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वृषभान गोप के बाजत आज बधाई
अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 09 Sep 2016 12:20 AM IST
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लाड़िलीजी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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वृषभान गोप के बाजत आज बधाई। श्रीजी के गांव में आज बधाई की वेला है। बरसाना जग के पालनहार की प्रिया और अपनी दुलारी राधा के लिए सज गया। विश्व प्रसिद्ध लाड़िलीजी मंदिर में आज राधारानी का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
बता दें कि श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव के बाद भाद्रपद कृष्ण एकादशी से ही बरसाना में श्रीराधाजन्म महोत्सव का शुभारंभ हो जाता है। आयोजन राधाष्टमी के दिन संध्या को पूर्ण होते हैं। इस दौरान बरसाना और नंदगांव के गोस्वामी समाज द्वारा संयुक्त बधाई गायन की अनुपम छटा सप्तमी और अष्टमी को देखने और सुनने को मिलती है। लाड़िलीजी मंदिर के रिसीवर डा. कृष्ण मुरारी गोस्वामी ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को वनखंडी सेठ के परिवार की चाव आने के बाद रात्रि को श्रीजी महल में भजन संध्या और जच्चा-बच्चा के पद गाए गए।
शुक्रवार नौ सितंबर को भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के अवसर पर कीरतनंदिनी के जन्म से साथ ही ब्रजाचार्य नारायन भट्ट द्वारा प्रकट विग्रह को चांदी की चौकी और रजत पात्र में विराजमान कर सवामन दूध, सवामन दही, शहद ,बूरा 27 पेड़ों की पत्तियां, 27 जगह की ब्रजरज, 27 कुओं के जल, सप्त अनाज, सात मेवा, सात फल आदि से अभिषेक किया जाएगा। आचार्यगण वेद मंत्रों के साथ नवग्रह का आह्वान करेंगे। अंत में गंगाजल से स्नान के बाद राई नौन उतार कर दृष्टि दोष दूर किया जाएगा। तड़के करीब चार बजे से अभिषेक के बाद सुबह छह बजे स्वर्ण थाल से मंगला आरती होगी।
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सह रिसीवर मदनमोहन गोस्वामी ने बताया कि ब्रज में नवजात शिशुओं के मंगल के लिए सांतिया रखने की परंपरा है। श्रीजी के जन्म के बाद मंदिर की दीवार पर सांतिया अंकित किए जाएंगे। नंदगांव से बधाई आने के बाद संयुक्त समाज गायन होगा।
मूल नक्षत्र में जन्म से कहलाईं मूलो
मान्यता है कि श्रीजी का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था। मंदिर रिसीवर के अनुसार विष्णु पुराण में वर्णित प्रक्रिया से लाड़ली जू का जन्म अभिषेक और मूल शांति पूजा होती है। मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण श्रीजी के सहस्त्र नामों में से एक नाम मूलो भी है। मूल शांति के कारण सप्तमी की रात्री में वैमाता, नवग्रह, गणेश, वरुण, वेदी, गृह शांति हवन आदि भी किए जाते हैं। राधाष्टमी के दिन श्रीजी डोले में विराजमान होकर महल के नीचे छतरी में पधारती हैं। इस दौरान भक्तों को समीप से उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। रिसीवर के अनुसार वर्ष में तीन बार राधाष्टमी, हरियाली तीज और धूलहोली पर ही डोले का छतरी में आगमन होता है। इन्हीं अवसरों पर आरती का सौभाग्य सेवायतों की बालिकाओं को प्राप्त होता है।
श्रीकृष्ण ने भी की उपासना
