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मासूमों के निवाले पर डाका डालने वालों पर एक्शन: पोषाहार घोटाले में ACB का प्रहार, 18 अफसर-कर्मचारी गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: नागौर ब्यूरो Updated Tue, 26 May 2026 08:14 PM IST
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सार

नागौर जिले में वर्ष 2018 के आंगनबाड़ी पोषाहार घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए आने वाले पोषाहार में गड़बड़ी, घटिया सामग्री सप्लाई और फर्जी रिकॉर्ड बनाकर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है।

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विस्तार

राजस्थान के नागौर जिले में वर्ष 2018 में सामने आए आंगनबाड़ी पोषाहार घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसीबी की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कल्पना सोलंकी के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए गए।



कई अधिकारी और कर्मचारी गिरफ्त में

गिरफ्तार आरोपियों में परबतसर, डेगाना, कुचामन सिटी, मकराना और जायल क्षेत्र के सीडीपीओ, कनिष्ठ लिपिक, महिला पर्यवेक्षक और एएओ शामिल हैं। वहीं इस मामले में मुख्य आरोपी माने जा रहे ठेकेदार नरेन्द्र दायमा की गिरफ्तारी अभी बाकी है। एसीबी की टीमें उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।

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पोषाहार की आड़ में करोड़ों का खेल

जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 में महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी योजनाओं के तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को चना, दाल, तेल और पोषक चूर्ण जैसी सामग्री वितरित की जानी थी। आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर कम मात्रा में पोषाहार सप्लाई किया और घटिया गुणवत्ता की सामग्री वितरित की। इसके साथ ही फर्जी वितरण रजिस्टर तैयार कर सरकारी धन का गबन किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार पोषाहार सामग्री को ब्लैक में बेचकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया, जिससे हजारों बच्चों और महिलाओं का पोषण प्रभावित हुआ।

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गोपनीय सूचना से खुला मामला

एसीबी को जुलाई 2018 में गोपनीय सूचना मिली थी कि पोषाहार वितरण में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इसके बाद 31 जुलाई 2018 को जिले के 11 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। चार दिनों तक चली कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकदी, फर्जी दस्तावेज और कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए गए। जांच में अब तक 50 लाख 75 हजार रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं।

29 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश

एसीबी अधिकारियों के अनुसार यह पूरा घोटाला योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। विभागीय अधिकारी, पर्यवेक्षक और ठेकेदार आपसी सांठगांठ से सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे थे। एसीबी की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कल्पना सोलंकी ने बताया कि इस मामले में पहले भी चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक की जांच में 29 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट पेश की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि घोटाले की राशि 8 करोड़ 75 लाख रुपये से अधिक है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

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बच्चों और माताओं के हक की लड़ाई

एसीबी ने साफ कहा है कि यह कार्रवाई उन हजारों बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए न्याय का संदेश है, जिनके हिस्से का पोषाहार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। एजेंसी ने कहा कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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