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रेत खनन मामला : सीबीआई जांच के बाद रिपोर्ट पर उठे सवाल

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 11:31 PM IST
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Sand mining case: Questions raised over report following CBI probe
फोटो 11 एचएएमपी 24- मौदहा क्षेत्र के गढ़ा गांव के पास केन नदी में संचालित खनन गतिविधि। संवाद
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हमीरपुर। रेत और मौरंग खनन के लिए जनपद एक बार फिर चर्चा में है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर)-2024 के पुनर्मूल्यांकन के निर्देश दिए जाने के बाद जिले की खनन व्यवस्था पर नए फिर से बहस छिड़ गई है।

पिछले एक दशक में अवैध खनन के आरोप, हाईकोर्ट की सुनवाई, सीबीआई जांच, प्राथमिकी और चार्जशीट तक पहुंच चुके मामलों के बीच अब सवाल यह है कि आखिर हमीरपुर का खनन बार-बार विवादों में क्यों आता है।
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एनजीटी ने हाल ही में दिए आदेश में कहा है कि डीएसआर को मंजूरी दिए जाने से पहले खनिज के दोबारा जमा होने की प्रक्रिया यानी रिप्लेनिशमेंट स्टडी का पूरा परीक्षण संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष उपलब्ध नहीं था। न्यायाधिकरण ने राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) और राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) को डीएसआर का नए सिरे से मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि वर्तमान खनन पट्टों पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
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जिले में खनन को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच हुए खनन पट्टों के आवंटन और संचालन को लेकर उठे सवालों ने प्रदेश की राजनीति से लेकर न्यायालय तक हलचल मचाई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई जांच शुरू हुई। बाद में मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के साथ चार्जशीट भी दाखिल हुई। जांच के दौरान तत्कालीन अधिकारियों, खनन विभाग के कर्मचारियों और पट्टाधारकों की भूमिका की पड़ताल की गई थी।
अब एनजीटी के आदेश के बाद फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या खनन से जुड़ी पर्यावरणीय प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन हुआ था। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विजय द्विवेदी का कहना है कि जिले में नदी की जलधारा, भारी मशीनों के उपयोग, नदी तल की गहराई और पर्यावरणीय मानकों को लेकर लंबे समय से शिकायतें होती रही हैं। दावा है कि मौदहा क्षेत्र के गढ़ा गांव के पास केन नदी में संचालित खनन गतिविधियों को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
खनन विभाग का कहना है कि न्यायाधिकरण के समक्ष विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया जा चुका है। जिले में खनन से जुड़े पुराने विवादों और ताजा न्यायिक आदेशों के बीच अब निगाहें पुनर्मूल्यांकन पर टिक गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्पष्ट हो सकेगा कि डीएसआर तैयार करने और मंजूरी देने की प्रक्रिया में पर्यावरणीय व तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं।
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