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Rajasthan News: 100 करोड़ की जमीन पर चला प्रशासन का बुलडोजर, जैसलमेर में 300 बीघा सरकारी भूमि कब्जामुक्त

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: बालोतरा ब्यूरो Updated Sat, 06 Jun 2026 07:33 AM IST
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सार

जैसलमेर के तेजी से विकसित हो रहे बाईपास क्षेत्र में नगर विकास न्यास (यूआईटी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 300 बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। अधिकारियों के अनुसार मुक्त कराई गई जमीन की अनुमानित बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है।

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अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जैसलमेर शहर के तेजी से विकसित हो रहे बाईपास क्षेत्र में नगर विकास न्यास (यूआईटी) ने अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। संयुक्त प्रशासनिक अभियान के तहत करीब 300 बीघा बहुमूल्य सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। अधिकारियों के अनुसार मुक्त कराई गई जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य 100 करोड़ रुपये से अधिक है। इस कार्रवाई को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों और भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।

बाईपास क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर

जैसलमेर शहर के विस्तार और तेजी से बढ़ते शहरी विकास के बीच बाईपास क्षेत्र की जमीनों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया था। नगर विकास न्यास को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि बाईपास सड़क के दोनों ओर स्थित न्यास की भूमि पर धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है।

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इसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले का सर्वे कराया और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद कार्रवाई की योजना तैयार की।

बाईपास बनने के बाद कई गुना बढ़ गया जमीन का महत्व

जानकारी के अनुसार राजस्व ग्राम जैसलमेर की खसरा संख्या 678 और 679 में दर्ज भूमि नवीन निर्मित जैसलमेर बाईपास सड़क के आसपास स्थित है, जो बाड़मेर रोड को एयरपोर्ट सर्किल से जोड़ती है।

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बाईपास बनने के बाद इस क्षेत्र का महत्व काफी बढ़ गया और जमीन की कीमतों में भी कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। भूमि के बढ़ते व्यावसायिक महत्व को देखते हुए कुछ लोगों ने यहां कच्चे-पक्के निर्माण, अस्थायी ढांचे, चारदीवारी और अन्य संरचनाएं बनाकर कब्जा जमाने का प्रयास किया।

प्रशासन का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो आने वाले वर्षों में अतिक्रमण और बढ़ सकता था तथा सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान उठाना पड़ता।

नोटिस और समझाइश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

यूआईटी प्रशासन ने बताया कि अतिक्रमण हटाने से पहले संबंधित लोगों को कई बार नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें स्वेच्छा से भूमि खाली करने और अवैध निर्माण हटाने का अवसर भी दिया गया।

अधिकारियों ने समझाइश के जरिए विवाद का समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन तय समय सीमा के बावजूद अधिकांश कब्जाधारियों ने भूमि खाली नहीं की। इसके बाद नगर विकास न्यास ने पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग और तकनीकी शाखा के अधिकारियों के साथ संयुक्त अभियान चलाने का निर्णय लिया।

शुक्रवार सुबह भारी प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू हुई। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

रिहायशी परिवारों को दिया गया अतिरिक्त समय

कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने संवेदनशीलता भी दिखाई। जिन पक्के मकानों में परिवार रह रहे थे, उन्हें तत्काल हटाने की बजाय दो दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है।

अधिकारियों ने ऐसे परिवारों को अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद यदि भूमि स्वेच्छा से खाली नहीं की गई तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इससे स्पष्ट है कि प्रशासन कानून का पालन करवाने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों का भी ध्यान रख रहा है।

सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश

करीब 300 बीघा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराए जाने के बाद नगर विकास न्यास ने इसे सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की दिशा में बड़ी सफलता बताया है।

अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से भविष्य में सरकारी भूमि पर कब्जा करने की कोशिश करने वालों को स्पष्ट संदेश जाएगा कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

यूआईटी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में न्यास की अन्य भूमि की भी निगरानी की जा रही है। जहां कहीं भी अवैध कब्जे या अनधिकृत निर्माण पाए जाएंगे, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों की मौजूदगी में चला संयुक्त अभियान

यह व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान नगर विकास न्यास के सचिव सुखाराम पिण्डेल के नेतृत्व में संचालित किया गया।

अभियान में भूमि अवाप्ति अधिकारी सत्यपाल खत्री, तहसीलदार गेगाराम मीणा, अधिशाषी अभियंता कमलेश मंगल, सहायक अभियंता अशोक चौहान, प्रेमाराम और नवीन सहित राजस्व एवं तकनीकी शाखा के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

संबंधित पटवारियों ने मौके पर भूमि सीमांकन और अभिलेखीय सहयोग प्रदान किया, जबकि पुलिस विभाग ने पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाली।

भूमि खरीदने वालों को प्रशासन की चेतावनी

नगर विकास न्यास ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भूखंड या भूमि की खरीद-फरोख्त से पहले उसके स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड की पूरी जांच अवश्य करें।

प्रशासन का कहना है कि कई बार लोग बिना सत्यापन के भूमि खरीद लेते हैं और बाद में वह भूमि सरकारी या विवादित निकलने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या निर्माण अंततः हटाया जाएगा। इसलिए नागरिक केवल वैध और अभिलेखीय रूप से प्रमाणित भूमि में ही निवेश करें।

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