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यूपी चुनाव में ममता संग सियासी फायदा देख रहे हैं अखिलेश

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 30 Nov 2016 10:40 AM IST
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motive behind mamata and akhilesh friendship.
ममता बनर्जी व अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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नोटबंदी पर पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ सबसे ज्यादा हमलावर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हाथ मिलाने में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सियासी फायदा भी दिखाई दे रहा है।



विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बसपा प्रमुख मायावती नोटबंदी पर आक्रामक हैं और रोज मोदी पर हमला बोल रही हैं। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर खेमों में बंटी नजर आ रही है।
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बसपा प्रमुख भाजपा और सपा के बीच अंदरखाने गठजोड़ तक का आरोप लगा रही हैं। सियासी गलियारे में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पर मोदी के प्रति नरम रुख अपनाने की चर्चाएं भी चल रही हैं।
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इन चर्चाओं को इससे भी बल मिला कि मुलायम के दिल में रहने वाले पार्टी महासचिव अमर सिंह खुलकर मोदी के समर्थन में खड़े हो गए हैं। सोमवार को मुलायम से मुलाकात करने के बाद से अमर सिंह ‘मोदी राग’ अलाप रहे हैं।

समाजवादी व भाजपा कभी एक नहीं हो सकते

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चुनाव नजदीक हैं ऐसे में अखिलेश ममता दीदी के साथ खड़े होकर जहां नोटबंदी से परेशान आम जनता की सहानुभूति हासिल करना चाहते हैं, वहीं यह संदेश देने की भी कोशिश कर रहे हैं कि समाजवादी और भाजपा कभी एक नहीं हो सकते।

नोटबंदी को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से भी ज्यादा आक्रामक ममता को लखनऊ आने का न्यौता देकर अखिलेश ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।

सोमवार को ममता के लखनऊ पहुंचने पर अखिलेश ने कई मंत्रियों के साथ खुद एयरपोर्ट पहुंचकर जिस गर्मजोशी से उनकी अगवानी की, उसके बाद सियासी गलियारे में सवाल यह भी तैरने लगा है कि दिल्ली में नोटबंदी पर पूरे विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम में जुटीं ममता को सपा सुप्रीमो ने जिस तरह से ठेंगा दिखाया था क्या अखिलेश उसका प्रायश्चित कर रहे हैं?

जाहिर है कि ऐसा नहीं। दोबारा सत्ता में लौटने की जद्दोजहद उन्हें ममता बनर्जी जैसे नेताओं के साथ खड़ा होने के लिए मजबूर कर रही है। यह उनकी तात्कालिक चुनावी जरूरत भी है, क्योंकि जहां एक तरफ भाजपा की चुनौती है, वहीं दूसरी मायावती भी चुनाव नजदीक आने के साथ ही सपा के साथ-साथ उनके प्रति भी आक्रामक होने लगी हैं।

आक्रामक दिखाई देना चाहते हैं अखिलेश

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नोटबंदी को लेकर पार्टी के कुछ बड़े नेता भले ही मोदी के प्रति नरम रुख अपना रहे हों पर अखिलेश खुद आक्रामक दिखाई देना चाहते हैं। इसमें उन्हें सियासी फायदा नजर आ रहा है।

शायद यही वजह है कि मुलायम के दो टूक इन्कार के बाद भी अखिलेश गाहे-बगाहे यह कहने से नहीं चूक रहे कि यूपी चुनाव के लिए अगर महागठबंधन बनता है तो भाजपा का सूपड़ा हो सकता है।

चुनाव में समर्थन की भी उम्मीद
सियासी जानकारों का कहना है कि अभी अखिलेश नोटबंदी के खिलाफ मुहिम में ममता का साथ दे रहे हैं तो चुनाव में अखिलेश के लिए माहौल बनाने के लिए ममता भी उनके साथ खड़ी हो सकती हैं।

विधानसभा चुनाव में ममता को साथ खड़ा कर अखिलेश मायावती के हमलों की धार कुंद करना भी चाहते हैं। लखनऊ में सरकार के कामकाज की तारीफ करके ममता ने अखिलेश का समर्थन करने के संकेत दे भी दिए हैं।

मोदी विरोधियों के जरिये चुनावी लाभ की कोशिश

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जानकारों का कहना है कि यूपी समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में नोटबंदी का असर पड़ना तय है। ऐसे में अखिलेश की कोशिश मोदी विरोधियों के साथ खड़ा होकर चुनाव में सियासी फायदा उठाने की है।

ममता का साथ अखिलेश को कितना फायदा पहुंचाता है यह तो चुनाव के नतीजे बताएंगे लेकिन माहौल तैयार करने में जरूर मदद मिल सकती है।

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