यूपी: राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के लाभ का रास्ता साफ
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सूबे के 21 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ देने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में सोमवार को हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में राज्य वेतन समिति के गठन को मंजूरी दे दी गई।
यह समिति वेतनमान, पेंशन व रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों के साथ भत्तों व सुविधाओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देगी। कमेटी को छह माह में रिपोर्ट देनी होगी। समिति के चेयरमैन का नाम खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तय करेंगे। प्रदेश सरकार की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दे दिया जाए।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद सूबे के कर्मचारियों की निगाहें प्रदेश सरकार पर टिकी थीं। वित्त विभाग ने केंद्र के आधार पर राज्य कर्मचारियों के वेतनमानों के पुनरीक्षण के लिए वेतन समिति बनाने का प्रस्ताव किया था। सोमवार को प्रदेश कैबिनेट ने चार सदस्यीय वेतन समिति गठित करने का फैसला लिया।
चार सदस्यीय समिति को निर्देश
समिति अपनी संस्तुतियां देते समय राज्य के वित्तीय संसाधनों व विकास संबंधी अन्य प्रतिबद्धताओं को भी ध्यान में रखे।
इन पर देनी है सिफारिश
राज्य कर्मचारी, सहायता प्राप्त शिक्षण व प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मी, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों व विकास प्राधिकरणों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों व स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारी।
छह महीने से पहले भी आ सकती हैं सिफारिशें
जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को इसका लाभ देने के लिए गंभीर नजर आ रही है। ऐसे में समिति अपनी प्रारंभिक सिफारिशें छह महीने से पहले भी दे सकती है। उम्मीद है कि तब तक केंद्र सरकार के स्तर पर भत्तों को लेकर भी निर्णय हो जाएगा। इसके बाद समिति भत्तों के पुनरीक्षण की कार्रवाई कर सकेगी।
हर साल खर्च होंगे 23 हजार करोड़ रुपये अधिक
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने आकलन भी कराया है। इसके अनुसार वेतन व भत्तों को शामिल करने पर हर साल करीब 23 हजार करोड़ रुपये अधिक खर्च होंगे। चूंकि सिफारिशें जनवरी 2016 से लागू होनी हैं।
इस हिसाब से 15 महीने का अतिरिक्त खर्च करीब 26 हजार करोड़ रुपये आने का अनुमान है। केंद्र ने अभी भत्तों पर कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में बिना भत्ते, वेतन पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। हालांकि वास्तविक खर्च का आकलन वेतन समिति ही करेगी।
समिति के अध्यक्ष को राजस्व परिषद चेयरमैन का दर्जा, मिलेगी लालबत्ती
समिति के अध्यक्ष को मुख्यमंत्री नामित करेंगे। उसे राजस्व परिषद के चेयरमैन का दर्जा मिलेगा। उसे लालबत्ती भी मिलेगी। प्रमुख सचिव नियोजन व प्रमुख सचिव कार्मिक द्वारा नामित प्रतिनिधि भी समिति के सदस्य होंगे। सचिव वित्त (वेतन आयोग) के पद पर कार्यरत अधिकारी समिति का सदस्य सचिव होगा।
वर्तमान में अजय अग्रवाल इस पद पर कार्यरत हैं। खास बात ये है कि अग्रवाल छठें वेतन आयोग की संस्तुतियों पर राज्य में विचार के लिए बनाई गई एसएटी रिजवी समिति में भी बतौर सदस्य शामिल थे। इसके अलावा कैबिनेट बैठक में कई और बड़े फैसले लिए गए जो इस प्रकार हैं।
अस्पताल अब खुद पहुंचेंगे मरीजों के पास
