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Meerut News: पुलिस ने जेई व चालक को एक लाख की रिश्वत के मामले में जेल भेजा
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-आरोपी जेई ने ठेकेदार से बिल पास कराने के नाम पर मांगी थी रिश्वत
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेडिकल थाना क्षेत्र में एंटी करप्शन की टीम ने मंगलवार को एक लाख की रिश्वत लेते उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के जूनियर इंजीनियर गजरौला निवासी योगेंद्र सिंह व उनके चालक भावनपुर निवासी नीरज को पकड़ लिया था। बुधवार को पुलिस ने आरोपियों को भ्रष्टाचार अधिनियम न्यायालय में पेश कर दिया। वहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने रिश्वत के पैसे भी न्यायालय में जमा कर दिए। आरोपी जेई ने बिल के भुगतान के नाम पर ठेकेदार से एक लाख की मांग की थी। एंटी करप्शन निरीक्षक योगेंद्र कुमार की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई है।
गंगानगर निवासी ठेकेदार सतेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि उनकी चौधरी एसोसिएट नाम से फर्म है। वर्ष 2020 में उनकी फर्म को बागपत स्थित राजा मिहिर भोज डिग्री कॉलेज, बेगमाबाद पाबला में निर्माण कार्य का ठेका मिला था। करीब 8.50 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का कार्य वर्ष 2023 में पूरा हो गया था। काम पूरा होने के बाद उन्होंने विभाग में भुगतान की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन उनका भुगतान नहीं हुआ। आरोपी जेई ने 25 लाख के बिल पास करने के नाम पर 1.70 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में एक लाख रुपये में दोनों के बीच बात तय हुई थी। एंटी करप्शन प्रभारी दुर्गेश कुमार का कहना है कि आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेडिकल थाना क्षेत्र में एंटी करप्शन की टीम ने मंगलवार को एक लाख की रिश्वत लेते उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के जूनियर इंजीनियर गजरौला निवासी योगेंद्र सिंह व उनके चालक भावनपुर निवासी नीरज को पकड़ लिया था। बुधवार को पुलिस ने आरोपियों को भ्रष्टाचार अधिनियम न्यायालय में पेश कर दिया। वहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने रिश्वत के पैसे भी न्यायालय में जमा कर दिए। आरोपी जेई ने बिल के भुगतान के नाम पर ठेकेदार से एक लाख की मांग की थी। एंटी करप्शन निरीक्षक योगेंद्र कुमार की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई है।
गंगानगर निवासी ठेकेदार सतेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि उनकी चौधरी एसोसिएट नाम से फर्म है। वर्ष 2020 में उनकी फर्म को बागपत स्थित राजा मिहिर भोज डिग्री कॉलेज, बेगमाबाद पाबला में निर्माण कार्य का ठेका मिला था। करीब 8.50 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का कार्य वर्ष 2023 में पूरा हो गया था। काम पूरा होने के बाद उन्होंने विभाग में भुगतान की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन उनका भुगतान नहीं हुआ। आरोपी जेई ने 25 लाख के बिल पास करने के नाम पर 1.70 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में एक लाख रुपये में दोनों के बीच बात तय हुई थी। एंटी करप्शन प्रभारी दुर्गेश कुमार का कहना है कि आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
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