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भीषण गर्मी : 331 मेगावॉट पहुंची मांग, बिजली कटौती से लोग बिलबिलाए
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चंदपा फीडर पर हुए फाॅल्ट को सही करते कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Samvad
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भीषण गर्मी के बीच जिले में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। सोमवार को जिले के प्रमुख पांच विद्युत फीडरों पर मांग बढ़कर 315 मेगावॉट तक पहुंच गई, जबकि इस सीजन में अधिकतम डिमांड 331 मेगावॉट तक पहुंच चुकी है। ओवरलोडिंग और कटौती के चलते शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोग परेशान हैं।
सबसे खराब स्थिति नॉन-टीटीजेड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सासनी, हसायन और सिकंदराराऊ विद्युत उपकेंद्रों की है, जहां रात के समय कंट्रोल रूम से पांच-पांच घंटे तक बिजली कटौती कराई जा रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रात में केवल तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है, जिससे गर्मी में राहत नहीं मिल रही।
वहीं, टीटीजेड क्षेत्र में शामिल मीतई, सादाबाद, बामौली और ओढ़पुरा उपकेंद्रों की स्थिति कुछ बेहतर है, लेकिन यहां भी ओवरलोडिंग के कारण ट्रिपिंग की समस्या है। ट्रांसफार्मरों के अधिक गर्म होने से फ्यूज उड़ रहे हैं, जिससे बार-बार आपूर्ति बाधित हो रही है। बिजली कटौती और ट्रिपिंग से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। रात में बिजली न मिलने से लोगों की नींद खराब हो रही है, वहीं किसानों को सिंचाई कार्यों में भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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बिजली विभाग के अनुसार जिले के कुल सात सब स्टेशनों में से हसायन और सिकंदराराऊ को अलीगढ़ ट्रांसमिशन से बिजली आपूर्ति मिलती है, जबकि सातों सब स्टेशन का संचालन हाथरस वितरण खंड के माध्यम से किया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्र का तय रोस्टर
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति का निर्धारित रोस्टर 18 घंटे, जबकि कृषि ट्यूबवेलों के लिए 10 घंटे तय है। नॉन-टीटीजेड क्षेत्रों में रूटीन रोस्टर को दो भागों में बांटा गया है। ग्रुप ए में सुबह 7:30 बजे से 11:00 बजे तक और दोपहर 1:30 बजे से 4:00 बजे तक बिजली बाधित रहती है। ग्रुप बी में सुबह 5:15 बजे से 8:15 बजे तक और 10:30 बजे से 1:30 बजे तक आपूर्ति रोकी जाती है।
758 एमवीए क्षमता पर 331 मेगावॉट का दबाव
जनपद में कुल 65 बिजलीघर और उनसे जुड़े 125 पावर ट्रांसफार्मर हैं। हैरत की बात यह है कि जनपद में 758 एमवीए क्षमता वाले उपकरण होने के बाद भी मात्र 331 मेगावॉट की मांग पर ही कस्बे व देहात के ट्रांसफॉर्मर हांफ रहे है। मांग से कहीं अधिक क्षमता होने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। विद्युत सब स्टेशनों और फीडर से निकलने वाली आपूर्ति फाल्ट आदि के कारण बार-बार बाधित हो रही है। ऐसे में विद्युत विभाग के बिजनेस प्लान के तहत हुए उच्चीकरण कार्य पर भी प्रश्रचिन्ह खड़े हो रहे हैं। बता दें कि जिले में करीब 2.72 लाख बिजली उपभोक्ता हैं।
गर्मी के कारण लोड लगातार बढ़ रहा है। ट्रांसफॉर्मर और अन्य उपकरणों के गर्म होने या फाल्ट होने की स्थिति में शटडाउन लेकर काम किया जाता है। हसायन व सिकंदराराऊ सब स्टेशन को अलीगढ़ से आपूर्ति मिलती है। सासनी सब स्टेशन भी नॉन टीटीजेड में है, इन तीनों में कंट्रोल रूम से इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है।
-अजीत कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, हाथरस।
सबसे खराब स्थिति नॉन-टीटीजेड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सासनी, हसायन और सिकंदराराऊ विद्युत उपकेंद्रों की है, जहां रात के समय कंट्रोल रूम से पांच-पांच घंटे तक बिजली कटौती कराई जा रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रात में केवल तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है, जिससे गर्मी में राहत नहीं मिल रही।
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वहीं, टीटीजेड क्षेत्र में शामिल मीतई, सादाबाद, बामौली और ओढ़पुरा उपकेंद्रों की स्थिति कुछ बेहतर है, लेकिन यहां भी ओवरलोडिंग के कारण ट्रिपिंग की समस्या है। ट्रांसफार्मरों के अधिक गर्म होने से फ्यूज उड़ रहे हैं, जिससे बार-बार आपूर्ति बाधित हो रही है। बिजली कटौती और ट्रिपिंग से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। रात में बिजली न मिलने से लोगों की नींद खराब हो रही है, वहीं किसानों को सिंचाई कार्यों में भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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बिजली विभाग के अनुसार जिले के कुल सात सब स्टेशनों में से हसायन और सिकंदराराऊ को अलीगढ़ ट्रांसमिशन से बिजली आपूर्ति मिलती है, जबकि सातों सब स्टेशन का संचालन हाथरस वितरण खंड के माध्यम से किया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्र का तय रोस्टर
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति का निर्धारित रोस्टर 18 घंटे, जबकि कृषि ट्यूबवेलों के लिए 10 घंटे तय है। नॉन-टीटीजेड क्षेत्रों में रूटीन रोस्टर को दो भागों में बांटा गया है। ग्रुप ए में सुबह 7:30 बजे से 11:00 बजे तक और दोपहर 1:30 बजे से 4:00 बजे तक बिजली बाधित रहती है। ग्रुप बी में सुबह 5:15 बजे से 8:15 बजे तक और 10:30 बजे से 1:30 बजे तक आपूर्ति रोकी जाती है।
758 एमवीए क्षमता पर 331 मेगावॉट का दबाव
जनपद में कुल 65 बिजलीघर और उनसे जुड़े 125 पावर ट्रांसफार्मर हैं। हैरत की बात यह है कि जनपद में 758 एमवीए क्षमता वाले उपकरण होने के बाद भी मात्र 331 मेगावॉट की मांग पर ही कस्बे व देहात के ट्रांसफॉर्मर हांफ रहे है। मांग से कहीं अधिक क्षमता होने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। विद्युत सब स्टेशनों और फीडर से निकलने वाली आपूर्ति फाल्ट आदि के कारण बार-बार बाधित हो रही है। ऐसे में विद्युत विभाग के बिजनेस प्लान के तहत हुए उच्चीकरण कार्य पर भी प्रश्रचिन्ह खड़े हो रहे हैं। बता दें कि जिले में करीब 2.72 लाख बिजली उपभोक्ता हैं।
गर्मी के कारण लोड लगातार बढ़ रहा है। ट्रांसफॉर्मर और अन्य उपकरणों के गर्म होने या फाल्ट होने की स्थिति में शटडाउन लेकर काम किया जाता है। हसायन व सिकंदराराऊ सब स्टेशन को अलीगढ़ से आपूर्ति मिलती है। सासनी सब स्टेशन भी नॉन टीटीजेड में है, इन तीनों में कंट्रोल रूम से इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है।
-अजीत कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, हाथरस।