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मंत्रिपरिषद फेरबदल में मोदी का मास्टर शॉट, यूपी की संख्या घटी, पर हिसाब बराबर

अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 04 Sep 2017 11:20 AM IST
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Uttar Pradesh representation after cabinet reshuffle of central government.
प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री राजनाथ सिंह
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंत्रिमंडल पुनर्गठन के जरिये लगभग 18 महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के समीकरण साधने की कोशिश की। उत्तर प्रदेश कोटे से चार मंत्रियों के मंत्रिमंडल से बाहर होने और इनकी जगह सत्यपाल सिंह और शिवप्रताप शुक्ल के रूप में सिर्फ दो राज्यमंत्रियों को ही शामिल करने से गिनती के लिहाज से प्रदेश की संख्या घटी हुई जरूर  नजर आती है। पर, गहराई से देखें तो साफ हो जाता है कि संख्या घटाने के बावजूद मोदी ने उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों पर कोई खतरा नहीं आने दिया है।

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उल्टे उन्होंने इन समीकरणों को और अनुकूल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसीलिए उन्होंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि जातीय और क्षेत्रीय असंतुलन का संदेश न जाने पाए। यही नहीं, प्रधानमंत्री ने उमा भारती का मंत्रालय बदलकर यूपी और गंगा के सरोकारों पर केंद्र की चिंता व प्राथमिकता का संदेश देने की कोशिश की है। साथ ही यह साफ कर दिया है कि प्राथमिकता वाले विषयों पर ढिलाई बरदाश्त नहीं की जा सकती।
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अब ये हैं मंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राजनाथ सिंह, उमा भारती, मेनका गांधी, साध्वी निरंजन ज्योति, संतोष गंगवार, वी.के. सिंह, मनोज सिन्हा, अनुप्रिया पटेल, डॉ. महेश शर्मा, कृष्णा राज, शिव प्रताप शुक्ल, डॉ. सतपाल सिंह

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केंद्रीय मंत्रिमंडल में घटी हिस्सेदारी, पहले 15 अब रह गए 13

Uttar Pradesh representation after cabinet reshuffle of central government.

वैसे तो मुख्तार अब्बास नकवी मूलत: उत्तर प्रदेश के ही हैं। उनका कैबिनेट मंत्री पद पर पदोन्नति यूपी में भी मोदी और भाजपा के सबका साथ व सबका विकास नारे को ज्यादा ताकत देगा। पर, नकवी इस बार वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य नहीं हैं। इसलिए अगर नकवी को हटाकर हिसाब किताब करें तो मोदी के मंत्रिमंडल में अभी तक उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री सहित 15 मंत्री थे। इनमें मोदी के अलावा पांच कैबिनेट और शेष राज्यमंत्री थे।

पर, कलराज मिश्र, डॉ. संजीव बालियान, डॉ. महेन्द्र पाण्डेय के त्यागपत्र दे देने और मनोहर परिकर के गोवा का मुख्यमंत्री बन जाने के बाद यह संख्या घटकर 11 रह गई थी। परिकर उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनाकर बतौर रक्षा मंत्री मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया था। आज हुए विस्तार में मंत्रिमंडल से हटे इन चार मंत्रियों की जगह उत्तर प्रदेश से बागपत से सांसद सत्यपाल सिंह और राज्यसभा सदस्य शिवप्रताप शुक्ल अर्थात सिर्फ दो लोगों को ही बतौर राज्यमंत्री मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इस प्रकार गिनती के लिहाज से देखा जाए तो पहले की तुलना में केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी की हिस्सेदारी दो घट गई है।

इसलिए हिसाब-किताब बराबर
राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए पहले की तुलना में भागीदारी घटने से यूपी के लोगों में भाजपा को लेकर कोई नकारात्मक संदेश जाने की संभावनाएं दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती। कारण, यह है कि मनोहर परिकर भले ही राज्यसभा सदस्य के नाते तकनीकी रूप से यूपी के कोटे के मंत्री गिनाए जाते हों। पर, व्यावहारिक नजरिये से उनके मंत्रिमंडल में रहने या न रहने से यूपी में भाजपा के सियासी समीकरणों पर बहुत असर पडऩे की संभावना नहीं है।

डॉ. पांडेय को पार्टी की बागडोर सौंपकर मोदी ने ब्राह्मणों की भागीदारी घटने की भरपाई पहले ही कर ली है। कलराज मिश्र के स्‍थान पर शिवप्रताप शुक्ल को शामिल कर ब्राह्मण और पूर्वांचल समीकरणों को भी पहले जैसा ही बनाए रखने की की कोशिश की है। कलराज मिश्र को राज्यपाल बनना ही है। इससे लगता है कि भाजपा रणनीतिकारों ने समीकरणों को पहले से भी ज्यादा संतुलित बनाने की कोशिश की है।

पश्चिम की नुमाइंदगी जस की तस

Uttar Pradesh representation after cabinet reshuffle of central government.

