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Kanpur News: चार दिन की मासूम को लेकर पांच अस्पताल भटका, नहीं बची जान
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- हमीरपुर का रहने वाला है किसान परिवार, कानपुर और लखनऊ तक चक्कर काटने के बाद मिली मायूसी
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टाॅप बाक्स
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
कानपुर। हमीरपुर के नारायणनगर निवासी किसान इंद्रबाबू पोती की जान बचाने के लिए कानपुर से लखनऊ तक भटके। इस दाैरान उन्होंने पांच अस्पतालों की चाैखट पर गुहार लगाई। इसके बावजूद वह जान बचाने में नाकाम रहे।
चकेरी स्थित जेके चौराहे के फ्लाईओवर के नीचे पोती को सीने से चिपकाए बैठे इंद्रबाबू ने बताया कि बच्ची का जन्म 28 मई की सुबह निजी अस्पताल में हुआ था। जन्म के बाद ही मासूम की सांसें उखड़ने लगीं। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और भर्ती कराया। आरोप है कि 29 और 30 मई को डॉक्टर इलाज के बजाय टालमटोल करते रहे। बाद में बताया कि बच्ची की खाने की नली में गंभीर समस्या है और उसका इलाज यहां संभव नहीं है। इसके बाद उसे हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। उसके पिता मनोज और चाचा शुभम के साथ हैलट लेकर पहुंचे।
इंद्रबाबू ने बताया कि डॉक्टरों ने बच्ची को तुरंत हटाने को कह दिया। दलील दी कि बच्ची से अन्य बच्चों को संक्रमण फैल जाएगा। एंबुलेंस का किराया और बची-खुची पूंजी समेटकर लखनऊ भागे। केजीएमयू में पर्चा बनवाया और भर्ती कराने पहुंचे तो जवाब मिला कि वेंटिलेटर खाली नहीं है वापस ले जाओ। उसे लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए। वहां भी समस्या जानने के बाद कहा गया कि विशेषज्ञ नहीं है एसजीपीजीआई ले जाओ। पीजीआई पहुंचे तो कहा गया कि यहां इस तरह के ऑपरेशन की तत्काल व्यवस्था नहीं है छह महीने बाद लेकर आना। चारों तरफ से निराश होकर हमीरपुर के लिए निकले लेकिन रास्ते में कानपुर के जेके चौराहे पर आकर हिम्मत ने साथ छोड़ दिया और फ्लाईओवर के नीचे जमीन पर ही बैठ गए। सोमवार को ही वह उसे लेकर हमीरपुर पहुंचे जहां बच्ची की मौत हो गई।
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इस तरह का मामला पता चला है। हम भी जांच कर रहे हैं कि बच्ची कब आई थी। अभी कुछ पता नहीं चला है। हमारे यहां दो पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आरके त्रिपाठी और डॉ. श्रद्धा वर्मा हैं। सर्जरी भी बच्चों की इस तरह की होती है। हम जांच कर रहे हैं कि बच्ची कब आई थी। - डॉ. शैलेंद्र गौतम, विभागाध्यक्ष बाल रोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
कानपुर। हमीरपुर के नारायणनगर निवासी किसान इंद्रबाबू पोती की जान बचाने के लिए कानपुर से लखनऊ तक भटके। इस दाैरान उन्होंने पांच अस्पतालों की चाैखट पर गुहार लगाई। इसके बावजूद वह जान बचाने में नाकाम रहे।
चकेरी स्थित जेके चौराहे के फ्लाईओवर के नीचे पोती को सीने से चिपकाए बैठे इंद्रबाबू ने बताया कि बच्ची का जन्म 28 मई की सुबह निजी अस्पताल में हुआ था। जन्म के बाद ही मासूम की सांसें उखड़ने लगीं। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और भर्ती कराया। आरोप है कि 29 और 30 मई को डॉक्टर इलाज के बजाय टालमटोल करते रहे। बाद में बताया कि बच्ची की खाने की नली में गंभीर समस्या है और उसका इलाज यहां संभव नहीं है। इसके बाद उसे हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। उसके पिता मनोज और चाचा शुभम के साथ हैलट लेकर पहुंचे।
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इंद्रबाबू ने बताया कि डॉक्टरों ने बच्ची को तुरंत हटाने को कह दिया। दलील दी कि बच्ची से अन्य बच्चों को संक्रमण फैल जाएगा। एंबुलेंस का किराया और बची-खुची पूंजी समेटकर लखनऊ भागे। केजीएमयू में पर्चा बनवाया और भर्ती कराने पहुंचे तो जवाब मिला कि वेंटिलेटर खाली नहीं है वापस ले जाओ। उसे लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए। वहां भी समस्या जानने के बाद कहा गया कि विशेषज्ञ नहीं है एसजीपीजीआई ले जाओ। पीजीआई पहुंचे तो कहा गया कि यहां इस तरह के ऑपरेशन की तत्काल व्यवस्था नहीं है छह महीने बाद लेकर आना। चारों तरफ से निराश होकर हमीरपुर के लिए निकले लेकिन रास्ते में कानपुर के जेके चौराहे पर आकर हिम्मत ने साथ छोड़ दिया और फ्लाईओवर के नीचे जमीन पर ही बैठ गए। सोमवार को ही वह उसे लेकर हमीरपुर पहुंचे जहां बच्ची की मौत हो गई।
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इस तरह का मामला पता चला है। हम भी जांच कर रहे हैं कि बच्ची कब आई थी। अभी कुछ पता नहीं चला है। हमारे यहां दो पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आरके त्रिपाठी और डॉ. श्रद्धा वर्मा हैं। सर्जरी भी बच्चों की इस तरह की होती है। हम जांच कर रहे हैं कि बच्ची कब आई थी। - डॉ. शैलेंद्र गौतम, विभागाध्यक्ष बाल रोग