शिमला ग्रीष्मोत्सव: मालरोड पर महानाटी में एक साथ झूमीं 320 महिलाएं, नशा मुक्ति का दिया संदेश, देखें वीडियो
शिमला के एतिहासिक रिज मैदान पर अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के दूसरे दिन महानाटी का आयोजन किया गया।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के एतिहासिक रिज मैदान पर अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के दूसरे दिन महानाटी का आयोजन किया गया। इस दाैरान 320 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने मां थीम पर आधारित महानाटी प्रस्तुत की। इस दौरान महिलाओं ने महानाटी में नशा मुक्ति का संदेश देने वाले पोस्टर और छातों पर प्रिंट नारी शक्ति, सुरक्षा और नारी स्वावलंबन का संदेश दिया। महिलाओं ने पारंपरिक ढाठू और रेजटा पहनकर नाटी डाली।
महानाटी में भाग लेने के लिए शिमला के विभिन्न आईसीडीएस केंद्रों से आंगनबाड़ी कर्मचारी पहुंची थीं। इस दौरान मालरोड पर सैलानियों और स्थानीय लोगों का सैलाब उमड़ उठा। कई सैलानियों ने भी नाटी डाली। जिला शिमला उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बतौर मुख्य अतिथि और कार्यक्रम की आयोजक और महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
शिमला ग्रीष्मोत्सव में पहली बार हुई मलखंब खेल की शानदार प्रस्तुति
शिमला अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव में पहली बार करुणा भारती संस्था के कलाकारों ने मलखंब की दमदार प्रस्तुति दी। शिमला ग्रीष्मोत्सव में यह पहली बार आयोजित की गई। इस खेल में खिलाड़ियों के करतब ने जमकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। टीम के संयोजक संजय सूद ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में इससे पहले मंडी में मलखंब का प्रदर्शन किया है। शिमला ग्रीष्मोत्सव में यह पहला मौका है। उन्होंने कहा कि बीते कल उन्होंने मालरोड पर जब प्रस्तुति दी तो लोगों का बहुत अच्छा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि मलखंब भारतीय संस्कृति से जुड़ा पौराणिक खेल है। भारत में मलखंब रामायण और महाभारत काल से खेला जा रहा है। एक समय था जब ये बिल्कुल विलुप्त होने के कगार पर था लेकिन अब देश में इस खेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेश में मलखंब को बढ़ावा देने के लिए उचित जगह मुहैया करवाएं। यदि उचित सहयोग मिले तो मलखंब में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकते है जो ओलंपिक में मेडल जीतकर हिमाचल का नाम रोशन करेंगे।