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अब ऐप से बनेंगे आपसी रिश्ते बेहतर!

टिम मुगहन/ बीबीसी Updated Tue, 05 Jul 2016 07:54 PM IST
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Now the app will improve relationships !
मोबाइल ऐप - फोटो : BBC
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आप अपने खतों के जवाब खुद ही लिखते हैं न? और घर-दफ्तर के ई-मेल्स। पक्का आप ही लिखते होंगे। दोस्तों से चैट करते वक्त भी खुद ही बातें कहते होंगे आप! है न? कई बार अपने लिखे खत में ही बाद में कमी महसूस हुई होगी। या फिर जो ई-मेल आपने भेजा, उसके बारे में आपने सोचा होगा कि कुछ कसर रह गई।

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काश! कोई बता पाता कि इसे और बेहतर कैसे बनाया जा सकता था। करीबी दोस्तों से बातचीत में भी कई बार तनातनी हो जाती है। जिसके बाद लोग सोचते हैं कि काश! अपनी बात को वो और बेहतर ढंग से रख पाते तो ये बेवजह का तनाव न होता, रिश्तों में।
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अगर हम आपको कहें कि इस काम में आपकी मदद के लिए ऐप बनाए जा रहे हैं, तो शायद आप यकीन न करें। मगर है ये पूरी तरह सच्ची बात। चिट्ठी लिखने में, ई-मेल लिखने में, सोशल साइट्स पर बात करने में खुद को कमतर पाने वाले लोगों को ये जानकर खुशी होगी, कि ऐसे ऐप बनाने की कोशिशें हो रही हैं जो आपकी तरफ से जवाबी ई-मेल लिखेगा।
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आपके लिखे ई-मेल को बेहतर बनाने की सलाह देगा। अपनी गर्लफ्रैंड या ब्वॉयफ्रैंड से चैट करने में भी आपकी मदद करेगा।

अमरीका के बोस्टन शहर की रहने वाली जोआन मैक्नील को ही ले लीजिए

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मोबाइल ऐप - फोटो : BBC

अमरीका के बोस्टन शहर की रहने वाली जोआन मैक्नील को ही ले लीजिए। मैक्नील को हमेशा लगता था कि वो अपने दिल के भाव ई-मेल में सही से नहीं बयां कर पाती थीं। कई बार वो कुछ ज्यादा ही जोश दिखा जाती थीं। और अक्सर लगता था कि कसर रह गई।

कभी लगता था कि उन्होंने सामने वाले पर तंज कस दिया। और कई बार मैक्नील को ये भी लगा कि, कहीं सामने वाला ये न समझे कि उन्हें बातचीत में दिलचस्पी नहीं। आज की जिंदगी में हम रूबरू कम ही बातें करते हैं। ज्यादातर बातें, ई-मेल, चैटिंग, फेसबुक, टेक्स्ट मैसेज या वीडियो चैटिंग के जरिए होती हैं।

तो हम इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बतियाने में ये समझ ही नहीं पाते की हमने अपनी बात सही ढंग से रखी है या नहीं। कहीं सामने वाले को बुरा तो नहीं लगा? कहीं उसे यूं तो नहीं महसूस हुआ कि दिलचस्पी नहीं? हम-आप दिल ही दिल में ऐसे सवालों से जूझते रहते हैं। 

अगर, इन सवालों से निजात दिलाने के लिए कोई ऐप बन जाए तो? आपकी कई मुसीबतों का हल चुटकी बजाते निकल सकता है न! ऐसा ऐप जो आपकी तरफ से दफ्तर का या निजी ई-मेल लिख दे।

तो क्या आप ऐसे किसी ऐप की मदद से मेल लिखना पसंद करेंगे? क्या आप किसी ऐप को ये हक देंगे कि वो आपको ये बताए कि किस दोस्त से ताल्लुक बेहतर करने की जरूरत है और किससे दूरी बनाने की? या फिर जब आप डेट पर जाएं तो ये ऐप बताए कि आप क्या बातें करें?