मंदिर सेवायत रासबिहारी गोस्वामी बताते हैं कि ब्रज में बरसाना किशोरी जू के पिता वृषभान बाबा की राजधानी रही। द्वापर में बरसाना का नाम वृषभान के नाम पर वृषभानपुर पड़ा। कालांतर में यह बरसाना नाम से विख्यात हुआ। रावल और बरहाना (कोसीकलां के समीप बसे गांव) भी वृषभान की राजधानी रहे। ग्रन्थों में वर्णन है कि ‘अन्याराधितों नूनं भगवान हरिरीश्वरा’, अर्थात श्रीकृष्ण ने जिनकी आराधना और उपासना की है, वहीं श्री राधे हैं। उन्होंने बताया कि श्रीराधे जू का जन्म महोत्सव बरसाना के साथ साथ ब्रज क्षेत्र का प्रधान उत्सव है। बरसाना में राधाष्टमी से प्रारंभ हुए उत्सवों का समापन बूढ़ी लीला समापन के बाद होगा। नवमी को मोरकुटी पर लड्डू लीला, दसवीं को विलासगढ़ की लीला, एकादशी को सांकरी खोर की चुटिया बंधन लीला, गाजीपुर में डोंगा लीला, द्वादशी को ऊंचागांव का ब्याहुला और त्रयोदशी को सांकरी खोर मटकी लीला होगी।
हर ओर उत्सव सा माहौल
ब्रह्मगिरि पर्वत पर राधाजी के जन्म का उल्लास है। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु ‘बरसाने बजी है बधाई रानी कीरत ने लाली जाई’ पदों पर थिरक रहे हैं। बाबा बृषभान की दहलीज पर राधे जन्म की किलकारी सुनने के लिए भक्त कान लगाए रहे। सखियां खुशियों में झूम रही हैं। गुरुवार को लाड़िलीजी के दर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। शाम ढलने के बाद से श्रद्धालु भोर का इंतजार करते रहे। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने बरसाना में लघु भारत प्रतीत हो रहा है।
नंदगांव से आई बधाई
राधारानी की नगरी में सखी भाव के प्रवेश मिलने के कारण हजारों की संख्या में नर और नारी सखी बनके बधाई मांगते घूम रहे हैं। सखियों का शृंगार अनुपम है। मुंबई से आई कृष्ण प्रिया सखी ने बताया हमने जो साड़ी पहन रखी है वह गौने में मिली थी। यह साड़ी हमनै जयपुर तै लई है और आज बधाई में या साड़ी कूं फहराए के वृषभान बाबा तै बधाई मांगवे आई हूं। लाली के जन्म की सुनके बरसानेवासी खुशी में पागल है। सजधज के बरसाने के बिहारी सेठ बगीचा में आए।
ऐसा लग रहा है कि सारा नंदगांव आज भानु बाबा के गांव आ गया है। सेठजी भानु बाबा की बधाई स्वरूप पर्ची बांट रहे हैं। लाड़िलीजी मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया। बाबा नंद के गांव से नंद और यशोदाजी की तरफ से नंदगांव वासी बधाई देने पहुंचे। मंदिर में फूल बंगला और छप्पन भोग के दर्शनों का आयोजन हुआ। बरसानावासियों ने भांग ठंडाई और प्रसाद देकर स्वागत किया।
बता दें कि श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव के बाद भाद्रपद कृष्ण एकादशी से ही बरसाना में श्रीराधाजन्म महोत्सव का शुभारंभ हो जाता है। आयोजन राधाष्टमी के दिन संध्या को पूर्ण होते हैं। इस दौरान बरसाना और नंदगांव के गोस्वामी समाज द्वारा संयुक्त बधाई गायन की अनुपम छटा सप्तमी और अष्टमी को देखने और सुनने को मिलती है। लाड़िलीजी मंदिर के रिसीवर डा. कृष्ण मुरारी गोस्वामी ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को वनखंडी सेठ के परिवार की चाव आने के बाद रात्रि को श्रीजी महल में भजन संध्या और जच्चा-बच्चा के पद गाए गए।
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सह रिसीवर मदनमोहन गोस्वामी ने बताया कि ब्रज में नवजात शिशुओं के मंगल के लिए सांतिया रखने की परंपरा है। श्रीजी के जन्म के बाद मंदिर की दीवार पर सांतिया अंकित किए जाएंगे। नंदगांव से बधाई आने के बाद संयुक्त समाज गायन होगा।
मूल नक्षत्र में जन्म से कहलाईं मूलो
