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Prayagraj News: कैशलेस युवा, बजट बेकाबू
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डिजिटल लेन-देन ने युवाओं की लाइफस्टाइल को आसान बनाया लेकिन उनकी वित्तीय अनुशासित जीवनशैली को गहरी चकाचौंध में धकेल दिया है।
ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग में हुए एक व्यावहारिक शोध में यह खुलासा हुआ है कि यूपीआई व मोबाइल वॉलेट के बढ़ते इस्तेमाल ने छात्रों में बिना सोचे-समझे खर्च करने की प्रवृत्ति को तेजी से हवा दी है।
अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रो. हर्षमणि सिंह के निर्देशन में एमए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा अदिति सिंह ने इम्पैक्ट ऑफ डिजिटल पेमेंट ऑन स्पेंडिंग बिहेवियर ऑफ कॉलेज स्टूडेंट्स विषय पर शोध किया। पाया कि स्क्रीन पर दिखने वाले डिजिटल अंकों की आभासी दुनिया, पॉकेट मनी के बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। यह शोध गूगल फॉर्म के माध्यम से प्रयागराज के छात्रों से एकत्रित किए गए प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित है। संवाद
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क्या है पेन ऑफ पेइंग सिद्धांत
व्यवहारिक अर्थशास्त्र के पेन ऑफ पेइंग (भुगतान का मनोवैज्ञानिक दर्द) सिद्धांत के अनुसार नकद भुगतान करते समय नोटों का भौतिक अहसास नकद भुगतान को प्राकृतिक संकेत देता है। इसके विपरीत क्यूआर कोड को स्कैन करना इतना घर्षणहीन होता है कि खर्च करते समय को मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस नहीं होता। इस कारण 70 फीसदी से अधिक छात्रों ने डिजिटल पेमेंट अपनाने के बाद अपने मासिक खर्च में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है।
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शिक्षा से ज्यादा लाइफस्टाइल पर खर्च
डिजिटल भुगतान की सुगमता ने छात्रों के बीच बजट प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। छात्र केवल 15.5 फीसदी राशि ही किताबों और अध्ययन सामग्री पर खर्च कर रहे हैं। सर्वाधिक 29.3 फीसदी राशि कैफे, चाय और स्नैक्स जैसी जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च हो रही है।
ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग में हुए एक व्यावहारिक शोध में यह खुलासा हुआ है कि यूपीआई व मोबाइल वॉलेट के बढ़ते इस्तेमाल ने छात्रों में बिना सोचे-समझे खर्च करने की प्रवृत्ति को तेजी से हवा दी है।
अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रो. हर्षमणि सिंह के निर्देशन में एमए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा अदिति सिंह ने इम्पैक्ट ऑफ डिजिटल पेमेंट ऑन स्पेंडिंग बिहेवियर ऑफ कॉलेज स्टूडेंट्स विषय पर शोध किया। पाया कि स्क्रीन पर दिखने वाले डिजिटल अंकों की आभासी दुनिया, पॉकेट मनी के बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। यह शोध गूगल फॉर्म के माध्यम से प्रयागराज के छात्रों से एकत्रित किए गए प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित है। संवाद
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क्या है पेन ऑफ पेइंग सिद्धांत
व्यवहारिक अर्थशास्त्र के पेन ऑफ पेइंग (भुगतान का मनोवैज्ञानिक दर्द) सिद्धांत के अनुसार नकद भुगतान करते समय नोटों का भौतिक अहसास नकद भुगतान को प्राकृतिक संकेत देता है। इसके विपरीत क्यूआर कोड को स्कैन करना इतना घर्षणहीन होता है कि खर्च करते समय को मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस नहीं होता। इस कारण 70 फीसदी से अधिक छात्रों ने डिजिटल पेमेंट अपनाने के बाद अपने मासिक खर्च में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है।
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डिजिटल भुगतान की सुगमता ने छात्रों के बीच बजट प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। छात्र केवल 15.5 फीसदी राशि ही किताबों और अध्ययन सामग्री पर खर्च कर रहे हैं। सर्वाधिक 29.3 फीसदी राशि कैफे, चाय और स्नैक्स जैसी जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च हो रही है।