तीन तलाक मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का लखनऊ के उलमा ने स्वागत किया है। सभी ने मजहबी मामलों में सियासी दखल न देने की बात को सही ठहराया है। साथ ही महिलाओं व संगठनों ने एक साथ तीन तलाक पर सख्त कानून बनाने की भी पैरवी की है। पेश है कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों से बातचीत-
तीन तलाक पर मोदी के साथ आए मुस्लिम, कहा- पीएम का बयान सही
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मुसलमान अब गंभीर हुए हैं
ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि पीएम मोदी के बयान का मुसलमानों ने स्वागत किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शुरू से कह रहा है कि यह सियासी नहीं मजहबी मामला है। इसे लेकर कोड ऑफ कंडक्ट जारी किया जा चुका है। इसका असर हुआ है। तीन तलाक मामलों पर अब मुसलमान गंभीर हुए हैं।
सख्त कानून से रुकेगा शोषण
ऑल इंडिया महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का कहना है कि तीन तलाक की बुराई को मुसलमान समझ चुके हैं। इसलिए यह बयान सही है लेकिन फिर भी सरकार को चाहिए कि वह सख्त से सख्त कानून बनाए ताकि तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं का शोषण न हो। पर्सनल लॉ बोर्ड के कोड ऑफ कंडक्ट से मुसलमान सुधरने वाले नहीं हैं।
तलाक मामले में सरकारी हस्तक्षेप जरूरी
बेगमात रायल फैमिली की अध्यक्ष फरहाना मालिकी कहती हैं कि एक साथ तीन तलाक मुसलमानों की बहू-बेटियों के लिए अभिशाप से कम नहीं है। इसलिए सरकार को सख्त कानून बनाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी के बयान का हम सब स्वागत करते हैं। फिर भी महिलाएं चाहती हैं कि इस मामले में भारत सरकार हस्तक्षेप करे।
सख्त कानून बने तो कुछ गलत नहीं
चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी का कहना है कि तीन तलाक का मामला आपसी व शरई है, यह बात सच है। लेकिन गलत ढंग से इसे अमल में लाने से बुराई पैदा हुई है। यह मजहबी मामला है, इस पर प्रधानमंत्री मोदी का बयान सही है लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर अगर सख्त कानून बने तो इसमें कुछ गलत नहीं है।