STF ने फर्जी आधार बनाने वाला गिरोह पकड़ा, 10 गिरफ्तार, फिंगर प्रिंट क्लोन से करते थे खेल
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यूपी एसटीएफ ने फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कानपुर से 10 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। ये जालसाज भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सर्वर में सेंध लगाकर अधिकृत ऑपरेटर का फिंगर प्रिंट क्लोन बनाते थे। फिर हर ग्राहक से 50 रुपये 150 रुपये में आधार कार्ड बनाते थे।
यही नहीं, ये जालसाज विशेष सॉफ्टवेयर से यूआईडीएआई के सर्वर पर उपलब्ध डाटा से छेड़छाड़ भी करते थे। इस गिरोह का मास्टरमाइंड कानपुर का सौरभ सिंह है। हालांकि सॉफ्टवेयर बनाने वाला सरगना अभी फरार है। एसटीएफ इस मामले में 5 अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
सरगना सौरभ के दो आधार कार्ड
इस गिरोह के सरगना कानपुर के सौरभ सिंह ने तो अपने नाम से दो-दो आधार कार्ड बनवा रखा है। उसके अलावा कानपुर के शुभम सिंह, शोभित सचान, सतेंद्र कुमार, फतेहपुर का शिवम व मनोज, मैनपुरी का तुलसीराम, प्रतापगढ़ का कुलदीप, हरदोई का चमन और आजमगढ़ का गुड्डृ गौड़ को गिरफ्तार किया गया है।
फिंगर प्रिंट स्कैन, रेटिना स्कैनर बरामद
जालसाजों के पास से एसटीएफ ने 11 लैपटॉप, 12 मोबाइल, 18 फर्जी आधार, 46 डमी फिंगर प्रिंट, 2 फिंगर प्रिंट स्कैनर, 2 रेटिना स्कैनर सहित फर्जी आधार तैयार करने का सामान बरामद हुआ है।
इस तरह लॉगइन करते थे आधार की वेबसाइट
अधिकृत ऑपरेटर का फिंगरप्रिंट क्लोन बनाकर लॉगइन करते थे आधार की वेबसाइट
आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने लखनऊ में बताया कि जालसाजों का यह खेल कई सालों से चल रहा था। आधार इनरोलमेंट के लिए अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने सेंटर खुलवाती हैं। सेंटर पर फार्म भरने के बाद आधार कार्ड बनवाने वाले का फिंगर प्रिंट और आईरिस (आंखों की पुतली) की बायोमीट्रिक ली जाती है।
इसके लिए ऑपरेटर को यूआईडीएआई सत्यापित करती है। ये जालसाज अधिकृत ऑपरेटर्स का फिंगर प्रिंट क्लोन बनाकर आधार कार्ड की वेबसाइट लॉगइन करते थे और आधार बनाने के लिए इनरोलमेंट करते थे।
यूट्यूब से सीखी क्लोनिंग
एसटीएफ की मानें तो जालसाजों ने यूट्यूब से फिंगर प्रिंट का क्लोन बनाना सीखा। इसके बाद पॉलीमर क्यूरिंग इंस्ट्रूमेंट, फोटो पॉलीमर रेज केमिकल का इस्तेमाल कर दो शीशों से फिंगर प्रिंट का क्लोन तैयार कर लेते थे। इसी क्लोन के इस्तेमाल से यूआईडीएआई के सर्वर पर लॉग इन करते थे।
प्रदेश के कई शहरों में फर्जी आधार बनाने का केस
आईजी एसटीएफ ने बताया कि यूपी के लखनऊ, कुशीनगर, देवरिया में फर्जी आधार कार्ड बनाने को लेकर केस दर्ज हैं। दूसरे राज्यों में भी ऐसा ही खेल चल रहा है। इसी आधार पर देश में 81 लाख से ज्यादा आधार कार्ड डिएक्टिवेट किए जा चुके हैं।