प्रदेश में अस्पताल अब खुद मरीजों के पास पहुंचेंगे। इसके लिए सरकार नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिटें शुरू करने जा रही है। पहले चरण में ऐसी 170 मोबाइल यूनिटें चलाई जाएंगी। पीपीपी मोड पर 36 जिलों में पांच वर्ष के लिए इस परियोजना का संचालन होगा। इस पर 380 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सोमवार को कैबिनेट ने इसके टेंडर प्रपत्रों को हरी झंडी दे दी। स्वास्थ्य विभाग अब जल्द ही इसके टेंडर आमंत्रित करेगा। जो सबसे कम रेट में सेवाएं देगा, उसे मोबाइल अस्पताल चलाने का जिम्मा दे दिया जाएगा।
यह मोबाइल डिस्पेंसरी मरीजों का मुफ्त इलाज करेंगी। सरकार इनका खर्च खुद उठाएगी। इन्हें उन दूर-दराज के इलाकों में भेजा जाएगा, जहां अस्पताल एवं डॉक्टर नहीं हैं। ग्रामीण इलाके, खासकर जनजातीय इलाकों में ये मोबाइल मेडिकल यूनिटें कैंप लगाकर इलाज करेंगी।
इस तरह काम करेगी यूनिट
इसके तहत दो-दो वाहनों की एक मोबाइल मेडिकल यूनिट बनाई जाएगी। इनमें डॉक्टर, नर्स के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद रहेगा। जरूरी उपकरणों से लैस मोबाइल अस्पताल में मरीजों की सभी जरूरी जांचें मौके पर करने के साथ ही उन्हें दवाएं भी दी जाएंगी।
इन जिलों में मिलेगी सुविधा
लखनऊ, सीतापुर, बहराइच, बाराबंकी, रायबरेली, श्रावस्ती, गोंडा, फैजाबाद, बलरामपुर, अंबेडकरनगर, सहारनपुर, रामपुर, बरेली, बदायूं, एटा, कासगंज, कन्नौज, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, हरदोई, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बस्ती, आजमगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, महराजगंज, आगरा, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर तथा वाराणसी।
अब नहीं होगा मदरसा शिक्षकों का शोषण
सूबे में अब मदरसा शिक्षकों का शोषण नहीं हो सकेगा। कैबिनेट ने बहुप्रतीक्षित मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा नियमावली-2016 को हरी झंडी दे दी। इसे शिक्षा विभाग की तर्ज पर तैयार किया गया है।
अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग ने मदरसा नियमावली के प्रस्ताव में पहले मदरसा शिक्षकों को हज यात्रा व रमजान की छुट्टियों का प्रावधान किया था, लेकिन वित्त विभाग की आपत्तियों के बाद इसे हटा लिया गया।
मदरसा नियमावली पास हो जाने से अब मदरसा शिक्षकों को आसानी से तय समय पर प्रमोशन भी मिल सकेंगे। शिक्षकों की भर्ती हो या कोई अन्य मसला, सभी इसी नियमावली से ही होंगे। सरकार का दावा है कि नियमावली को इस प्रकार तैयार किया गया है जिससे मदरसों की स्वायत्तता भी प्रभावित न होने पाए।
मदरसा प्रबंधक नहीं कर पाएंगे ‘खेल’
अनुदान पाने वाले मदरसों के प्रबंधक पैसा लेकर शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां कर देते हैं। कई बार ऐसे शिक्षकों को रख लिया जाता है जो पात्र ही नहीं होते। कई प्रबंधक अपने रिश्तेदारों को ही शिक्षक रख लेते हैं। प्रबंधकों के इस खेल पर नियमावली के जरिये अंकुश लगाया जाएगा।
राज्य ग्रामीण पेयजल योजना की गाइडलाइन मंजूर
प्रदेश कैबिनेट ने राज्य ग्रामीण पेयजल योजना की गाइडलाइन को मंजूरी दे दी है। योजना का क्रियान्वयन किस तरह होगा, इसके दिशा-निर्देश गाइडलाइन में तय कर दिए गए हैं। राज्य सरकार ने 2016-17 के बजट में इसके लिए 600 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।
बता दें केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के लिए दी जाने वाली सहायता की हिस्सेदारी में 2015-16 में बदलाव किया था। इससे प्रदेश को जरूरत के हिसाब से रकम नहीं मिल सकी थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल कार्यक्रम के सुचारु क्रियान्वयन के लिए राज्य ग्रामीण पेयजल योजना का एलान किया था। इसके लिए 2016-17 के बजट में 600 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
यह योजना पूरी तरह राज्य सरकार से वित्त पोषित है। इसके तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ व सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। इसके अंतर्गत पाइप पेयजल योजनाओं के अलावा इंडिया मार्क-टू हैंडपंपों की स्थापना भी कराई जाएगी।
