ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए यहां है बड़ी खुशखबरी
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रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बजट में चारबाग में रूट रिले इंटरलॉकिंग (आरआरआई) को हरी झंडी दे दी है। इसके लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 25 साल पुराना आरआरआई सिस्टम को बदला जाएगा। इससे ट्रेनों की सिग्नलिंग व्यवस्था हाईटेक हो सकेगी।
वहीं दो नए प्लेटफॉर्म भी बनाए जाएंगे। इससे ट्रेनों का ट्रैफिक स्मूथ होगा। यानी चारबाग आउटर पर अभी जो ट्रेने फंसी रहती हैं और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है, उससे निजात मिलेगी। यह कवायद दो साल में पूरी होगी। इससे तीन साल से अटके पड़े चारबाग स्टेशन के री-मॉडलिंग के काम में भी तेजी आ सकेगी।
चारबाग और लखनऊ जंक्शन से चलने वाली रेलगाड़ियों में अक्सर इंजन फेल होने समेत अन्य तकनीकी दिक्कतों की शिकायत रहती हैं। इससे ये ट्रेनें हमेशा देरी से आती-जाती हैं। इसके अलावा दैनिक यात्रियों को सफर कराने वाली पैसेंजर एवं मेमू गाड़ियों का संचालन भी हमेशा पटरी से उतरा रहता है।
ताजा व्यवस्था के तहत एक टीम मुख्यालय से यहां आएगी और परिचालन संबंधी कमियों का पता लगाएगी। इस कवायद से परिचालन विभाग से जुड़े अफसरों के कान खड़े हो गए हैं। सूत्रों की मानें तो इससे तमाम अफसरों की कलई खुलेगी।
एक टच में मिलेगी ट्रेन की जानकारी
चारबाग और लखनऊ जंक्शन पर गाड़ियों से संबंधित जानकारी लेने के लिए पूछताछ केंद्र के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। यहां खास टच स्क्रीन मशीनें लगाई जाएंगी, जिनसे यात्रियों को गाड़ियों के संबंध में सूचनाएं मिल सकेंगी।
दोनों स्टेशनों के हर प्लेटफॉर्म पर ऐसी स्क्रीन लगाई जाएंगी। इसके लिए जल्द सर्वे का काम शुरू होगा। लमंत्री ने देश भर के 2000 स्टेशनों पर रेल डिस्प्ले सिस्टम लगाने की घोषणा की है।
ऐसे काम करेंगी मशीनें इन मशीनों को नेशनल रेल इनक्वायरी सिस्टम और कोच गाइडेंस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को रियल टाइम सूचना मिलेगी। यह भी पता चलेगा कि उनकी गाड़ी कहां है और कितनी देर में यहां पहुंचेगी।
सूचना देने के अलावा ये मशीनें रेलवे को राजस्व भी देंगी। इन पर एक निर्धारित अवधि में विज्ञापन चलाए जाएंगे। यह भी पता चलेगा कि उनकी गाड़ी कहां है और कितनी देर में यहां पहुंचेगी। सूचना देने के अलावा ये मशीनें रेलवे को राजस्व भी देंगी। इन पर एक निर्धारित अवधि में विज्ञापन चलाए जाएंगे।