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थानों पर एफआईआर दर्ज कराना बना चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Fri, 09 Sep 2016 12:02 AM IST
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थानों पर एफआईआर दर्ज कराना बना चुनौती
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में थानों पर एफआईआर दर्ज कराना ही पीड़ितों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं माना जाता है। आम तौर पर पुलिस एफआईआर दर्ज करने को जल्दी तैयार नहीं होती। जिसके बाद पीड़ितों को अधिकारियों या फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।
हालांकि जिले के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ितोें की एफआईआर तत्काल दर्ज कराने के साथ ही कार्रवाई की जाती है। साथ ही जिले में सभी थानों पर कंप्यूटरीकृत एफआईआर दर्ज करने का काम भी किया जा रहा है। ।
केस एक
किसान की हत्या में देर से लिखी एफआईआर
रामनगर थाना क्षेत्र में टटेरपुर लाइन गांव में चार दिन पूर्व एक किसान की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने में हीलाहवाली की। जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने मृतक के परिवारीजनों के साथ धरना प्रदर्शन किया इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। आखिकर काफी किरकरी कराने के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामला दर्ज किया और यहां के एसओ को भी हटा दिया गया है।
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केस दो
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मारपीट का मामला
सतरिख थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव मेें करीब छह माह पूर्व दो पक्षों में विवाद हो गया था। शिकायत के बाद भी पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं की। जिसके बाद पीड़ित युवक ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसके कुछ दिन बाद पुलिस ने मामले में संबंधित धारा में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की।
केस तीन
अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ दुराचार का केस
शहर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की एक महिला ने करीब छह माह पहले गांव के ही युवक पर रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने इसे आपसी विवाद का मामला बताते हुए रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। जिसके बाद पीड़िता काफी भटकने के बाद कोर्ट की शरण में गई थी। जहां पर कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले में जांच पड़ताल कर उचित कार्रवाई की है।
अफसरों के यहां भाग दौड़ करते पीड़ित
पुलिस थानों पर रिपोर्ट दर्ज न होने की दशा में पीड़ित अफसरों के यहां चक्कर लगाते है। इसके साथ ही पुलिस विभाग में पीड़ितोें की सुनवाई के लिए शिकायत प्रकोष्ठ भी बना हुआ है। यहां पर एक इंस्पेक्टर तैनात हैं जो डाक या अन्य माध्यम से आने वाले शिकायती प्रार्थना पत्रों पर कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों व थानों में भेजते है।
कोर्ट के आदेश पर एक साल में दर्ज हुए सौ से अधिक मामले
जिले के विभिन्न थानों में बीते एक साल में कोर्ट के आदेश पर कई अपराधों से संबंधित सौ से अधिक मामलों में एफआईआर पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दर्ज की है। थानों पर मुकदमा लिखने से कन्नी काटने वाली पुलिस कोर्ट में मामला पहुंचने पर त्वरित कार्रवाई करती है। हालांकि कोर्ट के आदेश पर बहुत सारे फर्जी मामलों में भी पुलिस को एफआईआर लिखना पड़ जाता है।
सभी थाने हैं कंप्यूटरीकृट
जिले के 23 थानों में इस समय कंप्यूटर पर ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने का काम किया जा रहा है। प्रत्येक थानों मेें जहां इंटरनेट की बेहतर व्यवस्था है। वहीं बिजली के लिए जनरेटर भी लगाए गए हैं। लगभग सभी मामलों में पुलिस द्वारा कंप्यूटरीकृत एफआईआर ही लिखी जाती है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 24 घंटे में एफआईआर अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के संबंध में भी कार्य शुरू किया गया है। प्रत्येक थानों में जहां कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध है वहीं कम्प्यूटर ऑपरेटर भी तैनात किए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश हुआ है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद उसे 24 घंटे के अंदर अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए उसका पालन किया जाएगा। थानों पर आने वाले पीड़ितों को बेहतर न्याय दिलाने व हर मामले में एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया जाता है। -राजू बाबू सिंह, एसपी
हालांकि जिले के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ितोें की एफआईआर तत्काल दर्ज कराने के साथ ही कार्रवाई की जाती है। साथ ही जिले में सभी थानों पर कंप्यूटरीकृत एफआईआर दर्ज करने का काम भी किया जा रहा है। ।
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केस एक
किसान की हत्या में देर से लिखी एफआईआर
रामनगर थाना क्षेत्र में टटेरपुर लाइन गांव में चार दिन पूर्व एक किसान की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने में हीलाहवाली की। जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने मृतक के परिवारीजनों के साथ धरना प्रदर्शन किया इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। आखिकर काफी किरकरी कराने के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामला दर्ज किया और यहां के एसओ को भी हटा दिया गया है।
केस दो
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मारपीट का मामला
सतरिख थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव मेें करीब छह माह पूर्व दो पक्षों में विवाद हो गया था। शिकायत के बाद भी पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं की। जिसके बाद पीड़ित युवक ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसके कुछ दिन बाद पुलिस ने मामले में संबंधित धारा में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की।
केस तीन
अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ दुराचार का केस
शहर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की एक महिला ने करीब छह माह पहले गांव के ही युवक पर रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने इसे आपसी विवाद का मामला बताते हुए रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। जिसके बाद पीड़िता काफी भटकने के बाद कोर्ट की शरण में गई थी। जहां पर कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले में जांच पड़ताल कर उचित कार्रवाई की है।
अफसरों के यहां भाग दौड़ करते पीड़ित
पुलिस थानों पर रिपोर्ट दर्ज न होने की दशा में पीड़ित अफसरों के यहां चक्कर लगाते है। इसके साथ ही पुलिस विभाग में पीड़ितोें की सुनवाई के लिए शिकायत प्रकोष्ठ भी बना हुआ है। यहां पर एक इंस्पेक्टर तैनात हैं जो डाक या अन्य माध्यम से आने वाले शिकायती प्रार्थना पत्रों पर कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों व थानों में भेजते है।
कोर्ट के आदेश पर एक साल में दर्ज हुए सौ से अधिक मामले
जिले के विभिन्न थानों में बीते एक साल में कोर्ट के आदेश पर कई अपराधों से संबंधित सौ से अधिक मामलों में एफआईआर पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दर्ज की है। थानों पर मुकदमा लिखने से कन्नी काटने वाली पुलिस कोर्ट में मामला पहुंचने पर त्वरित कार्रवाई करती है। हालांकि कोर्ट के आदेश पर बहुत सारे फर्जी मामलों में भी पुलिस को एफआईआर लिखना पड़ जाता है।
सभी थाने हैं कंप्यूटरीकृट
जिले के 23 थानों में इस समय कंप्यूटर पर ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने का काम किया जा रहा है। प्रत्येक थानों मेें जहां इंटरनेट की बेहतर व्यवस्था है। वहीं बिजली के लिए जनरेटर भी लगाए गए हैं। लगभग सभी मामलों में पुलिस द्वारा कंप्यूटरीकृत एफआईआर ही लिखी जाती है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 24 घंटे में एफआईआर अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के संबंध में भी कार्य शुरू किया गया है। प्रत्येक थानों में जहां कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध है वहीं कम्प्यूटर ऑपरेटर भी तैनात किए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश हुआ है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद उसे 24 घंटे के अंदर अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए उसका पालन किया जाएगा। थानों पर आने वाले पीड़ितों को बेहतर न्याय दिलाने व हर मामले में एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया जाता है। -राजू बाबू सिंह, एसपी