Rajasthan Politics: आदिवासी पार्टी को बड़ा झटका, गढ़ी से विधानसभा प्रत्याशी ने पार्टी छोड़ी; कांग्रेस से जुड़े
बांसवाड़ा में पंचायतीराज चुनाव से पहले भारत आदिवासी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। गढ़ी विधानसभा से पूर्व प्रत्याशी प्रो. मणिलाल गरासिया ने समर्थकों सहित कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की, जिससे वागड़ क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत मिले हैं।
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बांसवाड़ा में पंचायतीराज चुनाव से पहले भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) को बांसवाड़ा में बड़ा झटका लगा है। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा और आदिवासी परिवार के संयोजक संरक्षक तथा भारत आदिवासी पार्टी के संयोजक एवं गढ़ी विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी रहे प्रो. मणिलाल गरासिया ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में औपचारिक रूप से कांग्रेस जॉइन की।
पिछले विधानसभा चुनाव में गढ़ी सीट से प्रत्याशी रहे प्रो. गरासिया ने प्रदेश प्रभारी Sukhjinder Singh Randhawa, प्रदेशाध्यक्ष Govind Singh Dotasra और बांसवाड़ा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुनसिंह बामनिया की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot से भी मुलाकात कर कांग्रेस को मजबूत करने का संकल्प लिया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रो. गरासिया और उनके समर्थकों के शामिल होने से बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में पार्टी को मजबूती मिलेगी। साथ ही यह भी संकेत मिले हैं कि आने वाले समय में भारत आदिवासी पार्टी के अन्य पदाधिकारी भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
ये पदाधिकारी हुए शामिल
प्रो. गरासिया के साथ भारत आदिवासी पार्टी के गढ़ी ब्लॉक अध्यक्ष नारायण बामणिया, तलवाड़ा इकाई अध्यक्ष शंकर मईड़ा, तलवाड़ा ब्लॉक अध्यक्ष सनी भाई डेंडोर, हेनरी पटेल, नितेश कतिजा, मनीष मईड़ा, पवन बुझ, दिनेश डाबी, गोविंद यादव सहित कई कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इसके अलावा भारतीय ट्राइबल पार्टी के जिलाध्यक्ष दिलीप पणदा ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया।
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लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रो. गरासिया ने कहा कि उन्होंने भारत आदिवासी पार्टी को नफरत और जातिवाद की राजनीति से त्रस्त होकर छोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की दिशाहीनता और कुछ नेताओं के स्वार्थ के कारण वागड़ क्षेत्र का विकास बाधित हुआ है। अब वे राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस के साथ जुड़कर भील युवाओं को मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ने और जातिवादी राजनीति को समाप्त करने की दिशा में कार्य करेंगे।