बेसिक शिक्षा परिषद में अब 3500 से कम नहीं पेंशन
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों से सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को अब 3500 रुपये से कम पेंशन नहीं मिलेगी। पारिवारिक पेंशन के मामले में भी यह प्रावधान लागू होगा। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे सरकारी खजाने पर सालाना 28.32 करोड़ रुपये का भार बढ़ेगा।
यह सुविधा 1 जनवरी, 2006 के पहले और उसके बाद सेवानिवृत्त, मृत शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों के आश्रितों पर समान रूप से 01 जनवरी, 2006 से लागू होगी। बेसिक शिक्षा परिषद में 8 मार्च, 1978 को जारी शासनादेश के तहत नवीन पेंशन योजना लागू की गई थी। इसका लाभ 1 मार्च,1977 से दिया गया।
इतना ही नहीं 1 अक्तूबर, 1981 से नवीन पेंशन योजना के अंतर्गत पारिवारिक पेंशन की स्वीकृति भी दी गई। राज्य कर्मचारियों के मामले में एक जनवरी 2006 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को पेंशन और पारिवारिक पेंशन की राशि 3500 रुपये निर्धारित की गई थी।
यह आदेश 8 दिसंबर 2008 को जारी किया गया था, लेकिन बेसिक विद्यालयों के शिक्षकों के पेंशन पुनरीक्षण संबंधी 16 सितंबर 2009 और 28 फरवरी 2011 को जारी शासनादेश में न्यूनतम पेंशन और पारिवारिक पेंशन की राशि 3500 रुपये अंकित नहीं की गई थी। हालांकि, 1 जनवरी 2006 को 33 वर्ष की सेवा पूरी करके रिटायर हुए कार्मिकों के न्यूनतम वेतन और ग्रेड वेतन के योग की 50 प्रतिशत न्यूनतम पेंशन की व्यवस्था की गई थी।
हर बुनकर परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य को 500 रुपये पेंशन
हर बुनकर परिवार के 60 साल की उम्र पूरी कर चुके एक सदस्य को अब 500 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। पेंशन की रकम साल में दो बार जनवरी व जून में लाभार्थियों के खाते में आरटीजीएस के जरिए भेजी जाएगी। कैबिनेट ने समाजवादी हथकरघा बुनकर पेंशन योजना को मंजूरी दे दी। इसी के साथ समाजवादी हथकरघा बुनकर पेंशन योजना की नियमावली का भी अनुमोदन कर दिया।
प्रदेश में कृषि के बाद हथकरघा, रोजगार देने वाला सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है। सूबे में लगभग ढाई लाख हथकरघा बुनकर हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था में हथकरघा उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान है। कलात्मक और पारंपरिक उत्पाद तैयार करने में इस उद्योग की अहम भूमिका है।
अन्य व्यवसायों की ओर उनका पलायन रोकने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए पेंशन योजना शुरू की गई है। योजना के तहत पहले साल 30 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। आने वाले वर्षों में लाभार्थी बुनकरों की संख्या के आधार पर बजट का प्रावधान किया जाएगा।
योजना के तहत शारीरिक तथा दृष्टि से निशक्त हथकरघा बुनकरों को आयु सीमा में 10 साल की छूट दी जाएगी। इसके लिए सीएमओ का प्रमाणपत्र देना होगा। लाभार्थियों के चयन में वरीयता क्रम के आधार पर उन बुनकरों को प्राथमिकता दी जाएगी जो हथकरघा पुरस्कार योजना में पुरस्कृत हो चुके हैं। इसके अलावा सोसाइटी के सदस्य और ज्यादा उम्र वाले बुनकरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
शिकोहाबाद-भोगांव मार्ग होगा फोरलेन
मैनपुरी में शिकोहाबाद-भोगांव राज्य मार्ग संख्या-84 (चैनेज 25-43.8 और 49.3 से 61.8 तक) को चार लेन बनाने और 6.56 किमी लंबे घिरोर बाईपास के निर्माण को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस मार्ग को फोरलेन बनाने के लिए पीसीयू मानक में ढील और कार्य की लागत 200 करोड़ रुपये से अधिक होने से कैबिनेट की मंजूरी जरूरी थी।
