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Kanpur News: ओटीपी के जरिये ऑनलाइन आंदोलन को हवा देने की आशंका
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कानपुर। अवैध तरीके से सिम के ओटीपी लेकर सोशल मीडिया अकाउंट से ऑनलाइन आंदोलन को हवा देने की आशंका है। यह जानकारी कमिश्नरी पुलिस की एसआईटी की प्रारंभिक जांच से सामने आई है। सोशल मीडिया कॉल और प्रतिक्रियाओं की जांच से उनके वीपीएन नंबर पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब, सिंगापुर के मिले हैं। एसआईटी ने सिम के ओटीपी दिए जाने की संख्या और घटनाक्रमों का मिलान शुरू कर दिया है। कई पुराने ट्रोल को देखा जा रहा है।
पश्चिम जोन की साइबर सेल और पनकी पुलिस ने कॉल सेंटर चलाकर सिम के पासवर्ड देने में शनिवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 12383 सिम कार्ड, 40 की पैड मोबाइल और अन्य सामान मिले थे। सिम कार्ड में से 50 फीसदी एक्टिव थे। इन्हें टेलीग्राम ग्रुप के जरिये सक्रिय सदस्यों को बेचा जाता था। इनकी अवधि तीन महीने की रहती थी। कई बार ग्रुप में बड़ी संख्या में ओटीपी दिए गए हैं जिसमें 250 से 300 सिम कार्ड शामिल हैं। एक ओटीपी की कीमत 600 रुपये थी। पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर किसी भी घटना और मामले को ट्रोल कराते हैं। इसका सबसे अधिक युवाओं पर पड़ता है। वह भी अपनी प्रतिक्रियाएं देकर मामले को हवा देते हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भारत ही नहीं पड़ोसी देशों में किसी घटना, राजनैतिक बदलाव, बड़ी कार्रवाई पर ऑनलाइन आंदोलन को हवा देने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट का सहारा लिया जाता है। साइबर अपराधी और नेटीजन उस घटना के पक्ष या विपक्ष में अपनी राय देकर बहस छेड़ देते हैं। उनके साथ हजारों की संख्या में फॉलोवर्स अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू करते हैं और यह तेजी से ट्रोल होता है। उनका लक्ष्य युवाओं को ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं में शामिल करना रहता है। युवाओं की प्रतिक्रियाओं की वजह से और लोग भी जुड़ते जाते हैं। कई बार प्रदर्शन भी शुरू हो जाते हैं।
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ऑनलाइन बनी कॉकरोच पार्टी को ट्रोल कराने में पाकिस्तान और अन्य देशों के शातिरों का हाथ बताया जा रहा है। एसआईटी जांच कर रही है कि जिस समय युवा अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे थे, उस समय कितने सिम के ओटीपी जारी हुए हैं। उससे एसआईटी को संभावित डेटा मिलने का अनुमान है। कई लोगों ने प्रतिक्रियाएं फर्जी अकाउंट से लैपटॉप व डेस्कटॉप कंप्यूटर से दिए हैं, जिससे उनकी और जानकारी नहीं मिल पा रही है।
एसआईटी ने सिम कार्ड के ओटीपी देकर सोशल मीडिया अकाउंट खुलवाने के मामले की जांच शुरू कर दी है। इन अकाउंट से प्रतिक्रियाएं देकर शातिरों के ऑनलाइन आंदोलन को हवा देने की आशंका है।
- रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर
पश्चिम जोन की साइबर सेल और पनकी पुलिस ने कॉल सेंटर चलाकर सिम के पासवर्ड देने में शनिवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 12383 सिम कार्ड, 40 की पैड मोबाइल और अन्य सामान मिले थे। सिम कार्ड में से 50 फीसदी एक्टिव थे। इन्हें टेलीग्राम ग्रुप के जरिये सक्रिय सदस्यों को बेचा जाता था। इनकी अवधि तीन महीने की रहती थी। कई बार ग्रुप में बड़ी संख्या में ओटीपी दिए गए हैं जिसमें 250 से 300 सिम कार्ड शामिल हैं। एक ओटीपी की कीमत 600 रुपये थी। पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर किसी भी घटना और मामले को ट्रोल कराते हैं। इसका सबसे अधिक युवाओं पर पड़ता है। वह भी अपनी प्रतिक्रियाएं देकर मामले को हवा देते हैं।
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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भारत ही नहीं पड़ोसी देशों में किसी घटना, राजनैतिक बदलाव, बड़ी कार्रवाई पर ऑनलाइन आंदोलन को हवा देने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट का सहारा लिया जाता है। साइबर अपराधी और नेटीजन उस घटना के पक्ष या विपक्ष में अपनी राय देकर बहस छेड़ देते हैं। उनके साथ हजारों की संख्या में फॉलोवर्स अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू करते हैं और यह तेजी से ट्रोल होता है। उनका लक्ष्य युवाओं को ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं में शामिल करना रहता है। युवाओं की प्रतिक्रियाओं की वजह से और लोग भी जुड़ते जाते हैं। कई बार प्रदर्शन भी शुरू हो जाते हैं।
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एसआईटी ने सिम कार्ड के ओटीपी देकर सोशल मीडिया अकाउंट खुलवाने के मामले की जांच शुरू कर दी है। इन अकाउंट से प्रतिक्रियाएं देकर शातिरों के ऑनलाइन आंदोलन को हवा देने की आशंका है।
- रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर