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बाइस्कोप: सूर्यवंशम में काम करने से इन दो हीरोइनों ने किया था इनकार, जानिए क्यों रेखा ने की डबिंग

पंकज शुक्ल, मुंबई Published by: प्रतीक्षा राणावत Updated Thu, 21 May 2020 09:38 PM IST
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sooryavansham movie this day that year series by pankaj shukla 21 may 1999 bioscope Amitabh bachchan Saundarya
सूर्यवंशम

सूर्यवंशम फिल्म का हिंदी सिनेमा में अलग ही फैन बेस है। ये उन फिल्मों में से है जिन्हें आप अपने घर का ऐसा जरूरी सामान कह सकते हैं जिसे घर में रखने का मन भी नहीं करता और फेंकने का भी दिल नहीं करता। 21 साल पहले इस फिल्म को थिएटर में देखते समय लोगों की प्रतिक्रियाएं अब भी याद आती हैं, तो मन अब भी सिहर जाता है। अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म जो मैंने थिएटर में बचपन में देखी, वह थी जंजीर। और, सूर्यवंशम तक आते आते अमिताभ बच्चन के नाम का सम्मान दिन पर दिन बढ़ता ही गया। पर, उस दिन सिनेमा हॉल में लोगों ने जो कहा, वह यहां लिखने लायक नहीं है।



बंबई जब मुंबई नहीं हुआ था, उन दिनों अक्सर हम लोग बांद्रा में मोहम्मद रफी के बंगले रफी मैंशन के पास वाले गुरुनानक पार्क में शाम के वक्त बैठा करते थे। मिथुन चक्रवर्ती पास वाली इमारत गार्डन व्यू में सबसे ऊपर टैरेस फ्लैट में रहते थे और शाम के वक्त अक्सर अपनी फॉक्स वैगन वैन से निकलते। हमारी मंडली के नियमित सदस्य नईम खान फख्र से बताते, दो ही लोग के पास ये गाड़ी है बंबई में एक अमित के पास और एक 'मिठून' के पास। मैं उन्हें करेक्ट करने की कोशिश करता कि अमित नहीं अमिताभ बच्चन। तो नईम भाई हंसते हुए बोलते, ये भैया लोग (बंबई में उत्तर प्रदेश के लोगों को लोग भैया बोलते हैं) हमेशा पूरा नाम ही बोलेगा, अमिताभ बच्चन। जैसे पंजाब के लोगों के लिए बंबई में तब फख्र करने लायक नाम धर्मेंद्र हुआ करता था, यूपी के लोग भी अमिताभ बच्चन पर अपना अधिकार समझते थे। ये फिल्म सूर्यवंशी के रिलीज होने से और 10-12 साल पहले की बात है।

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सूर्यवंशम, अमिताभ रेखा - फोटो : सोशल मीडिया

अमिताभ बच्चन की फिल्म सूर्यवंशम हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म है। बाइस्कोप में हम आपको उसी दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में बताते हैं। लेकिन सूर्यवंशम के बारे में बात करते समय लगता है कि ये फिल्म तो कभी पुरानी हुई ही नहीं और शायद कभी होगी भी नहीं। 1997 में पहली बार तमिल में बनी इस कहानी में शरत कुमार ने लीड रोल किया, तेलुगू में 1998 में यही रोल वेंकटेश के पास आया और 1999 में अमिताभ बच्चन ने वही किरदार करके इस कहानी को अमर कर दिया। हालांकि अगले ही साल ये कहानी कन्नड़ में भी इसी नाम से बनी जिसमें विष्णुवर्धन ने लीड रोल किया और फिर इसके पांच साल बाद रवि किशन ने भी इसी फिल्म को भोजपुरी में बनाने की कोशिश की फिल्म दूल्हा मिलल दिलदार में।

सूर्यवंशम को सेट मैक्स चैनल ने इतनी बार दिखाया है कि देश का बच्चा बच्चा इस फिल्म को जानता है, पहचानता है। इस फिल्म के बारे में बने मीम्स ने डिजिटल दुनिया में एक रिकॉर्ड बनाया है। ऐसे मीम्स को ट्रैक करने वालों की मानें तो किसी भी हिंदी फिल्म पर इतने मीम्स नहीं बने। फिल्म की लीड हीरोइन सौंदर्या ने बाद में बीजेपी ज्वाइन कर ली थी और चुनाव प्रचार के दौरान हुए हेलीकॉप्टर हादसे में उनकी जान चली गई थी। फिल्म में उनके किरदार की डबिंग रेखा ने की थी। वैसे तो अमिताभ बच्चन और रेखा की साथ साथ बनी आखिरी फिल्म सिलसिला मानी जाती है, लेकिन परदे पर लिखे नामों के हिसाब से देखें तो सूर्यवंशम आखिरी फिल्म है जिसमें दोनों के नाम आप क्रेडिट्स में पा सकते हैं।

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Sooryavansham

अमिताभ बच्चन के हीरो के रोल से मोह तोड़ने का काम उनके करियर में सूर्यवंशम ने ही किया। एक युवा अभिनेत्री के सामने खुद को एक युवा के किरदार में पेश करने के चक्कर में अमिताभ बच्चन को दर्शकों से इतना कुछ सुनने को मिला कि उन्होंने आगे का करियर ठाकुर भानुप्रताप सिंह वाले गेटअप में ही जीने का फैसला कर लिया और हीरा ठाकुर वाली शख्सियत उनके जीवन में हमेशा हमेशा के लिए विदा हो गई। 1999 में अमिताभ बच्चन की चार बड़ी फिल्में सूर्यवंशम, लाल बादशाह, हिंदुस्तान की कसम और कोहराम रिलीज हुईं। चारों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं।

