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रूस- यूक्रेन युद्ध: उजड़ी जिंदगियों को फिर से आबाद करने में जुटी मानवीय संवेदनाएं

Priyamvada Sahay प्रियंवदा सहाय
Updated Thu, 31 Mar 2022 01:41 PM IST
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सार

युद्ध में बेघर हुए बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ी है। बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

Russia Ukraine War Website help Ukrainian refugees find shelters around the world
यूक्रेन शरणार्थी - फोटो : facebook
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विस्तार

युद्ध की तबाही में उजड़े जीवन को संवारने की जिम्मेदारी केवल सरकार और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की नहीं होती बल्कि मानवीय संवेदनाएं भी इसपर मरहम का काम करती हैं। ऐसा ही कुछ यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध में बेघर हो चुके यूक्रेनियाई शरणार्थियों के लिए हो रहा है। स्वीडन में रोजाना बड़ी संख्या में यूक्रेन से लोग आ रहे हैं। उम्मीद है कि जुलाई तक यहां यूक्रेन से आने वाले शरणार्थियों की संख्या लाख तक पहुंच जाए। इनके आने और रहने की व्यवस्था एक तरफ सरकार कर रही है तो दूसरी ओर यहाँ के नागरिक भी अपने स्तर पर हर संभव मदद में लगे हुए हैं। यहाँ कुछ लोगों ने युद्ध के शरणार्थियों की मदद व्यक्तिगत स्तर पर करने की सोची। उन्होंने यूक्रेन से आ रहे लोगों के घर या कमरे की तलाश को आसान बनाने के लिए एक ऐप का सहारा लिया है। ICanHelp.Host ऐप की मदद से यह पता चल सकता है कि कहां कमरे या घर की व्यवस्था है। यानी कोई व्यक्ति मुफ्त में या फिर एक मेजबान के तौर पर यूक्रेनियन शरणार्थियों को शरण देने को तैयार है। पिछले कुछ दिनों में यह तरीका काफी लोकप्रिय हो गया और यूरोप के अलग अलग शहरों में इस तरह ऐप के जरिए शरणार्थियों के रहने की व्यवस्था होने लगी।

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यूक्रेन शरणार्थी - फोटो : facebook

ICanHelp.Host प्लेटफार्म का उद्देश्य यूक्रेन के लोग जो अन्य यूरोपीय देशों में आश्रय चाहते हैं उनके लिए घरों की तलाश करना है। इसे एक स्वयंसेवी मंच भी माना जा सकता है जिसका लक्ष्य मौजूदा मानवीय संकट में शरणार्थियों की मदद करना है। यह भी जानना जरूरी है कि इसमें जुड़े ज्यादातर लोग मूलतः बेलारूस से हैं। जहां उन्होंने तानाशाही शासन का दंश झेला है और इसके खिलाफ आवाज भी उठाई है। इसलिए वे पलायन कर रहे यूक्रेनियाई लोगों के दर्द को ज्यादा समझ रहे हैं और मदद को इस तरह आगे आ रहे हैं। 

ICanHelp.Host के एक सदस्य का कहना है कि हम पलायन कर रहे यूक्रेनियाई लोगों की मदद करने के लिए एकजुट हैं ताकि वे अपना जीवन बचा सकें और यूरोप में ही एक अस्थायी घर ढूंढ सकें। जहां वे जितनी जल्दी हो सके अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बहाल कर सकें। फिलहाल इस ऐप के जरिए हजारों की संख्या में लोगों ने मेजबान बनने का प्रस्ताव दिया है। ठीक इसी तरह Shelter4au.Com की मदद से हजारों हाथ मदद के लिए बढ़े हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह के कार्य में ज्यादा से ज्यादा लोगों के शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है। जिस वजह से रोजाना सहायता कार्य के लिए आम जनता नए नए तरीकों के साथ आगे आ रही है।

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यूक्रेन शरणार्थी - फोटो : facebook

बात यहां नहीं रुकती, युद्ध में बेघर हुए बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ी है। बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उन्हें युद्ध के दहला देने वाली यादों से निकालने लिए बच्चों के खेलकूद से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी लियो लेलैंड ने सभी नॉर्डिक देशों व जर्मनी में यूक्रेन के पासपोर्ट धारक या पहचान पत्र धारक बच्चों के लिए निःशुल्क खेलकूद की व्यवस्था की है ताकि बच्चों को मानसिक व भावनात्मक सदमे से उबारने में सहायता मिल सके।

इसी तरह रोमानिया में वहाँ की पुलिस और आम जनता ने मिलकर एक अनोखी पहल की है। यह पहल खासतौर पर यूक्रेन से आने वाले बच्चों के लिए है। यहां रोमानिया यूक्रेन सीमा पर आने वाले एक पुल के किनारे लंबी कतार में खिलौने रखे गए हैं। ताकि रोमानिया की सीमा में आने वाले शरणार्थी बच्चे इन खिलौनों को उठा सकें और नई जगह में एक अच्छी सोच के साथ अपनी जिंदगी की शुरुआत कर सके। ऐसे ना जाने कितने मानवीय पहलू हैं जो यूक्रेन वासियों की मदद के लिए समूचे यूरोप में नजर आ रहा है।
 

स्वीडन में आने वाले शरणार्थियों के रहने के साथ स्कूल में उनके नामांकन और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल पर भी काम किया जा रहा है। कोशिश यह की जा रही है कि यहां आने वाले छोटे बच्चों से लेकर विश्वविद्यालयों तक में सभी जगह यथाशीघ्र बिना किसी अवरोध के पढ़ाई शुरू हो जाए। जबकि पोलैंड में आने वाले शरणार्थियों में खासतौर पर बच्चों की मदद के लिए स्थानीय निवासी स्ट्रॉलर दान कर रहे हैं। रेलवे स्टेशनों पर शरणार्थियों के बच्चों को बैठाकर सुलाने वाले स्ट्रोलर्स की लंबी लाइन लगी है। जिसे स्थानीय लोगों ने मदद के तौर पर दान किया है। ताकि बच्चों के सोने- बैठने की व्यवस्था हो सके। ऐसी न जाने कितनी मानवीय संवेदनाओं को प्रकट करने वाली घटनाएं हैं जो यहां आए दिन देखने-सुनने को मिल रही हैं।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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