उपभोक्ता फोरम का फैसलाः नगर निगम 15 दिन में साफ करें शहर, सफाई न होने पर कटेगा नगर आयुक्त का वेतन
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डॉ. अखिला ने फोरम में शिकायत की कि उनके खुद के घर के बाहर सीवर का मैनहोल खुला पड़ा हुआ है। हर तरफ गंदगी है। कुत्ते व अन्य आवारा जानवर खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे बच्चों को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।
नगर निगम को नियमित रूप से टैक्स भरने के बाद भी उपभोक्ता के रूप में उन्हें नगर निगम से सेवाएं नहीं मिल रही हैं। वहीं नगर निगम ने दावा किया कि निजी संस्था कूड़ा उठाने का काम शहर में कर रही है। मच्छरों का प्रकोप रोकने के लिए नियमित रूप से दवा का छिड़काव कराया जाता है।
आप भी कर सकते हैं नगर निगम के खिलाफ शिकायत
फोरम की टिप्पणी
टैक्स तो ले रहा पर सफाई नहीं कर रहा नगर निगम
फोरम के सदस्य राजश्री शुक्ला ने आदेश दिया कि मौजूद साक्ष्यों से यह साबित हो रहा है कि सफाई ठीक से नहीं होने की वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। सड़कों पर कूड़ा गिरता है, जिन पर गाय, कुत्ते खाने की तलाश में भटकते रहते हैं।
हालिया स्वच्छता सर्वे में भी यूपी में लखनऊ का स्थान सातवां रहा है। नगर निगम जो टैक्स ले रहा है। उसे सरकारी टैक्स की तरह वसूला जा रहा है, लेकिन इसके बदले सफाई व अन्य काम नहीं किए जा रहे हैं। सार्वजनिक जगहों पर लोग मच्छरों से होने वाली बीमारियों की वजह से नहीं घूमने जा सकते हैं। निजी संस्था से भी अनुबंध है, लेकिन उसका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।
फोरम ने नगर निगम को यह भी आदेश दिया है कि पूरे शहर के साथ विशेष रूप से शिकायतकर्ता के घर के आसपास सफाई व अन्य नागरिक सेवाएं सुनिश्चित की जाए। अगर शिकायतकर्ता सेवाओं से फिर भी असंतुष्ट रहता है कि तो वह दोबारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 27 में वाद दाखिल कर सकता है। शहर का कोई अन्य व्यक्ति भी इस धारा 27 में अपनी शिकायत लेकर फोरम के पास नगर निगम के खिलाफ आ सकता है।
1350 टन कचरा रोजाना निकल रहा
फोरम के न्यायिक सदस्य राजश्रि शुक्ला का कहना है कि आए दिन ऐसी खबरें पढ़ने या देखने को मिलती हैं, जिनमें शहर में गंदगी और आवारा जानवरों की समस्या होती है। लोग परेशान हैं। कई बार निर्देश दिए जाने के बाद भी जब आदेश पर अमल नहीं हुआ तो वेतन काटने जैसा आदेश देना पड़ा। लोग अपनी शिकायत के लिए वाद फोरम में दायर करें। उन्हें भी नगर निगम से राहत दिलाई जाएगी।
लखनऊ में रोजाना करीब 1350 टन कचरा निकलता है। पिछले दिनों एनजीटी की अनुश्रवण समिति के निरीक्षणों में यह हकीकत सामने आई कि कूड़े का वैज्ञानिक रूप से निस्तारण करने की जगह रेलवे की खाली जमीनों, नदी किनारे कूड़े को डंप किया जा रहा है।
50 हजार से अधिक आवारा जानवर शहर में घूम रहे
अवैध डेयरियां और आवारा जानवर भी बड़ी समस्या बने हुए हैं। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, शहर में करीब 50 हजार से अधिक आवारा जानवर घूम रहे हैं।