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Hathras News: बजट की कमी..जननी सुरक्षा योजना पड़ी सुस्त, प्रोत्साहन राशि अटकी
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
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सुरक्षित प्रसव और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से शुरू की गई जननी सुरक्षा योजना का बजट नहीं मिल रहा है, जिससे महिलाओं को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट जारी न होने के कारण दो महीनों से आठ हजार महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता अधर में लटक गई है। फरवरी के बाद से बजट का वितरण नहीं हुआ है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) को बढ़ावा देना है, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित रहें। इसके तहत सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में आर्थिक सहायता दी जाती है।
योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1,400 और शहर की महिलाओं को 1,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। प्रसव कराने में मदद करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को ग्रामीण क्षेत्र में 600 और शहरी क्षेत्र में 400 प्रति प्रसव दिए जाते हैं।
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बजट आते ही ब्लॉक स्तर से सभी लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेज दी जाएगी। सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली अन्य सुविधाएं पूरी तरह सुचारू हैं। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की प्रसव के दौरान होने वाली जांच, दवाएं, रक्त की उपलब्धता और प्रसव के बाद देखभाल की सुविधा दी जा रही है।
-डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) को बढ़ावा देना है, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित रहें। इसके तहत सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में आर्थिक सहायता दी जाती है।
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योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1,400 और शहर की महिलाओं को 1,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। प्रसव कराने में मदद करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को ग्रामीण क्षेत्र में 600 और शहरी क्षेत्र में 400 प्रति प्रसव दिए जाते हैं।
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-डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