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BJP का सपना चकनाचूर, मोदी की लोकप्रियता गिरी!

Updated Fri, 07 Mar 2014 11:53 AM IST
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Narendra Modi popularity dips says survey
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'मोदी लहर' की खुमारी में डूबी बीजेपी को लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता घटने लगी है।



छह राज्यों में मोदी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर लोगों से सवाल पूछे गए। इनमें से केवल 31 फीसदी ही मोदी के पक्ष में दिखे, जबकि जनवरी में इनकी तादाद 36 प्रतिशत थी।
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हालांकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी (13%), कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, बसपा सुप्रीमो मायावती, समाजवादी प्रमुख मुलायम सिंह यादव और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की लोकप्रियता में एक फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया।

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यूपी-बिहार के पास सत्ता की चाबी

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सीएनएन-आईबीएन-सीएसडीएस ने अपने सर्वे में दावा किया है कि अब भी छह राज्यों में बतौर प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी पर बढ़त बनाए हुए हैं।

ये राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, दिल्ली और तमिलनाडु। लोकसभा सीटों की लिहाज से ये राज्य बेहद अहम है। हालिया सर्वे में तो उत्तर प्रदेश और बिहार में एनडीए को जबर्दस्त कामयाबी मिलने की बात कही गई थी।

यदि अभी लोकसभा चुनाव होते हैं तो एनडीए को भारी फायदा होगा। राजग को 212-232 सीटें मिल सकती है। वहीं यूपीए की सीटों की तादाद 119-139 पर सिमट सकती है। अकेले अपने दम पर बीजेपी के खाते में 193-213 सीटें आ सकती है। वहीं कांग्रेस को 94-110 सीटें मिल सकती है।

छोटे दल बनेंगे किंगमेकर!

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हालांकि कुल वोट शेयर के मामले में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को थोड़ा नुकसान होता दिख रहा है। कहीं न कहीं इसका लाभ तीसरे मोर्चे अथवा अन्य राजनीतिक दलों को मिल सकता है।

एनडीए और यूपीए के बाद सीटों के मामले में तृणमूल कांग्रेस नंवर वन पार्टी होगी। टीएमएसी को 20-28 के बीच लोकसभा सीट मिल सकती है। वहीं वामपंथी दलों को 15-23, अन्नाद्रमुक को 14-20, वाईएसआर कांग्रेस 11-17 और सपा को 11-17 सीटें मिल सकती है।

साथ ही बीजद, टीडीपी, द्रमुक, बसपा के सीटों के आंकड़े 20 से नीचे ही रहेंगे। ऐसे में किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर सरकार गठन में इन दलों की भूमिका ‌बेहद अहम साबित होगी।

मोदी को ममता की दो टूक

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इधर, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने संकेत दिया है कि चुनाव बाद की परिस्थिति में वह एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता या बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ जा सकती हैं। हालांकि उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनने वाली किसी भी सरकार को समर्थन नहीं देने की बात कही।

एक टीवी चैनल से बातचीत में ममता से जब यह पूछा गया कि यदि जयललिता प्रधानमंत्री बनना चाहें तो वह उनका समर्थन करेंगी, तो ममता ने कहा कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है। वह कुर्सी नहीं लोगों की चिंता करती हैं।

मायावती और जयललिता के साथ मंच साझा करने से संबंधित सवाल पर ममता ने कहा कि वाजपेयी सरकार के दौरान हमलोग काम कर चुके हैं। ऐसे में कौन कहता है कि हमलोग साथ नहीं रह सकते?

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