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गली मोहल्ला, हर तरफ होली का हल्ला
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
Updated Mon, 21 Mar 2016 10:49 PM IST
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होली खेलतीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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होली जैसे जैसे करीब आ रही है गांव हो या गली मोहल्ला हर ओर होली का हल्ला है। होली की तैयारी में जुटी टोलियां प्लान तैयार कर रही हैं। होलिका पाटने के लिए लकड़ी का इंतजाम किया जाने लगा है। होली में इस बार कौन किसे क्या खिलाएगा या फिर मस्ती के लिए कौन सी ठंढाई शर्बत पिलाई जाएगी टोली व टीम में कौन कितने लोग शामिल होंगे इसका भी जोड़तोड़ शुरू है। होली से पहले ही स्कूल व ऑफिसों में भी होली की शुरुआत हो चुकी है। होली पर दावतें दी जा रही हैं। कई स्थान पर तो रंगों को घोेल कर स्टाक रखने के लिए बड़े ड्रम टेंट कनात बुक कराए गए हैं।
गांव में कायम है ढोल मजीरा की थाप पर फाग गायन
होली में अभी भी गांव में फाग का गायन कायम है। ग्राम भदुवातरहर में आज भी होली में चौताल होता है। जिसमें वीर रस के अलावा श्रंगार रस से सराबोर फगुवा गीत गाया जाता है इस चौताल में गांव के बूढ़े जवान व बच्चे भी शिरकत करते हैं। इसके अलावा ढोल मजीरा के साथ फाग गाते हुरियारों की टोलिया पास के गांव मजरों में भरमड़ करती है। गांव के यशोदा नन्दन त्रिपाठी का कहना है कि यहां अभी पुरानी परम्परा कायम है। भोर में होलिका जलाने के बाद लोगों होली तापने के लिए बुलाया जाता है होलिका तापने आने वाली महिलाएं होली गीत गाती हैं।
शहर में जुलूसाें में निकलती है हुड़दंगियों की टोलियां
शहर में हर गली मोहल्ले में हुड़दंगियों का हल्ला रहता है। शहर में लोगों की टोलियां गली मोहल्लों से निकलती हैं। यह लोग दूसरे मोहल्लों में फाग गाते हुए अपने परिचतों के घर जाकर एक दूसरे को रंग लगाते हैं। अपने घर पर आने वाले हुरियारों की टोली को लोग ठण्ढई वाला शर्बत पिलाने के साथ नमकीन व गुझिया खिलाकर होली का जश्न मनाते हैं।
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22/23 की रात 3:19 बजे के बाद होलिका दहन का मुहूर्त
23 को होगा रंगोत्सव
गोंडा। कार्तिकेय ज्योतिष शोध संस्थानम् के ज्योतिषाचार्य पंडित तापेश्वरी प्रताप मिश्र के अनुसार भद्रा नक्षत्र में होलिका दहन नहीं किया जा सकता है। उनका मानना है कि भद्रायां द्वै न कर्तव्या फाल्गुनी श्रावणी तथा! इस शास्त्राज्ञा के अनुसार भद्रा में होलिका दहन का निषेध है। दिनांक 22 मार्च को रात्रि 3 बजकर 19 मिनट तक भद्रा है। भद्रा की समाप्ति के उपरांत एवं सूर्योदय के पूर्व ही होलिका दहन करना उचित होगा। दिनांक 23 मार्च को दिन में 16 बजकर 30 मिनट तक पूर्णमासी रहेगी। अत: 23/24 मार्च को रात्रि में होलिका दहन का कोई औचित्य नहीं है।
यदि दिन में 23 तारीख को सायं 4:30 से पूर्व होलिका दाह हो जाए तो 24 को होली मनाई जा सकती है पर यह प्रक्रिया सामान्य लोकव्यवहार के अनुरूप नहीं है, क्योंकि दिन में होलिका दहन नहीं होता है। अत: दिनांक 22/23 मार्च की रात्रि में तीन बजकर 19 मिनट के बाद सूर्योदय से पूर्व होलिका दहन तथा 23 मार्च को रंगोत्सव मनाना समीचीन होगा।
गांव में कायम है ढोल मजीरा की थाप पर फाग गायन
होली में अभी भी गांव में फाग का गायन कायम है। ग्राम भदुवातरहर में आज भी होली में चौताल होता है। जिसमें वीर रस के अलावा श्रंगार रस से सराबोर फगुवा गीत गाया जाता है इस चौताल में गांव के बूढ़े जवान व बच्चे भी शिरकत करते हैं। इसके अलावा ढोल मजीरा के साथ फाग गाते हुरियारों की टोलिया पास के गांव मजरों में भरमड़ करती है। गांव के यशोदा नन्दन त्रिपाठी का कहना है कि यहां अभी पुरानी परम्परा कायम है। भोर में होलिका जलाने के बाद लोगों होली तापने के लिए बुलाया जाता है होलिका तापने आने वाली महिलाएं होली गीत गाती हैं।
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शहर में जुलूसाें में निकलती है हुड़दंगियों की टोलियां
शहर में हर गली मोहल्ले में हुड़दंगियों का हल्ला रहता है। शहर में लोगों की टोलियां गली मोहल्लों से निकलती हैं। यह लोग दूसरे मोहल्लों में फाग गाते हुए अपने परिचतों के घर जाकर एक दूसरे को रंग लगाते हैं। अपने घर पर आने वाले हुरियारों की टोली को लोग ठण्ढई वाला शर्बत पिलाने के साथ नमकीन व गुझिया खिलाकर होली का जश्न मनाते हैं।
22/23 की रात 3:19 बजे के बाद होलिका दहन का मुहूर्त
23 को होगा रंगोत्सव
गोंडा। कार्तिकेय ज्योतिष शोध संस्थानम् के ज्योतिषाचार्य पंडित तापेश्वरी प्रताप मिश्र के अनुसार भद्रा नक्षत्र में होलिका दहन नहीं किया जा सकता है। उनका मानना है कि भद्रायां द्वै न कर्तव्या फाल्गुनी श्रावणी तथा! इस शास्त्राज्ञा के अनुसार भद्रा में होलिका दहन का निषेध है। दिनांक 22 मार्च को रात्रि 3 बजकर 19 मिनट तक भद्रा है। भद्रा की समाप्ति के उपरांत एवं सूर्योदय के पूर्व ही होलिका दहन करना उचित होगा। दिनांक 23 मार्च को दिन में 16 बजकर 30 मिनट तक पूर्णमासी रहेगी। अत: 23/24 मार्च को रात्रि में होलिका दहन का कोई औचित्य नहीं है।
यदि दिन में 23 तारीख को सायं 4:30 से पूर्व होलिका दाह हो जाए तो 24 को होली मनाई जा सकती है पर यह प्रक्रिया सामान्य लोकव्यवहार के अनुरूप नहीं है, क्योंकि दिन में होलिका दहन नहीं होता है। अत: दिनांक 22/23 मार्च की रात्रि में तीन बजकर 19 मिनट के बाद सूर्योदय से पूर्व होलिका दहन तथा 23 मार्च को रंगोत्सव मनाना समीचीन होगा।