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विकास के साथ संवाद भी
नई दिल्ली
Updated Fri, 04 Jul 2014 08:20 PM IST
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प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी पहली जम्मू-कश्मीर यात्रा में नरेंद्र मोदी ने जो संदेश दिया है, वह विकास के मोर्चे पर उत्साहित करने वाला है। कटड़ा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन कर जहां उन्होंने जम्मू के विकास की एक ओर नींव रखी है, वहीं उरी में 240 मेगावाट की पनबिजली परियोजना के दूसरे चरण की विधिवत शुरुआत कर कश्मीर को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का संदेश दिया है।
कटड़ा रेल स्टेशन का सपना अंततः साकार होना दो वजहों से बहुत महत्वपूर्ण है। एक तो वैष्णो देवी जाने वाले तीर्थयात्री देश के किसी भी हिस्से से रेलगाड़ी पकड़कर अब सीधे कटड़ा उतर सकेंगे। दूसरे, जम्मू-कश्मीर को देश से जोड़ने के लिए जिस महत्वाकांक्षी कश्मीर रेल संपर्क परियोजना की शुरुआत की गई थी, उसमें अब सिर्फ कटड़ा से बनिहाल पास तक का काम ही शेष रह गया है।
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बेशक पहाड़ी इलाकों में रेल पटरियां बिछाना उतना आसान नहीं है; उधमपुर से कटड़ा तक करीब पच्चीस किलोमीटर की रेल पटरी बिछाने में ही न सिर्फ वर्षों लग गए, बल्कि दुर्गम इलाकों में पुल और सुरंग बनाने का काम भी उतना ही चुनौतीपूर्ण था। लेकिन यह उम्मीद तो करनी ही चाहिए कि यह नया रेल लिंक राज्य में विकास की गति तेज करेगा।
प्रधानमंत्री ने हिमालयी राज्यों में विकास का समान मॉडल तैयार करने की जो बात कही है, उससे भी यह उम्मीद बंधती है कि वह जम्मू-कश्मीर को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की पिछली सरकारों की पहल को और आगे बढ़ाएंगे। अलबत्ता जम्मू के विपरीत कश्मीर में प्रधानमंत्री के दौरे पर खामोशी और विरोध का माहौल बहुत उत्साहित नहीं करता।
प्रधानमंत्री ने यह कहा तो है कि विकास के माध्यम से वह जम्मू-कश्मीर का दिल जीतेंगे, लेकिन जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा पर फिर से विचार करने और घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी के साथ उनके लिए अलग शहर बसाने की मोदी सरकार की घोषणाओं का वहां हुए विरोध को देखते हुए प्रधानमंत्री से अतिरिक्त सक्रियता और संवेदनशीलता की अपेक्षा है। यह सही है कि अलगाववादियों के तौर-तरीकों से सहमत नहीं हुआ जा सकता। पर इसका मतलब यह नहीं कि वहां संवाद की गुंजाइश ही न रहे। केंद्र की पिछली सरकारों ने भी विश्वास बहाली के लिए संवाद का रास्ता बनाए रखा था। जम्मू के साथ कश्मीर को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने से ही बात बनेगी।