कोहराम के निर्देशक थे मेहुल कुमार और साल 1999 उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट रहा। इसके बाद उनका करिश्मा लगातार कम ही होता गया। कोहराम से ठीक पहले उन्होंने अमिताभ बच्चन को लेकर मृत्युदाता बनाई थी और वह भी फ्लॉप रही। लाल बादशाह ने इसके निर्देशक के सी बोकाडिया के पैकअप का एलान किया। वह सक्रिय तो फिल्म इंडस्ट्री में और आठ दस साल रहे लेकिन लाल बादशाह के फ्लॉप होने के ठप्पे ने बोकाडिया को भीतर से तोड़ दिया। हिंदुस्तान की कसम फिल्म से मशहूर स्टंट निर्देशक वीरू देवगन फिल्म निर्देशक बने थे। फिल्म में अजय देवगन भी थे, लेकिन फिल्म नहीं चली। वीरू देवगन ने इसके बाद दूसरी कोई फिल्म निर्देशित भी नहीं की। सूर्यवंशम के निर्देशक ई वी वी सत्यनारायण तेलुगू सिनेमा के मशहूर निर्देशक रहे हैं, लेकिन उन्होंने भी इस फिल्म के बाद दूसरी कोई हिंदी फिल्म निर्देशित करने की हिम्मत नहीं दिखाई।

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फिल्म सूर्यवंशम की कहानी एक ठाकुर परिवार की कहानी है जिसका मुखिया भानु प्रताप सिंह अपने तीन बेटों और एक बेटी के साथ इलाके का भी मुखिया बनकर रह रहा है। भानु प्रताप के दो बेटे तो पढ़ लिखकर कुछ बन गए। लेकिन तीसरा बेटा हीरा ठाकुर शुरू से नटखट रहा है। स्कूल के दिनों में जिस लड़की से प्रेम किया, वह उसे पगलैट समझकर छोड़ गई। घर में वह सारा काम नौकरों वाला करता है। बाप उसे झिड़कने के जैसे मौके ढूंढता रहता है। राधा उसकी जिंदगी में नई रोशनी बनकर आती है। खुद आईएएस बनती है और हीरा को बड़ा कारोबारी बनने में मदद करती है। दोनों का बेटा अपने बाबा से मिलने जुलने लगता है। वह बाप बेटे के बीच की दीवार करीब करीब गिरा भी देता है कि भानु प्रताप के खाने में मौजूद जहर के चलते वह मृत्युशय्या पर पहुंच जाता है।

फिल्म में भानुप्रताम सिंह के रोल के लिए अमिताभ बच्चन को खूब तालियां मिलीं और हीरा ठाकुर के रोल के लिए उतनी ही गालियां। 57 साल के अमिताभ बच्चन को अपने से आधी उम्र की बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री रचना बनर्जी के साथ मस्ती के दृश्य लोगों को हजम नहीं हुए। यह बात खुद अमिताभ बच्चन को भी समझ आई और तभी इसके बाद ऐसी कोई फिल्म भी अपने करियर में उन्होंने नहीं की जिसमें उन्हें अपनी उम्र से आधी उम्र की किसी हीरोइन के साथ रोमांस करना हो। अमिताभ बच्चन ने साल 1999 के बाद सीधे साल 2000 में फिल्म मोहब्बते से अपना ट्रैक बदला और इसी साल वह अपनी पहचान देने वाले शो कौन बनेगा करोड़पति में भी नजर आए।

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अमिताभ बच्चन की उन दिनों तमाम फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप हो रही थीं। यहां तक कि हिंदी सिनेमा की कोई हीरोइन फिल्म सूर्यवंशम में काम करने को तैयार नहीं हुई। ठाकुर भानुप्रताप की पत्नी शारदा वाला रोल पहले शेफाली शाह को ऑफर हुआ था, लेकिन उन्होंने फिल्म ठुकरा दी। इसी तरह रचना बनर्जी वाला किरदार उस वक्त पूजा बत्रा को ऑफर हुआ था लेकिन उन्होंने ऐसा ही किरदार अनिल कपूर की फिल्म विरासत में कर रखा था सो वह ये बहाना बनाकर बच निकली कि उन्हें एक जैसा रोल रिपीट नहीं करना है। फिल्म में पहले हीरा ठाकुर के रोल के लिए अभिषेक बच्चन को भी लेने की बात चली थी लेकिन उन दिनों वह अपनी प्रस्तावित डेब्यू फिल्म आखिरी मुगल की तैयारी में लगे थे और अमिताभ बच्चन चाहते थे कि उनकी शुरुआत सोलो फिल्म से हो। बाद में वह जे पी दत्ता की फिल्म रिफ्यूजी से बड़े परदे पर उतरे हालांकि उनकी ये फिल्म फ्लॉप रही।

फिल्म में हीरा ठाकुर के साथ राधा का रोल करने वाली सौंदर्या ने फिल्म की शूटिंग के दौरान हिंदी सीखने की खूब कोशिश की, लेकिन डबिंग के वक्त अमिताभ बच्चन को उनकी हिंदी ठीक नहीं लगी। इसी के बाद फिल्म में रेखा की एंट्री बतौर डबिंग आर्टिस्ट हुई और उन्होंने राधा के किरदार के सारे संवाद डब किए। इस बारे में फिल्म रिलीज होने तक कभी कोई जानकारी बाहर नहीं आने दी गई। फिल्म में रेखा के काम का पता चला लोगों को फिल्म के रिलीज होने के बाद। फिल्म में अभिनेता शाहिद कपूर की मां नीलिमा अजीम ने भी काम किया है और उनके दूसरे पति राजेश खट्टर भी इस फिल्म में मौजूद हैं। दोनों फिल्म में पति पत्नी के किरदार में ही नजर आए।

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