हालांकि सभी को उम्मीद थी कि इस विस्तार में पश्चिम के किसी सांसद को कैबिनेट मंत्री बनाकर प्रदेश संगठन और सरकार में भारी दिख रहे पूरब के साथ पश्चिम का संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी। अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र पाण्डेय, एक उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य सभी पूर्वी उत्तर प्रदेश के हैं। विशेष समीकरणों के चलते भाजपा का साथ देते रहे पश्चिम का रुतबा बढ़ेगा। ऐसा माना जा रहा था।

हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समीकरणों को मंत्रिमंडल में पहले की तरह से बनाए रखने का पूरा प्रयास है। संजीव बालियान हटे हैं तो उनकी जगह रालोद के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को हराकर लोकसभा पहुंचे सतपाल सिंह को शामिल किया गया है।

इस समीकरण का भी संतुलन
लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज की परिस्थितियों में आए अंतर को भी ध्यान में रखकर नामों का फैसला किया है। पहले प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं थी। तब मोदी को उत्तर प्रदेश को लेकर खुद के सियासी सरोकारों का संदेश देने के लिए एकमात्र तरीका केंद्रीय मंत्रिमंडल ही था। पर, आज प्रदेश में भाजपा की सरकार है। जाहिर है कि आज वैसी मजबूरी नहीं है।

छह सांसदों पर एक मंत्री
यूपी में अभी तक भाजपा के पांच सांसदों पर केंद्र में एक मंत्री का औसत था। अब यह छह हो गया है। लोकसभा व राज्यसभा मिलाकर यूपी से भाजपा गठबंधन के कुल 76 सांसद हैं। 75 जिलों के हिसाब से मोदी मंत्रिमंडल में प्रत्येक छह जिलों पर औसत एक मंत्री को केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दे दिया गया है।

अगड़ों-पिछड़ों का समीकरण, पांच महिलाएं भी मंत्रिमंडल में

Uttar Pradesh representation after cabinet reshuffle of central government.

यूपी से शामिल 13 चेहरों में छह अगड़े, छह पिछड़े, एक दलित है। अगड़ों में अब दो ब्राह्मण, दो ठाकुर, एक भूमिहार के साथ एक मेनका गांधी शामिल हैं। नरेन्द्र मोदी को छोड़कर कुर्मी के दो, लोध, निषाद और जाट से एक-एक चेहरे को जगह मिली है। कृष्णा राज के रूप में दलितों में जाटवों के बाद अनुसूचित जाति में सबसे ज्यादा संख्या वाले पासी समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है। यूपी से पांच महिलाएं मोदी के मंत्रिमंडल में हैं।

गोरखपुर को महत्व का मतलब
प्रतीकों की राजनीति करने में महारत रखने वाले मोदी ने गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ के रूप में मुख्यमंत्री होते हुए शिव प्रताप शुक्ल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करके पूर्वांचल के ब्राह्मण समीकरण संतुलित रखने और उनका महत्व बरकरार रखने का संदेश देने की कोशिश की है। कहीं न कहीं इसके पीछे गोरखपुर में हाल में हुई बच्चों की मौत और उसके बाद की परिस्थिति भी नजर आ रही है।

योगी की व्यस्तता को देखते हुए मोदी ने शिवप्रताप के रूप में अब गोरखपुर में केंद्र सरकार की भी आंख और कान दिया है। जिससे उन्हें न सिर्फ गोरखपुर बल्कि पूर्वांचल की हाल भी लगातार मिलता रहेगा। साथ ही केंद्रीय मंत्री के रूप में शिवप्रताप के जरिये स्थानीय अधिकारियों को भी सीधे संपर्क में रखा जा सकेगा। वैसे मोदी मंत्रिमंडल में पहली बार गोरखपुर को प्रतिनिधित्व मिला है।

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