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साथर विद्युत उपकेंद्र निर्माण में लाखों का घोटाला
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साथर विद्युत उपकेंद्र निर्माण में लाखों का घोटाला
क्रासर
ओवरहेडेड लाइन का निर्माण हुआ 6.50 किमी का, भुगतान 9.50 किमी का कराया
एसई और एक्सईएन की जांच में खुलासा के बाद मचा हड़कंप
अनूप ओझा
प्रयागराज। 33केवी क्षमता वाले साथर बिजली घर व इसकी ओवरहेडेड लाइन निर्माण में लाखों रुपये का घोटाला सामने आया है। इस परियोजना की जांच में 60 लाख रुपये की हेराफेरी पकड़ गई है। इसमें विद्युत माध्यमिक कार्यखंड के एई, जेई समेत कई अफसरों पर गाज गिरने के संकेत मिले हैं। इससे पहले मऊआइमा- सोरांव उपकेंद्र को जोड़ने वाली ओवरहेडेड लाइन निर्माण में भी घोटाला उजागर हुआ था।
करीब दो करोड़ रुपये की लागत वाली 33केवी साथर बिजली घर प्रोजेक्ट का निर्माण वर्ष 2016-17 में कराया गया था। माध्यमिक विद्युत खंड में निर्मित इस उपकेंद्र को 33 केवी आरा उप केंद्र से जोड़ने का कार्य पूरा होने के बाद जब गड़बड़ी की शिकायतें मिलने लगीं, तब इसकी जांच शुरू हुई। अधीक्षण अभियंता एसके पाठक और एक्सईएन वीके शर्मा ने जब साथर उपकेंद्र व इससे जुड़ी लाइन के निर्माण की जांच की तो बड़े पैमाने पर घपला सामना आया। जांच के बाद पता चला कि इसके लिए आरा से साथर के बीच 9.50 किमी ओवरहेडेड लाइन का निर्माण कराया गया है, लेकिन मौके पर सिर्फ 6.50 किमी ही लाइन निर्माण पाया गया। इसमें तीन किमी ओवरहेडेड लाइन बिना बनाए ही फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान करा लिया गया है। जांच के दौरान व्यापक स्तर पर अनियमितताएं पकड़ी गई हैं। पता चला है कि ज्यादातर विद्युत खंबों की ग्राउटिंग नहीं गई है। जहां कराई गई, वहां मानकों की खुलकर अनदेखी की गई है। किसी भी खंभे में स्टोन पैड का इस्तेमाल नहीं किया गया है। स्टे रॉड का डबल भुगतान किया गया है। बिजली घरों पर डबल पोल, पीसीसी पोल बनाकर लोहे के खंभों के रूप में मापन किया गया है। साधारण केबिल लगाई गई है, लेकिन मापन आर्मर्ड केबिल के रूप में किया गया है। इस मामले में तत्कालीन सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता का नाम आने के बाद विभाग में अंदरखाने हड़कंप मच गया है।
क्रासर
ओवरहेडेड लाइन का निर्माण हुआ 6.50 किमी का, भुगतान 9.50 किमी का कराया
एसई और एक्सईएन की जांच में खुलासा के बाद मचा हड़कंप
अनूप ओझा
प्रयागराज। 33केवी क्षमता वाले साथर बिजली घर व इसकी ओवरहेडेड लाइन निर्माण में लाखों रुपये का घोटाला सामने आया है। इस परियोजना की जांच में 60 लाख रुपये की हेराफेरी पकड़ गई है। इसमें विद्युत माध्यमिक कार्यखंड के एई, जेई समेत कई अफसरों पर गाज गिरने के संकेत मिले हैं। इससे पहले मऊआइमा- सोरांव उपकेंद्र को जोड़ने वाली ओवरहेडेड लाइन निर्माण में भी घोटाला उजागर हुआ था।
करीब दो करोड़ रुपये की लागत वाली 33केवी साथर बिजली घर प्रोजेक्ट का निर्माण वर्ष 2016-17 में कराया गया था। माध्यमिक विद्युत खंड में निर्मित इस उपकेंद्र को 33 केवी आरा उप केंद्र से जोड़ने का कार्य पूरा होने के बाद जब गड़बड़ी की शिकायतें मिलने लगीं, तब इसकी जांच शुरू हुई। अधीक्षण अभियंता एसके पाठक और एक्सईएन वीके शर्मा ने जब साथर उपकेंद्र व इससे जुड़ी लाइन के निर्माण की जांच की तो बड़े पैमाने पर घपला सामना आया। जांच के बाद पता चला कि इसके लिए आरा से साथर के बीच 9.50 किमी ओवरहेडेड लाइन का निर्माण कराया गया है, लेकिन मौके पर सिर्फ 6.50 किमी ही लाइन निर्माण पाया गया। इसमें तीन किमी ओवरहेडेड लाइन बिना बनाए ही फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान करा लिया गया है। जांच के दौरान व्यापक स्तर पर अनियमितताएं पकड़ी गई हैं। पता चला है कि ज्यादातर विद्युत खंबों की ग्राउटिंग नहीं गई है। जहां कराई गई, वहां मानकों की खुलकर अनदेखी की गई है। किसी भी खंभे में स्टोन पैड का इस्तेमाल नहीं किया गया है। स्टे रॉड का डबल भुगतान किया गया है। बिजली घरों पर डबल पोल, पीसीसी पोल बनाकर लोहे के खंभों के रूप में मापन किया गया है। साधारण केबिल लगाई गई है, लेकिन मापन आर्मर्ड केबिल के रूप में किया गया है। इस मामले में तत्कालीन सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता का नाम आने के बाद विभाग में अंदरखाने हड़कंप मच गया है।
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