मान्यता है कि श्रीजी का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था। मंदिर रिसीवर के अनुसार विष्णु पुराण में वर्णित प्रक्रिया से लाड़ली जू का जन्म अभिषेक और मूल शांति पूजा होती है। मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण श्रीजी के सहस्त्र नामों में से एक नाम मूलो भी है। मूल शांति के कारण सप्तमी की रात्री में वैमाता, नवग्रह, गणेश, वरुण, वेदी, गृह शांति हवन आदि भी किए जाते हैं। राधाष्टमी के दिन श्रीजी डोले में विराजमान होकर महल के नीचे छतरी में पधारती हैं। इस दौरान भक्तों को समीप से उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। रिसीवर के अनुसार वर्ष में तीन बार राधाष्टमी, हरियाली तीज और धूलहोली पर ही डोले का छतरी में आगमन होता है। इन्हीं अवसरों पर आरती का सौभाग्य सेवायतों की बालिकाओं को प्राप्त होता है।
श्रीकृष्ण ने भी की उपासना
मंदिर सेवायत रासबिहारी गोस्वामी बताते हैं कि ब्रज में बरसाना किशोरी जू के पिता वृषभान बाबा की राजधानी रही। द्वापर में बरसाना का नाम वृषभान के नाम पर वृषभानपुर पड़ा। कालांतर में यह बरसाना नाम से विख्यात हुआ। रावल और बरहाना (कोसीकलां के समीप बसे गांव) भी वृषभान की राजधानी रहे। ग्रन्थों में वर्णन है कि ‘अन्याराधितों नूनं भगवान हरिरीश्वरा’, अर्थात श्रीकृष्ण ने जिनकी आराधना और उपासना की है, वहीं श्री राधे हैं। उन्होंने बताया कि श्रीराधे जू का जन्म महोत्सव बरसाना के साथ साथ ब्रज क्षेत्र का प्रधान उत्सव है। बरसाना में राधाष्टमी से प्रारंभ हुए उत्सवों का समापन बूढ़ी लीला समापन के बाद होगा। नवमी को मोरकुटी पर लड्डू लीला, दसवीं को विलासगढ़ की लीला, एकादशी को सांकरी खोर की चुटिया बंधन लीला, गाजीपुर में डोंगा लीला, द्वादशी को ऊंचागांव का ब्याहुला और त्रयोदशी को सांकरी खोर मटकी लीला होगी।
हर ओर उत्सव सा माहौल
ब्रह्मगिरि पर्वत पर राधाजी के जन्म का उल्लास है। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु ‘बरसाने बजी है बधाई रानी कीरत ने लाली जाई’ पदों पर थिरक रहे हैं। बाबा बृषभान की दहलीज पर राधे जन्म की किलकारी सुनने के लिए भक्त कान लगाए रहे। सखियां खुशियों में झूम रही हैं। गुरुवार को लाड़िलीजी के दर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। शाम ढलने के बाद से श्रद्धालु भोर का इंतजार करते रहे। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने बरसाना में लघु भारत प्रतीत हो रहा है।
नंदगांव से आई बधाई
राधारानी की नगरी में सखी भाव के प्रवेश मिलने के कारण हजारों की संख्या में नर और नारी सखी बनके बधाई मांगते घूम रहे हैं। सखियों का शृंगार अनुपम है। मुंबई से आई कृष्ण प्रिया सखी ने बताया हमने जो साड़ी पहन रखी है वह गौने में मिली थी। यह साड़ी हमनै जयपुर तै लई है और आज बधाई में या साड़ी कूं फहराए के वृषभान बाबा तै बधाई मांगवे आई हूं। लाली के जन्म की सुनके बरसानेवासी खुशी में पागल है। सजधज के बरसाने के बिहारी सेठ बगीचा में आए।
ऐसा लग रहा है कि सारा नंदगांव आज भानु बाबा के गांव आ गया है। सेठजी भानु बाबा की बधाई स्वरूप पर्ची बांट रहे हैं। लाड़िलीजी मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया। बाबा नंद के गांव से नंद और यशोदाजी की तरफ से नंदगांव वासी बधाई देने पहुंचे। मंदिर में फूल बंगला और छप्पन भोग के दर्शनों का आयोजन हुआ। बरसानावासियों ने भांग ठंडाई और प्रसाद देकर स्वागत किया।