ललितपुर। एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। दो सगे भाई और एक चचेरा भाई एक साथ इस दुनिया से चले गए। सोमवार की रात पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे। जैसे ही शव गांव पहुंचे, चारों तरफ सन्नाटा छा गया। घरों में बस रोने-चिल्लाने की आवाजें गूंज रही थीं।
25 की सुबह कार और बाई की आमने-सामने भिड़ंत में बड़ा हादसा हुआ। जिसमें तीन भाईयों जसरथ (40), नाथूराम (42) समेत जगदीश (36) निवासी लड़वारी की मौत हो गई थी। मंगलवार को शव घर पर आते ही महिलाएं शवों से लिपट-लिपट कर फूट-फूट कर रोने लगी। छोटे-छोटे बच्चे अपनी मासूमियत में दहाड़ मारकर रो रहे थे। कोई समझा भी नहीं पा रहा था कि इतनी बड़ी मुसीबत कैसे आ गई। गांव की अन्य महिलाएं और रिश्तेदार आंसू पोछते हुए सबको सांत्वना दे रहे थे। मां-बहनों के कराहने की आवाज सुनकर पत्थर दिल भी पसीज जाता।शाम होते-होते गांव से बाहर खेतों में तीनों भाइयों की चिताएं एक साथ सजाई गईं। लकड़ियां रखी गईं, घी और कपूर डाला गया। जब आग लगाई गई तो एक साथ तीनों चिताएं जलने लगीं। उस वक्त मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। हर किसी के आंखों आंसू छलक उठे। तीन भाई जो जीवन भर साथ खेले, साथ लड़े और साथ हंसे, आज आखिरी सफर पर भी साथ ही जा रहे थे। गांव के बुजुर्ग कह रहे थे कि भाईयों का साथ मौत के बाद भी नहीं टूटा। परिजनों का दर्द देखकर आस-पास के गांवों के लोग भी पहुंच गए। पूरा इलाका गमगीन था।