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मोबाइल ऐप - फोटो : BBC

इन्हीं सवालों के जवाब तलाशते हुए जोआन मैक्नील ने जी-मेल के साथ एक प्लगइन फीचर डेवलप कर डाला। इसका नाम है 'इमोशनल लेबर'। ये आपकी मेल चेक करता है। इसके बाद ये आपकी मेल को अपने तरीके से हेर-फेर करके, बेहतर बनाने की कोशिश करता है।

जैसे पूर्ण विराम की जगह, ढेर सारे एक्सक्लेमेशन मार्क लगा देगा। बातचीत को ज्यादा अनौपचारिक बनाने के लिए इमोजी का इस्तेमाल करेगा, वगैरह। मैक्नील कहती हैं कि ये कुछ ज़्यादा ही हो गया। वो बातचीत में इतनी भी मिठास घोलने के हक में नहीं हैं। वो दिल और सितारों के इमोजी इस्तेमाल करने के हक में तो हैं।

मगर इतना भी नहीं कि बात बनावटी लगने लगे। मैक्नील एक ऐसा मुस्तकबिल देख रही थीं, जिसमें कोई ऐप आपकी मेल लिखने की जिम्मेदारी पूरी तरह अपने सिर पर ले लेगा। लेकिन 'इमोशनल लेबर' तो कुछ ज्यदा ही इमोशनल हो गया।

मैक्नील ने जब 'इमोशनल लेबर' ऑनलाइन बाजार में पेश किया, तो लोगों ने इसमें जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई। वो कहती हैं कि उन्हें खुद के बारे में ही लगता था कि दोस्तों को और दफ्तर के साथियों को मेल लिखने का काम उन्हें नहीं आता।

ऐसे ऐप की जरूरत है, जो उन्हें ई-खत लिखना सिखाए

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मोबाइल ऐप - फोटो : BBC

लेकिन जिस तरह लोगों ने 'इमोशनल लेबर' को हाथो-हाथ लिया, उससे पता चला कि दुनिया में बहुत से लोगों को ऐसे ऐप की जरूरत है, जो उन्हें ई-खत लिखना सिखाए। जैसे कि किसी बीमार साथी को ई-मेल लिखा जाए तो उसमें हमदर्दी का भाव साफ झलके।

मैक्नील कहती हैं कि हमदर्दी जताने के लिए गिने चुने लफ्ज ही हैं। ऐसे में 'इमोशनल लेबर' में लोगों की जबरदस्त दिलचस्पी थी। हालांकि वो मानती हैं कि अब लोग ऐसे ऐप के लिए तैयार हैं जो उनकी निजी बातचीत में दखल दे, उनकी मदद करे। ताकि वो सामने वाले से बेहतर ढंग से पेश आएं।

अपनी बात सही तरीके से कह सकें। वैसे भी कई बार लोग, मुश्किल ई-मेल लिखने के लिए दोस्तों की सलाह लेते ही हैं। कई बार बॉस के तगड़े मेल का जवाब लिखने में साथी काम आते हैं। और कई बार गर्लफ्रैंड के ई-मेल का जवाब देने के लिए भी दोस्तों की मदद ली जाती है।

तो, इसके लिए एक ऐप ही क्यों न हो? कई बार मेल लिखते समय जेहन में सवाल उठते हैं कि ऐसा कोई शब्द या वाक्य लिखें, जिससे मेरी दिलचस्पी तो जाहिर हो, मगर ये न लगे कि कुछ ज्यादा ही बेकरारी है। कई बार कुछ बातों के सटीक जवाब नहीं सूझते तो, ऐप मददगार हो जाए तो क्या कहने!

