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Meerut News: वृद्धा का कंकाल खेत में मिला
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- भैंसा निवासी महिला 11 जून से लापता था
- परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से किया इंकार
संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना। गांव भैंसा निवासी रफीकन ( 85) 11 जून से लापता थी। मंगलवार आज सुबह रफीकन के शरीर का कंकाल खेत में मिला। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही दफना दिया।
गांव भैंसा के मूल निवासी हाल लोहियानगर मेरठ निवासी आस मोहम्मद ने 13 जून को मवाना थाने में तहरीर दी थी। जिसमें बताया था कि उनकी मां रफीकन (85) गांव में अकेली रहती थी। वह 11 जून की सुबह 9 बजे से लापता है। काफी तलाशने के बाद भी कोई पता नहीं चल सका है। तहरीर में अनहोनी की आशंका व्यक्त की थी।
महिला के पौत्र फराज ने बताया कि लापता होने के बाद से ही दादी की लगातार तलाश कर रहे थे। मंगलवार को आठ-दस लोग उनकी तलाश में जंगल में निकले तो एक खेत से बदबू आती महसूस हुई। पास जाकर देखा तो कंकाल पड़ा था। कपड़े, चप्पल और पहने कड़े से उसकी पहचान दादी रफीकन हुई। फराज ने बताया कि दिमागी रूप से कमजोर थी और कई बार घर तक भूल जाती थी। आशंका है कि वे जंगल की ओर निकल गई और वापस आना भूल गई, किसी जंगली जानवर ने उन पर हमला किया होगा, जिसमें मौत हो गई। क्योंकि शरीर के कुछ हिस्से ऐसे थे जैसे किसी जानवर ने खा रखे हों। पोस्टमार्टम नहीं कराया।
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सीओ पंकज लवानिया का कहना है कि वृद्धा को भूलने की आदत थी, कई दिन से लापता थी। आज शव मिला। परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराया। जिसके बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर शव परिजनों को सौंप दिया।
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- परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से किया इंकार
संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना। गांव भैंसा निवासी रफीकन ( 85) 11 जून से लापता थी। मंगलवार आज सुबह रफीकन के शरीर का कंकाल खेत में मिला। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही दफना दिया।
गांव भैंसा के मूल निवासी हाल लोहियानगर मेरठ निवासी आस मोहम्मद ने 13 जून को मवाना थाने में तहरीर दी थी। जिसमें बताया था कि उनकी मां रफीकन (85) गांव में अकेली रहती थी। वह 11 जून की सुबह 9 बजे से लापता है। काफी तलाशने के बाद भी कोई पता नहीं चल सका है। तहरीर में अनहोनी की आशंका व्यक्त की थी।
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महिला के पौत्र फराज ने बताया कि लापता होने के बाद से ही दादी की लगातार तलाश कर रहे थे। मंगलवार को आठ-दस लोग उनकी तलाश में जंगल में निकले तो एक खेत से बदबू आती महसूस हुई। पास जाकर देखा तो कंकाल पड़ा था। कपड़े, चप्पल और पहने कड़े से उसकी पहचान दादी रफीकन हुई। फराज ने बताया कि दिमागी रूप से कमजोर थी और कई बार घर तक भूल जाती थी। आशंका है कि वे जंगल की ओर निकल गई और वापस आना भूल गई, किसी जंगली जानवर ने उन पर हमला किया होगा, जिसमें मौत हो गई। क्योंकि शरीर के कुछ हिस्से ऐसे थे जैसे किसी जानवर ने खा रखे हों। पोस्टमार्टम नहीं कराया।
सीओ पंकज लवानिया का कहना है कि वृद्धा को भूलने की आदत थी, कई दिन से लापता थी। आज शव मिला। परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराया। जिसके बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर शव परिजनों को सौंप दिया।