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के लिए 40 फीसदी राशि देगा राज्य
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना पर आने वाली लागत का 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
यह परियोजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल की गई है। लागत की 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार देगी। बता दें कि मार्च, 2013 में भारत सरकार से हुए एमओयू के अनुसार केंद्र सरकार को 90 प्रतिशत धनराशि और राज्य सरकार को 10 प्रतिशत धनराशि देनी थी, लेकिन बाद में इसमें संशोधन कर दिया गया।
कन्नौज में एनएच-234 को चौड़ा करेगी राज्य सरकार
कैबिनेट ने कन्नौज में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-234) को तिरुआ से बेला तक (चैनेज-142 से 123 तक) राज्य के संसाधनों से फोरलेन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस मार्ग पर राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित हैं।
मार्ग का चौड़ीकरण हो जाने से इत्र उद्योग, कृषि उत्पाद और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांग व आपूर्ति बढ़ेगी। बता दें, एनएच पर राज्य के संसाधनों से कार्य कराने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय पहले ही एनओसी दे चुका है।
अत्याधुनिक तकनीक से होगा सिकंदरा-झींझक-रसूलाबाद मार्ग पर काम
कैबिनेट ने केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय के मानकों के अनुसार कानपुर देहात में सिकंदरा-झींझक-रसूलाबाद (एमडीआर-47) को डेढ़ से दो लेन चौड़ीकरण के लिए मंजूरी दे दी है।
इस मार्ग को किमी-21 से किमी-40 तक नवीनतम मशीनों और नई तकनीक स्टेबलाइजेशन का उपयोग कर चौड़ा किया जाएगा। भूतल परिवहन मंत्रालय के स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट और समय-समय पर किए गए संशोधनों को शामिल करने से राष्ट्रीय स्तर की कंपनियां बिड प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगी।
सैफई के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत में ढील को कैबिनेट की हरी झंडी
इटावा के सैफई में मास्टर प्लान के तहत ड्रेनेज एवं सीवरेज के लिए पाइपलाइन डालने की योजना पर आने वाला खर्च अब त्वरित आर्थिक विकास योजना के मद से किया जाएगा। इसके लिए कैबिनेट ने अनुमति दी है। इसके लिए योजना के मार्गदर्शी सिद्धांत को शिथिल करने संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
हालांकि यह अनुमति सिर्फ सैफई सीवरेज एवं ड्रेनेज योजना के लिए ही मान्य होगी। इस निर्णय के बाद अब त्वरित आर्थिक विकास योजना से 10778.62 लाख रुपए का वित्त पोषण ड्रेनेज व सीवरेज योजना के लिए हो सकेगा।
जनेश्वर मिश्र हथकरघा पुरस्कार योजना की धनराशि बढ़ी
मंत्रिपरिषद ने जनेश्वर मिश्र राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना की धनराशि बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस योजना की गाइड लाइंस को पूर्ववत रखते हुए वित्त वर्ष 2016-17 से जनेश्वर मिश्र राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के तहत प्रथम स्तर के पुरस्कार की राशि 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख और द्वितीय स्तर के पुरस्कार की धनराशि 35 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये की गई है। तृतीय पुरस्कार की धनराशि 25 हजार रुपये यथावत रहेगी। पुरस्कार वितरण का आयोजन हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग करेगा।
गौरतलब है, हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करने और उनके उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने के लिए प्रदेश सरकार ने यह पुरस्कार योजना चलाई है। पुरस्कारों के लिए बुनकरों का चयन मंडल और राज्य स्तर पर करने का प्रावधान है।