{"_id":"6a15fef7cb234d94b0000df3","slug":"dusty-hot-air-is-suffocating-hypertension-patients-on-the-rise-bareilly-news-c-4-bly1053-892751-2026-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: धूल भरी गर्म हवा फुला रही दम, हाइपरटेंशन के मरीज बढ़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: धूल भरी गर्म हवा फुला रही दम, हाइपरटेंशन के मरीज बढ़े
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बरेली। लगातार बढ़ते तापमान और उमस के बीच अस्पतालों की ओपीडी में हाइपरटेंशन, सांस फूलने, घबराहट और चक्कर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मंगलवार को दिन का पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। दिनभर चली धूल भरी गर्म हवाओं ने लोगों को बेहाल कर दिया।
डॉक्टरों के मुताबिक तेज गर्मी और धूल भरी हवा का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा मरीजों पर पड़ रहा है। कई मरीजों में रक्तचाप अचानक बढ़ने, बेचैनी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत मिल रही है। जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. वैभव शुक्ला के मुताबिक गर्मी में शरीर में पानी और नमक की कमी से ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। धूल भरी हवा फेफड़ों पर दबाव बढ़ा रही है, जिससे सांस संबंधी मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। डिहाइड्रेशन होने पर हृदय को रक्त संचार बनाए रखने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
इससे हाइपरटेंशन और हार्ट संबंधी खतरा बढ़ जाता है। कई मरीजों में सिरदर्द, घबराहट, सीने में भारीपन और थकान की शिकायत सामने आ रही है। कहा कि बढ़ रही गर्मी के दौरान संदिग्ध लक्षण उभरें तो हल्के में लेना घातक हो सकता है। इसलिए गंभीर रोगियों को सतर्क रहना जरूर है।
विज्ञापन
लक्षण और बचाव के उपाय
सिरदर्द और चक्कर आना, सांस फूलना और बेचैनी, सीने में भारीपन, पसीना और कमजोरी, दिल की धड़कन बढ़ना, आंखों के सामने धुंधलापन शुरुआती लक्षण हैं। अगर यह समस्या है तो डॉक्टर से परामर्श करें। दोपहर 12 से शाम चार बजे तक धूप में निकलने से बचें। खूब पानी, तरल पदार्थ लें। धूल भरी हवा में मास्क का प्रयोग करें। ज्यादा नमक और तली चीज न खाएं। बीपी की दवा लेते रहें।
--
अव्यवस्था : बच्चा वार्ड फुल, बेंच पर भर्ती करने पड़ रहे बच्चे
बरेली। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में डायरिया, उल्टी, दस्त और बुखार के चपेट में आने वाले बच्चों की कतार बढ़ने से बेड कम पड़ते जा रहे हैं। मंगलवार को दो बच्चों को बेंच पर भर्ती कर इलाज किया गया। वहीं, बेड पर भी अभिभावक की सहमति से दो बच्चे भर्ती हो रहे हैं।एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक अस्पताल में शहर समेत देहात से भी रेफर होकर बच्चे पहुंचते हैं। गंभीर हालत होने से इलाज करना भी जरूरी है इसलिए उपलब्ध संसाधन और अभिभावकों की सहमति पर एक बेड पर दो बच्चे या फिर बेंच पर लिटाकर दवाएं दी जा रही हैं। जैसे ही कोई बच्चा स्वस्थ हुआ उसे डिस्चार्ज कर बेंच पर लेटे बच्चों को बेड दिया जा रहा है। मंगलवार को 30 बेड के वार्ड में 36 बच्चे भर्ती रहे।
डॉक्टरों के मुताबिक तेज गर्मी और धूल भरी हवा का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा मरीजों पर पड़ रहा है। कई मरीजों में रक्तचाप अचानक बढ़ने, बेचैनी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत मिल रही है। जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. वैभव शुक्ला के मुताबिक गर्मी में शरीर में पानी और नमक की कमी से ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। धूल भरी हवा फेफड़ों पर दबाव बढ़ा रही है, जिससे सांस संबंधी मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। डिहाइड्रेशन होने पर हृदय को रक्त संचार बनाए रखने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इससे हाइपरटेंशन और हार्ट संबंधी खतरा बढ़ जाता है। कई मरीजों में सिरदर्द, घबराहट, सीने में भारीपन और थकान की शिकायत सामने आ रही है। कहा कि बढ़ रही गर्मी के दौरान संदिग्ध लक्षण उभरें तो हल्के में लेना घातक हो सकता है। इसलिए गंभीर रोगियों को सतर्क रहना जरूर है।
Trending Videos
लक्षण और बचाव के उपाय
सिरदर्द और चक्कर आना, सांस फूलना और बेचैनी, सीने में भारीपन, पसीना और कमजोरी, दिल की धड़कन बढ़ना, आंखों के सामने धुंधलापन शुरुआती लक्षण हैं। अगर यह समस्या है तो डॉक्टर से परामर्श करें। दोपहर 12 से शाम चार बजे तक धूप में निकलने से बचें। खूब पानी, तरल पदार्थ लें। धूल भरी हवा में मास्क का प्रयोग करें। ज्यादा नमक और तली चीज न खाएं। बीपी की दवा लेते रहें।
अव्यवस्था : बच्चा वार्ड फुल, बेंच पर भर्ती करने पड़ रहे बच्चे
बरेली। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में डायरिया, उल्टी, दस्त और बुखार के चपेट में आने वाले बच्चों की कतार बढ़ने से बेड कम पड़ते जा रहे हैं। मंगलवार को दो बच्चों को बेंच पर भर्ती कर इलाज किया गया। वहीं, बेड पर भी अभिभावक की सहमति से दो बच्चे भर्ती हो रहे हैं।एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक अस्पताल में शहर समेत देहात से भी रेफर होकर बच्चे पहुंचते हैं। गंभीर हालत होने से इलाज करना भी जरूरी है इसलिए उपलब्ध संसाधन और अभिभावकों की सहमति पर एक बेड पर दो बच्चे या फिर बेंच पर लिटाकर दवाएं दी जा रही हैं। जैसे ही कोई बच्चा स्वस्थ हुआ उसे डिस्चार्ज कर बेंच पर लेटे बच्चों को बेड दिया जा रहा है। मंगलवार को 30 बेड के वार्ड में 36 बच्चे भर्ती रहे।