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हाईकोर्ट ने कहा : माता-पिता ही नैसर्गिक अभिभावक, नाना-नानी के पास रह रहे बच्चे को पिता को देने का आदेश
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 17 Oct 2022 12:03 AM IST
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सार
नाना-नानी का कहना था कि यदि वे बच्चे को पिता को सौंप देंगे तो उसे सौतेली मां से रूबरू होना पड़ेगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि नाना-नानी बुजुर्ग हैं और पिता सक्षम व संपन्न है। ऐसे में पिता, बच्चे का अनुपयुक्त अभिभावक होना भी नहीं प्रतीत होता है।
लखनऊ हाईकोर्ट
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि माता-पिता ही नाबालिग बच्चे के नैसर्गिक अभिभावक हैं। उनके पास ही बच्चे का पूरा कल्याण निहित है। इस नजीर के साथ हिंदू नाबालिग व अभिभावकत्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोर्ट ने मां के निधन के बाद से नाना-नानी के पास रह रहे नौ साल के बच्चे को उसके पिता को सौंपने का आदेश दे दिया।
न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह फैसला कुशीनगर जिले के पडरौना निवासी दीपक कुमार त्रिपाठी की याचिका पर सुनाया। दीपक ने कहा था कि 31 अक्तूबर, 2013 को उसकी पहली पत्नी से बेटा हुआ। कुछ समय बाद आग लगने से उनकी पत्नी की मौत हो गई। तबसे उनका बेटा नाना-नानी के पास ही रह रहा है।
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याची ने बताया कि उसने दूसरी शादी बेटे के नाना-नानी की सहमति पर की। दूसरी पत्नी से भी उसकी दो संतानें हैं। कोर्ट को बताया कि वह सरकारी सेवा में है और उसके खिलाफ कोई आपराधिक केस नहीं। वह अपने बेटे की देखभाल करने में सक्षम है।
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वहीं, नाना-नानी का कहना था कि यदि वे बच्चे को पिता को सौंप देंगे तो उसे सौतेली मां से रूबरू होना पड़ेगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि नाना-नानी बुजुर्ग हैं और पिता सक्षम व संपन्न है। ऐसे में पिता, बच्चे का अनुपयुक्त अभिभावक होना भी नहीं प्रतीत होता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने नाना-नानी को आदेश दिया कि 20 अक्तूबर को बच्चे को उसके पिता को सौंप दें।