजी/एसएसपी आरके चतुर्वेदी को जांच करने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने 9 जुलाई को जांच व कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने महिला के बालिग होने की वजह से उसे अपनी मर्जी के मुताबिक जाने व रहने की इजाजत दे दी। साथ ही महिला को उसकी मर्जी की जगह जाने के लिए कोर्ट के रजिस्ट्रार को पर्याप्त पुलिस व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह ने मंगलवार को यह आदेश पति की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इतेश ने गैरकानूनी तरीके से उसकी पत्नी को निरुद्ध कर रखा है।
मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दे रहा है सिपाही
अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मंगलवार दोपहर दो बजे लखनऊ के डीआईजी/एसएसपी समेत कृष्णानगर थाने के अन्य पुलिसकर्मियों को तलब किया। अदालत ने पुलिस अधीक्षक स्तर के अफसर से पूरे प्रकरण की जांच टीम बनाकर करवाए जाने के निर्देश डीआईजी/एसएसपी को दिए।
साथ ही डीआईजी/एसएसपी को कानून के मुताबिक दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की छूट भी दी है।
महिला (याची ने जिसे पत्नी कहा) ने अदालत को बताया कि सिपाही इतेश उसे काफी समय से निरुद्ध किए हुए है। इतेश उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देता है। उसने कहा कि वह किसी तरह बीते सोमवार शाम भागकर किसी तरह महिला थाने पहुंची। उसका आरोप है कि कृष्णानगर थाने के दरोगा राकेश कुमार ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।