स्मार्टफोन के लिए 'क्राउडपायलट' नाम से एक ऐप बनाया है

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मोबाइल ऐप - फोटो : BBC

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर लॉरेन मैकार्थी भी जोआन मैक्नील की ही तरह ऐसे ऐप को डेवलप कर रही हैं। उन्होंने स्मार्टफोन के लिए 'क्राउडपायलट' नाम से एक ऐप बनाया है, जो सिर्फ तजुर्बा करने के इरादे से बाजार में उतारा गया था।

'क्राउडपायलट' ऐप आपको किसी डेट पर जाने में मदद कर सकता है। डेट के दौरान क्या बात कहनी है और क्या नहीं कहनी, ये भी इस ऐप की मदद से जाना जा सकता है। असल में जब आप डेट पर गए होते हैं तो इस ऐप के जरिए कुछ लोग आपकी और आपके साथी की बातें सुन रहे होते हैं।

फिर वो इसी ऐप के जरिए आपको बताते हैं कि आपका बर्ताव कैसा है और आपको आगे क्या कहना और करना चाहिए। इस ऐप से आपके दोस्त भी जुड़े होते हैं और साथ ही कुछ ऐसे लोग भी जो आप से पूरी तरह अनजान होते हैं।

इस ऐप के बारे में बताने के लिए मैकार्थी ने एक वीडियो भी बनाया है। इस ऐप को ऐप स्टोर से डाउनलोड भी किया जा सकता है। इसमें लोगों ने जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है। मैकार्थी कहती हैं कि उनका ऐप आपकी कई मुश्किलें दूर कर देता है।

मैकार्थी कहती हैं कि तकनीक ने इंसान की जिंदगी को कई मायनों में बेहतर बनाया है। तो संवाद के मोर्चे पर ही उसका इस्तेमाल क्यों न किया जाए।

''यूएस प्लस'' नाम का ऐप भी बनाया है

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मोबाइल ऐप - फोटो : BBC

 मैकार्थी ने अपनी दोस्त काइल मैक्डोनाल्ड के साथ मिलकर ''यूएस प्लस'' नाम का ऐप भी बनाया है। ये वीडियो चैटिंग के दौरान आपकी मदद करता है। वो सामने वाले का चेहरा पढ़कर बताता है कि जिससे आप बात कर रहे हैं वो खुश है या दुखी।

ये ऐप आपकी बातचीत सुनकर आपको बताता है कि आप सही तरीके से बात कर रहे हैं या उसमें सुधार की जरूरत है। कहीं आप कुछ ज्यादा जोश में तो नहीं हैं। या फिर, कहीं आपकी बातों से बोरियत तो नहीं झलक रही है। अगर सामने वाला मुसीबत में है तो आप उससे सही तरीके से हमदर्दी जता पा रहे हैं या नहीं।

मैकार्थी और मैक्डोनाल्ड ने एक वीडियो के जरिए इस ऐप के इस्तेमाल का तरीका बताया है। वो बताती हैं कि उनके ऐप को लेकर लोगों ने जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है। उन दोनों का इरादा तो ऐप को लेकर लोगों से सवाल करना था। मगर, लोगों ने तो उसे हाथो-हाथ लिया है।

मैकार्थी और मैक्डोनाल्ड ने मिलकर महज तजुर्बा करने के लिए एक और ऐप तैयार किया है। इसका नाम ''पीपलकेपीआर'' है। ये आपके स्मार्टफोन के जीपीएस डेटा और आपकी कलाई में बंधे वियरेबल, जैसे एपल वाच की मदद से आपके ताल्लुकात बेहतर करने में मदद करता है।

ये ऐप बताता है कि किस दोस्त से आपको अपने संबंध और बेहतर बनाने चाहिए

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मोबाइल ऐप - फोटो : BBC

 ये आपके दोस्तों के बारे में सलाह देता है। ये ऐप बताता है कि किस दोस्त से आपको अपने संबंध और बेहतर बनाने चाहिए और किससे दूर ही रहें तो अच्छा। ऐसे लोगों के नंबर और ई-मेल आईडी भी ये ऐप आपके फोन से हटा देगा, जो आपको बोर करते हैं या गुस्सा दिलाते हैं।

