आगरा: दहेज उत्पीड़न के इन 74 मामलों में जांच करेंगी महिला थाने की दरोगा, एसएसपी ने दिया एक महीने का समय
शहर के सभी थानों में दर्ज हुए दहेज उत्पीड़न के 74 मामलों की विवेचना अब महिला थाने की दरोगा करेंगी। इन केसों को सुलझाने के लिए 10 दरोगाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसएसपी आगरा ने एक महीने का समय दिया है।
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महिलाओं के दहेज के लिए उत्पीड़न संबंधी 72 मुकदमों की विवेचना अब महिला थाना की दस दरोगा करेगीं। एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने शहर के थानों में विवेचनाओं का बोझ कम करने के लिए नई व्यवस्था की है। इन केस की प्रगति रिपोर्ट 15 दिन से एक महीने में देनी होगी। इसमें लापरवाही पर विवेचक पर कार्रवाई की जाएगी। अगर, किसी केस के निस्तारण में समस्या है तो उसे दूरा कराया जाएगा।
महिला थाने में 11 महिला दरोगा हैं। इसके बावजूद इन पर विवेचनाओं की संख्या 18 ही थी, जबकि शहर के अन्य थानों की बात करें तो महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित मामले अधिक थे। इस साल ही 72 से अधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
एसएसपी ने बताया कि अन्य थानों के दरोगाओं पर विवेचनाओं का बोझ अधिक रहता है। ऐसे में विवेचनाएं लंबित रहती हैं, जबकि महिला थाना की दरोगाओं पर विवेचनाएं कम है। इसको देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। हर दरोगा के हिस्से में बराबर केस बांटे गए हैं। उन्हें 15 दिन से लेकर एक महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
40 फीसदी आरोपी दूसरे राज्य के भी हैं
महिला थानाध्यक्ष इतुल चौधरी ने बताया कि थाने में छह महिला दरोगा रहती है। इसके अलावा बाह, किरावली और लोहामंडी थाना में महिला रिपोर्टिंग चौकी बनाई गई हैं। इन पर भी थाने की दरोगा रहती हैं। रिपोर्टिंग चौकी पर महिलाओं की काउंसिलिंग की जाती है। जो महिलाएं केस दर्ज कराना चाहती हैं, उन्हें महिला थाना भेजा जाता है। थाने में भी काउंसिलिंग होती है। जिन केस की विवेचना मिली हैं, उनमें 40 फीसदी में स्थानीय ससुरालियों के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा के भी हैं। ऐसे में विवेचक को दूसरे जिले में भी जाना पड़ रहा है।
गाड़ी और रुपये मांगने की सबसे ज्यादा शिकायतें
महिलाओं के मामले में अधिकतर शिकायतें दहेज उत्पीड़न की रहती है। इनमें पति के खर्च नहीं देने, मारपीटकर घर से निकालने, ससुरालियों के ताने देने, गाड़ी और रुपये मांगने की शिकायत रहती हैं। इसमें पति के अलावा सास, ससुर, देवर, ननद, नंदोई सहित अन्य को आरोपी बनाया जाता है। साक्ष्य जुटाने के बाद चार्जशीट लगाई जाती है।