ये निश्चित ही बेहद चिंताजनक स्थिति है कि भारत जैसे देश में जहां साल के लगभग हर महीने में धूप रहती है, वहां देश की 70-80% आबादी में विटामिन-डी की कमी देखी जा रही है। विटामिन-डी को सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल में खराबी और घर-ऑफिस के भीतर ज्यादा समय बिताना लोगों में इस विटामिन की कमी का कारण बन रहा है।
Vitamin-D: विटामिन-डी की कमी बन गई तलाक की वजह! कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार? जानिए पूरा मामला
क्या किसी विटामिन की कमी भी कभी तलाक का कारण बन सकता है? एक ऐसे ही हैरान करने वाले मामले में देखा गया है कि विटामिन-डी की कमी के कारण ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो गई जो आखिरकार तलाक की नौबत तक पहुंच गईं।
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क्या कहते हैं डॉक्टर?
कंसल्टेंट डॉ अमित शुक्ला 35 साल के एक व्यक्ति के मामले का जिक्र करते हुए बताते हैं, वह लंबे समय से मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द, बाल झड़ने, लो मूड और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याओं से परेशान था। ये समस्याएं इस कदर उनकी जिंदगी को प्रभावित करने लगीं कि बात तलाक तक पहुंच गई।
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- जब उन्होंने सेहत की जांच कराई तो पता चला कि उनका विटामिन-डी लेवल काफी कम (2ng/mL) हो गया था। आमतौर पर इसे 30 से 60 के बीच रखने की सलाह दी जाती है।
- विटामिन-डी सिर्फ हड्डियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए ही जरूरी नहीं है, इसका असर यौन स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
- यौन अंगों की मांसपेशियों, नसों और रक्त प्रवाह के साथ ब्रेन के उस हिस्से के लिए भी जरूरी है जो प्रजनन प्रक्रियाओं में मदद करता है।
- यौन समस्याएं हो रहीं हैं तो इसका एक कारण विटामिन-डी की कमी हो सकती है, हालांकि हर मामले में विटामिन-डी ही कारण हो।
विटामिन-डी, प्रजनन क्षमता के लिए जरूरी
शोधकर्ताओं ने पाया है कि पुरुष प्रजनन तंत्र के कई ऊतकों में विटामिन-डी रिसेप्टर्स मौजूद होते हैं, जो संकेत देते हैं कि यह विटामिन प्रजनन कार्यों में भूमिका निभा सकता है।
- पर्याप्त विटामिन-डी स्तर वाले पुरुषों में स्पर्म की गतिशीलता और गुणवत्ता बेहतर देखी जाती है।
- स्पर्म की गतिशीलता गर्भधारण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि स्वस्थ स्पर्म को अंडाणु तक पहुंचना होता है।
- विटामिन-डी और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के बीच संबंध देखा गया है। टेस्टोस्टेरोन पुरुष यौन स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता का प्रमुख हार्मोन है।
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, केवल विटामिन-डी की कमी को बांझपन का अकेला कारण नहीं माना जा सकता। उम्र, धूम्रपान, मोटापा, मधुमेह, हार्मोनल समस्याएं और जीवनशैली जैसे कई अन्य कारक भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या
अध्ययनों में लो विटामिन-डी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के बीच भी संबंध पाया गया है। माना जाता है कि विटामिन-डी रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता और एंडोथीलियल स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जरूरी है।
- इरेक्शन की प्रक्रिया मुख्य रूप से स्वस्थ रक्त प्रवाह पर निर्भर करती है।
- यदि शरीर में विटामिन-डी की कमी होती है, तो रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे इरेक्टाइल समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
- इसके अलावा विटामिन-डी की कमी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्थितियों से भी जुड़ी पाई गई है, जो स्वयं इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के प्रमुख जोखिम कारक हैं।
विटामिन-डी की कमी कैसे पूरी करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, विटामिन-डी की कमी को दूर करने के लिए सबसे अच्छा तरीका नियमित रूप से धूप लेना है।
- डॉक्टर सुबह 15-30 मिनट तक धूप लेने की सलाह देते हैं।
- इसके वसायुक्त मछलियां, अंडे की जर्दी, फोर्टिफाइड दूध, फोर्टिफाइड अनाज और मशरूम भी विटामिन-डी के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
- यदि जांच में विटामिन-डी की ज्यादा कमी पाई जाती है, तो डॉक्टर विटामिन-डी सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।