यूपी के उपचुनाव में भी काम करेगा 'मोदी मैजिक'
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लोकसभा चुनाव में मिले दलितों व पिछड़ों के समर्थन से उत्साहित भाजपा ने इन दोनों वर्गों को स्थायी रूप से अपने साथ जोड़ने का फैसला किया है।
इसके लिए इन वर्गों के पार्टी नेताओं के समूह, सांसदों व विधायकों को बतौर प्रभारी बनाकर उनके जरिये पूरी योजना को जमीन पर उतारा जाएगा।
इन सभी को संबंधित लोगों की बस्तियों में जाकर और उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर चुनाव में भाजपा को समर्थन के लिए आभार जताना होगा।
12 सीटों के उपचुनाव पर नजर
इसके साथ ही पार्टी नेताओं को उन्हें भाजपा से स्थायी रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित भी करना होगा। इस प्रयोग की पहली परीक्षा निकट भविष्य में होने वाले विधानसभा की 12 सीटों के उपचुनाव में होगी।
दरअसल, लोकसभा चुनाव नतीजों के विश्लेषण से भाजपा के रणनीतिकार इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि मोदी के नाम पर बने माहौल से जिस तरह पूरा हिंदू समाज एकजुट हुआ, उसी के चलते पार्टी को इतनी बड़ी सफलता मिली।
रणनीतिकारों का मानना है कि इस समर्थन को संगठन की स्थायी ताकत बनाना बहुत जरूरी है। अगर यह काम नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में भाजपा की राह में फिर पहले जैसी ही मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। साथ ही बड़ी ताकत बनने और भाजपा को मजबूत बनाने का हाथ आया अवसर भी निकल जाएगा।
सपा-बसपा को करेंगे एक्सपोज
पार्टी ने नव आगंतुक सम्मेलन के नाम से जगह-जगह कार्यक्रम करने की रणनीति बनाई है। इसमें उन लोगों को बुलाया जाएगा जो चुनाव के दौरान भाजपा के स्थानीय लोगों के संपर्क में आए।
इसकी शुरुआत राजधानी में सोमवार को ‘नव आगंतुक पिछड़ा वर्ग सम्मेलन’ आयोजित करने के साथ कर दी गई। भाजपा नेताओं ने सम्मेलन में आए लोगों को बताया कि दूसरे दल पिछड़ों का प्रतिनिधित्व करने का नारा भले लगाते हों लेकिन वह पिछड़ों के नाम पर कुछ खास नेताओं के परिवारों का संगठन भर है।
सपा-बसपा का उदाहरण रखते हुए बताया गया कि दोनों दलों में पहले से तय है कि संगठन की कमान किसके हाथ रहेगी जबकि भाजपा में ऐसा नहीं है।
यहां जिस पद पर अटल बिहारी वाजपेयी बैठते हैं, संगठन में उसी जगह अमित शाह जैसे कार्यकर्ता भी बैठ सकते हैं।
इस तरह करेंगे काम
दलित और पिछड़े नेताओं का समूह बनाकर तथा पार्टी के दलित व पिछड़े वर्ग के विधायकों व सांसदों को भी इस काम में लगाने का फैसला किया गया है।
इन समूहों को दलित व पिछड़ा बहुल क्षेत्रों में भेजा जाएगा। उन्हें अपने-अपने वर्ग के बीच संपर्क करने और उनसे संवाद बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
इन समूहों को अपने लोगों की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। साथ ही उन्हें भाजपा और केंद्र सरकार द्वारा दलितों व पिछड़ों के कल्याण के लिए किए जा रहे कामकाज की भी जानकारी देनी होगी।
नेताओं की कामयाबी से तय होगा उनका भविष्य
पार्टी अपनी इस पूरी कार्ययोजना को उपचुनाव वाली सीटों को कसौटी मानकर आजमाएगी।
इसके लिए सभी सांसदों, विधायकों और संगठन के दलित व पिछड़े वर्ग के नेताओं को उपचुनाव वाली सीटों के दलित व पिछड़ा आबादी बहुल इलाकों में लगाया जाएगा।
उपचुनाव में आने वाले अलग-अलग क्षेत्रों के नतीजों पर उस क्षेत्र में तैनात लोगों के कामकाज की समीक्षा होगी। इससे निकले निष्कर्षों के आधार पर इनका भविष्य तय होगा।