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Basti News: लोगों की आकर्षण का केंद्र होगा संत रविदास वन विहार
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बस्ती। शहरियों के साथ आसपास गांव के लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा संत रविदास वन विहार अब नए रूप में तैयार हो रहा है। बदहाली झेल रहे वन विहार को 42 लाख रुपये का बूस्टर डोज मिल गया है। इस धनराशि से वन विहार को संवारा जा रहा है। अब तक कई कार्य हो चुके हैं, इससे भव्यता बढ़ने लगी है।
वन विहार में मगरमच्छ घर जीर्ण-शीर्ण में रहा है। वन विहार में जंग खाकर टूटते झूले को सही किया गया है। तालाब में तैरती गंदगी की सफाई हो रही है। बताया गया कि जब वन विहार की नींव रखी गई थी तो शहरियों में उत्साह था। लोग दूर-दराज से यहां लोग लुफ्त उठाने आते थे। मगर, धीरे-धीरे रौनक कम हुआ और पर्यटक का आवक कम हो गया। जानकारों का कहना था कि मनोरंजन के लिए अब आसपास के जिलों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, साल बीतते गए और वन विहार की बदहाली की कहानी शुरू हो गई थी। लंबे प्रयास के बाद अब 42 लाख रुपये का धन आवंटित किया गया है। उसके जरिये उसकी बदहाली दूर की जा रही है। बताया गया कि तीन करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भेजा गया था, मगर स्वीकृति सिर्फ 42 लाख रुपये की ही मिल सकी। रोजाना अभी 100 से अधिक टिकट बिक जाते हैं।
1986 में शुरू हुआ था वन विहार का सफर : वन विहार की शुरुआत वर्ष 1986 में हुआ। उद्घाटन के बाद से ही इसमें शहरियों की भीड़ उमड़ने लगी थी। यहां पर उस समय अजगर और मगरमच्छ देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी। वन विहार में प्रवेश करते ही अजगर देखने को मिल जाते थे। यहां घूमने आने वाले लोगों के लिए पहले आकर्षण का केंद्र पानी में तैरते मगरमच्छ हुआ करते थे, मगर उस तालाब में अब खर-पतवार दिखाई दे रहे हैं, इसके जीर्णोद्धार का इंतजार है।
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टिकट शुल्क 10 रुपये : वन विहार में प्रवेश के लिए टिकट के रूप में 10 रुपये लिए जाते हैं। अंदर कोई चार्ज नहीं है, पर्यटक घूम-टहल सकते हैं। पूर्व में जो शौचालय बदहाल थे, दुरुस्त हो गए हैं। पानी उपलब्ध है। रविवार के दिन यहां भीड़ काफी होती है। वॉच टावर की सीढि़या, प्लेटफॉर्म और वन विहार के भीतर पार्क संवारा गया है। यहां लगे झूले का आनंद लेते बच्चे देखे जाते हैं।
वन विहार में मगरमच्छ घर जीर्ण-शीर्ण में रहा है। वन विहार में जंग खाकर टूटते झूले को सही किया गया है। तालाब में तैरती गंदगी की सफाई हो रही है। बताया गया कि जब वन विहार की नींव रखी गई थी तो शहरियों में उत्साह था। लोग दूर-दराज से यहां लोग लुफ्त उठाने आते थे। मगर, धीरे-धीरे रौनक कम हुआ और पर्यटक का आवक कम हो गया। जानकारों का कहना था कि मनोरंजन के लिए अब आसपास के जिलों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, साल बीतते गए और वन विहार की बदहाली की कहानी शुरू हो गई थी। लंबे प्रयास के बाद अब 42 लाख रुपये का धन आवंटित किया गया है। उसके जरिये उसकी बदहाली दूर की जा रही है। बताया गया कि तीन करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भेजा गया था, मगर स्वीकृति सिर्फ 42 लाख रुपये की ही मिल सकी। रोजाना अभी 100 से अधिक टिकट बिक जाते हैं।
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1986 में शुरू हुआ था वन विहार का सफर : वन विहार की शुरुआत वर्ष 1986 में हुआ। उद्घाटन के बाद से ही इसमें शहरियों की भीड़ उमड़ने लगी थी। यहां पर उस समय अजगर और मगरमच्छ देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी। वन विहार में प्रवेश करते ही अजगर देखने को मिल जाते थे। यहां घूमने आने वाले लोगों के लिए पहले आकर्षण का केंद्र पानी में तैरते मगरमच्छ हुआ करते थे, मगर उस तालाब में अब खर-पतवार दिखाई दे रहे हैं, इसके जीर्णोद्धार का इंतजार है।
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