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अच्छी पहल: दो महीने में प्लांट लगाकर ऑक्सीजन बनाएंगी चीनी मिलें, पढ़िए अमर उजाला की ये खास रिपोर्ट
अमर उजाला नेटवर्क, राजदीप जाखड़, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Tue, 11 May 2021 03:12 PM IST
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सार
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के लिए मारामारी है। विश्व में सर्वाधिक उत्पादन करने के बाद भी देश में ऑक्सीजन का संकट है।
ऑक्सीजन प्लांट
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के लिए मारामारी है। विश्व में सर्वाधिक उत्पादन करने के बाद भी देश में ऑक्सीजन का संकट है। देशवासियों को इस संकट से उबारने के लिए अब शुगर इंडस्ट्री सामने आई है।
गन्ना एवं चीनी विकास आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी की अपील पर निजी क्षेत्र की मिलों ने भी प्लांट स्थापना के लिए कवायद शुरू कर दी है। कोई देश में ही निर्मित प्लांट मंगा रहा है तो कोई विदेश से प्लांट आयात कर रहा है। मेरठ मंडल की चार शुगर मिल प्लांट लगाने जा रही हैं। अगले डेढ़ से दो महीने में इन मिलों के प्लांट ऑक्सीजन उगलना शुरू कर देंगे।
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सरकार ने ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए शुगर इंडस्ट्री से गुहार लगाई है। इसके साथ ही गन्ना विभाग निगम और सहकारी क्षेत्र की उन मिलों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद में जुटा है जिन मिलों में पहले से ही एथनॉल का उत्पादन किया जा रहा है। मेरठ की दौराला शुगर मिल ने सीएचसी दौराला पर प्लांट लगाने की कार्ययोजना पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए मिल प्लांट की मशीनरी का आयात कर रही है। मिल प्रबंधन का दावा है कि अगले एक से डेढ़ महीने में प्लांट स्थापित कर दिया जाएगा। मवाना ग्रुप भी सीएचसी की तलाश में जुटा है। मवाना सीएचसी हाथ से निकलने के बाद अब ग्रुप की नजर माछरा और खरखौदा सीएचसी पर है। इसके लिए जल्द ही डीएम से बात कर कार्रवाई शुरू की जाएगी। हापुड़ की सिंभावली मिल भी ऑक्सीजन प्लांट लगा रही है।
गाजियाबाद जनपद स्थित मोदी ग्रुप की मोदीनगर शुगर मिल भी पांच साल से बंद पड़े अपने ऑक्सीजन प्लांट को फिर से चालू करने का प्रयास कर रही है। मिल प्रबंधन सूत्रों के मुताबिक, मिल मालिक एनके मोदी जल्द ही जिलाधिकारी गाजियाबाद से मुलाकात कर प्लांट को चालू करने की दिशा में काम करेंगे।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ऑक्सीजन प्लांट को तुरंत देगा एनओसी
सरकार ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण विभाग को ऑक्सीजन प्लांट के लिए तुरंत एनओसी जारी करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि ऑक्सीजन उत्पादित करने जा रही औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी मानकों को पूरा करना होगा। इच्छुक उद्योगों को विभाग के निवेश मित्र पोर्टल पर आवेदन करना होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि राज्य की कोई भी नई और मौजूदा औद्योगिक इकाई ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कर सकती है और मौजूदा ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी भी कर सकती है।
ऑक्सीजन की कमी होगी दूर
सरकार की पहल पर शुगर इंडस्ट्री ऑक्सीजन उत्पादन क्षेत्र में आगे आई है। डेढ़ से दो महीने में सभी मिलों का प्लांट स्थापित हो जाएगा। फिर ऑक्सीजन की कमी दूर हो जाएगी। - राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र
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