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21 हजार वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को सरकार देगी सामाजिक सुरक्षा: मुख्यमंत्री योगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 05 Sep 2019 10:42 PM IST
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quality and quantity of teaching award increased in last two years says yogi
शिक्षक सम्मान समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य। - फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के 21 हजार वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को सरकार सामाजिक सुरक्षा देगी। वित्तविहीन शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए सरकार जल्द नियमावली लागू करेगी। वे गुरुवार को लोकभवन में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में बोल रहे थे।



समारोह में माध्यमिक शिक्षा विभाग के 8 शिक्षकों को ‘राज्य अध्यापक पुरस्कार’, वित्तविहीन विद्यालयों के 15 शिक्षकों को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार’, उच्च शिक्षा विभाग के दो शिक्षकों को ’सरस्वती पुरस्कार’ और 6 शिक्षकों को ‘शिक्षक श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक अच्छे प्रयासों और नवाचारों को लिपिबद्ध भी करें, समकालीन प्रेरणादायक घटनाओं पर लेख भी लिखें, अगले वर्ष से शिक्षक पुरस्कार के मानकों में लेखन को भी शामिल किया जाएगा।
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सीएम ने माना कि प्रदेश में संचालित 21 हजार माध्यमिक वित्तविहीन विद्यालयों के बिना शिक्षा के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता है। शिक्षकों को इस बात को ध्यान में रखना होगा कि बच्चों के लिए शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास की आधारशिला भी है।

'पाठ्यक्रम का सरलीकरण करेंगे तो बच्चे उसे आसानी से सीख सकेंगे'

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उन्होंने कहा कि शिक्षक स्कूलों में पठन-पाठन की सहज और सरल पद्धति अपनाएं। पाठ्यक्रम का सरलीकरण करेंगे तो बच्चे उसे आसानी से सीख सकेंगे। अक्सर देखा जाता है कि शिक्षक शिक्षा के अलावा कोई दूसरा काम करते हैं। स्कूलों की हालत यह है कि बच्चे अपने प्रधानाचार्य को नहीं जानते, इसकी वजह शिक्षक-छात्र के बीच संवादहीनता है।

शिक्षकों को इस संवादहीनता की वजह को तलाशना होगी। शिक्षक विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित कर शिक्षा के साथ समाजसेवा में भी अपना योगदान दे सकते हैं। समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा भी मौजूद थे।

अब नहीं चलेगा पिक एंड चूज का खेल
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना में पिक एंड चूज का खेल चलता था। इसमें जिसे अनुमति देनी होती थी उसके लिए नियम शिथिल कर दिए जाते थे। सरकार ने निजी विश्वविद्यालय एक्ट लागू कर दिया है, अब सभी निजी विवि एक ही अम्ब्रेला एक्ट के अधीन हैं। दो वर्ष में शिक्षा की गुणवत्ता में काफी सुधार किया है।

उच्च शिक्षा विभाग में सत्र नियमित किए गए हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया गया है। माध्यमिक शिक्षा में नकलविहीन परीक्षा, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया है। दो वर्षों में जिन बच्चों ने यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट पास किया है, वे गर्व से कह सकेंगे कि वे मेहनत से पास हुए।

जल्द भरे जाएंगे शिक्षकों के खाली पद : शर्मा

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उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा - फोटो : amar ujala

उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षकों के रिक्त पद जल्द भरे जाएंगे। पहले शिक्षकों को अपनी मांगों के लिए धरना-प्रदर्शन करना पड़ता था, लेकिन अब शिक्षकों को बिना मांगे ही सबकुछ मिल रहा है। सातवें वेतनमान का लाभ शिक्षकों को बिना किसी आंदोलन के मिला है। प्रदेश में पहली बार वित्तविहीन शिक्षकों को सम्मानित किया गया है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को आवासीय भत्ता भी दिया जा रहा है। ढाई वर्ष में योगी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार किया है। ऑनलाइन ट्रांसफर व्यवस्था शुरू की है, प्रमाण-पत्रों के ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है।

मोदी-योगी के रूप में दो संत मिले : गुलाबदेवी

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शिक्षक सम्मान समारोह - फोटो : amar ujala

माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी ने कहा कि देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रूप में दो संत मिले हैं। पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए समाप्त करके साहसिक कार्य किया है। वहीं सीएम योगी ने मात्र ढाई वर्ष में प्रदेश को नई दिशा दी है। ढाई साल पहले प्रदेश को नकल प्रदेश कहा जाता था।

अवसरवादी बच्चे आगे बढ़ जाते थे और योग्य बच्चे पीछे छूट जाते थे लेकिन अब प्रदेश की मेधा को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। गुलाबदेवी ने कहा कि महिला शिक्षकों की चुनौती कम नहीं है। उन्हें परिवार, स्कूल और विद्यालय प्रबंध समिति से चुनौती का सामना करना पड़ता है।

शिक्षा जगत एक-दूसरे का सहयोग करेगा तो उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बनेगा : राज्यपाल

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शिक्षकों को सम्मानित करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का पाठ पढ़ाया। अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षकों को गलत बात स्वीकार नहीं करने और बच्चों में मूल्यनिष्ठ शिक्षा का विकास करने की सीख भी दी।

राज्यपाल ने कहा कि अच्छे कार्य करने वाले शिक्षक का सम्मान सभी स्थान पर नहीं हो पाता। यदि कहीं भी कोई शिक्षक कहीं अच्छा कार्य कर रहा है तो उसका सम्मान होना चाहिए। राज्यपाल ने गुजरात के एक स्कूल की घटना सुनाते हुए कहा कि शिक्षक में संवेदना का होना आवश्यक है। शिक्षकों में संवेदना नहीं है तो कुछ नया प्रयास नहीं कर सकते। यदि प्रदेश के सभी शिक्षक एक-दूसरे का सहयोग करेंगे तो उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बनकर ही रहेगा।

बच्चों की सोच नकारात्मक नहीं होती
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों की सोच नकारात्मक हो सकती है, लेकिन बच्चे कभी गलत नहीं सोचते। उन्होंने एक प्रसंग का उदाहरण देते हुए बताया कि बच्चे चोरी नहीं करते ना ही फ्री में कुछ लेना चाहते हैं।

भाजपा के समय ही होते हैं परिवर्तन
राज्यपाल ने कहा कि जब-जब भाजपा की सरकार आती है तब-तब ही व्यवस्था में सुधार और परिवर्तन होता है। बीते एक महीने में उन्होंने प्रदेश के कुछ जिलों का दौरा किया है। योगी आदित्यनाथ सरकार के ढाई वर्ष के कामकाज का असर दिख रहा है। योगी सरकार ने जमीनी स्तर पर सुधार करने की कोशिश की है, जमीनी स्तर पर सुधार के परिणाम आने में थोड़ा वक्त लगता है।

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