जब मैकार्थी और मैक्डोनाल्ड ने ये ऐप ऑनलाइन उतारा तो जबरदस्त बहस छिड़ गई। कई लोगों ने इसे तकनीक का इंसान की जिंदगी में कुछ ज्यादा ही दखल बताया। तो कई लोगों को ये ऐप बहुत पसंद आया। कई कंपनियों ने इस ऐप को और बेहतर बनाने और बाजार में उतारने के लिए पैसा लगाने की बात भी कही।

तो कई डॉक्टरों ने इसे अपने मरीजों पर इस्तेमाल करने की इजाजत भी मांगी। ऐसे इरादे से काम कर रही स्टार्ट अप कंपनियों ने मैकार्थी और मैक्डोनाल्ड को अपने साथ जुड़ने का ऑफर भी दिया। बहरहाल, मैकार्थी और मैक्डोनाल्ड इस बात पर खुश हैं कि उनके ऐप से ये बहस आगे बढ़ी है कि तकनीक की मदद से हम बातचीत को बेहतर बना सकते हैं कि नहीं।

हालांकि हम तकनीक पर ज्यादा निर्भर होते हैं तो बहुत से काम बढ़ भी जाते हैं। जैसे नए-नए ऐप्स की तलाश। लगातार फोन का इस्तेमाल भी बढ़ जाता है। कुछ लोग कहते हैं कि दिमागी मेहनत से तो आप बच जाते हैं, मगर ये डिजिटल काम तो बढ़ जाता है न।

हालांकि उम्रदराज लोग, तकनीक के इस्तेमाल को लेकर कुछ शंका में दिखे। उन्हें हिचक इस बात की थी कि कहीं तकनीक उन पर हावी न हो जाए।

वहीं युवा पीढ़ी को नई तकनीक, नए ऐप्स आजमाने में कोई हिचक नहीं आई

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मोबाइल ऐप - फोटो : BBC

वहीं युवा पीढ़ी को नई तकनीक, नए ऐप्स आजमाने में कोई हिचक नहीं आई। वो ऐसे ऐप्स इस्तेमाल करने को तैयार हैं जो ई-मेल लिखने में, डेट पर बतियाने में, दोस्तों से रिश्ते सुधारने में मदद कर सकें। इस तरह के कुछ ऐप बाजार में आ चुके हैं।

जैसे 'क्रिस्टलनो़ज'। ये ऐप आपके लिंक्डइन अकाउंट को बेहतर बनाने के नुस्खे बताता है। और कारोबारी साथियों से रिश्ते बेहतर करने के तरीके भी बताता है। लेकिन मैक्नील कहती हैं कि उन्होंने किसी को भी नियमित रूप से 'क्रिस्टलनो़ज' ऐप इस्तेमाल करते नहीं देखा।

हालांकि मैक्नील, इस तरह के ऐप के खिलाफ नहीं हैं। वो इनकी तुलना ज्योतिष से करती हैं। ज्यादातर लोगों को पता होता है कि ज्योतिषीय भविष्यवाणी में कुछ भी सही नहीं है। फिर भी लोग अपनी कुंडली बांचते हैं, अपना भाग्यफल पढ़ते हैं।

क्योंकि उन्हें इससे राहत मिलती है। इसी तरह, आपसी संबंध बेहतर बनाने में मदद का दावा करने वाले ये ऐप भी आपकी कितनी मदद करेंगे, इसका आपको बखूबी एहसास होता है।

मगर, इनमें आपको एक उम्मीद दिखती है। कई बार आप जान-बूझकर इन पर भरोसा करना चाहते हैं। ये सोचकर कि मुश्किल कामों के लिए आपके पास कोई मददगार तो है। भले ही ई-मेल में शब्द आप ही लिखें, मगर ऐसा ऐप होने पर आपका हौसला बढ़ता है।

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