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शादी समारोह में शराब का लाइसेंस देने को चुनौती, प्रदेश सरकार को जवाब दाखिल करने की मिली मोहलत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 08 Jan 2019 09:53 PM IST
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शादी-ब्याह और पार्टियों में शराब पीने तथा पिलाने के लिए लाइसेंस दिए जाने की आबकारी नीति को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने इस पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए मोहलत मांगी है, जिस पर कोर्ट ने 11 जनवरी की तिथि नियत की है।
पैरेंट गार्जियन एसोसिएशन कानपुर ने याचिका दाखिल कर आबकारी नीति को वापस लेने की मांग की है। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची संस्था के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय का कहना था कि शादी समारोहों में महिलाएं और बच्चे भी आते हैं। कुछ घंटे के लिए शराब पीने की छूट देने से बच्चों पर खराब प्रभाव पड़ेगा। शराब पीने की आड़ में अन्य मादक पदार्थों चरस, गांजा, अफीम आदि का भी सेवन किया जाता है।
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पैरेंट गार्जियन एसोसिएशन कानपुर ने याचिका दाखिल कर आबकारी नीति को वापस लेने की मांग की है। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है।
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याची संस्था के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय का कहना था कि शादी समारोहों में महिलाएं और बच्चे भी आते हैं। कुछ घंटे के लिए शराब पीने की छूट देने से बच्चों पर खराब प्रभाव पड़ेगा। शराब पीने की आड़ में अन्य मादक पदार्थों चरस, गांजा, अफीम आदि का भी सेवन किया जाता है।
सरकार आबकारी विभाग के जरिए नशे का कारोबार कर रही है। नई नीति में पार्टी के आयोजक को शाम सात से रात साढ़े दस बजे तक शराब और बीयर पिलाने की अनुमति दी जाती है।
इसका बाकायदा लाइसेंस जारी किया जाता है, मगर शराब पीने-पिलाने का दौर आधी रात के बाद तक जारी रहता है। इसकी रोक थाम का कोई प्रबंध नहीं है। कोर्ट ने सरकार को 11 जनवरी तक इस मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
इसका बाकायदा लाइसेंस जारी किया जाता है, मगर शराब पीने-पिलाने का दौर आधी रात के बाद तक जारी रहता है। इसकी रोक थाम का कोई प्रबंध नहीं है। कोर्ट ने सरकार को 11 जनवरी तक इस मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।