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Moradabad News: शहर में बनेगा आर्टिजन पार्क, नीचे कारखाना-ऊपर होगा घर
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मुरादाबाद। पीतल नगरी के हजारों कारीगरों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त आर्टिजन पार्क विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस परियोजना के तहत कारीगरों को एक ही परिसर में आवास, कार्यस्थल, प्रशिक्षण केंद्र और बच्चों के लिए स्कूल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। भवनों के निचले हिस्से में उत्पादन इकाइयां संचालित होंगी, जबकि ऊपरी मंजिलों पर कारीगरों के रहने की व्यवस्था होगी।
ईपीसीएच (हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद) ने आर्टिजन पार्क का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर लिया है। हाल ही में वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) और ईपीसीएच के साथ हुई बैठक में इस परियोजना पर चर्चा हुई। विकास आयुक्त ने परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर भेजने को कहा है, ताकि इसे केंद्र सरकार की योजनाओं से जोड़ा जा सके।
ईपीसीएच के चेयरमैन नीरज खन्ना ने बताया कि प्रस्ताव में आर्टिजन पार्क को एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) में विकसित करने का सुझाव दिया गया है। एसईजेड में पहले से आवश्यक औद्योगिक बुनियादी ढांचा मौजूद है। यहां पार्क बनने से कारीगर सीधे निर्यात इकाइयों से जुड़ सकेंगे और उत्पादन प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
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गैस की लगाई जाएंगी भट्ठियां, उत्पादों की गुणवत्ता में होगा सुधार
-हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े कारीगर छोटे घरों या किराये के कमरों में रहकर काम करते हैं। उनके पास पर्याप्त कार्यस्थल और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव है। आर्टिजन पार्क बनने से कारीगरों को सुरक्षित आवास, बेहतर कार्य वातावरण और नई तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। आर्टिजन पार्क में गैस की भट्ठियां भी लगाई जाएंगी। इससे धातु गलाने, ढलाई और फिनिशिंग की गुणवत्ता में सुधार होगा। ईंधन की खपत नियंत्रित होने से उत्पादन लागत घटेगी और कारीगरों की आय बढ़ेगी।
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युवाओं के लिए बनेगा प्रशिक्षण केंद्र
आर्टिजन पार्क केवल आवासीय या औद्योगिक परिसर के साथ ही प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां युवाओं को आधुनिक डिजाइन, मशीन संचालन, फिनिशिंग, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। कारीगरों के बच्चों के लिए स्कूल की भी व्यवस्था होगी। इससे नई पीढ़ी का हस्तशिल्प व्यवसाय के प्रति रुझान बढ़ेगा। हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट कमेटी के प्रेसिडेंट नोमान मंसूरी ने बताया कि एसईजेड में आर्टिजन पार्क बनने से कारीगरों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा। आवास, कार्यस्थल और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं एक परिसर में मिलने से उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और हस्तशिल्प उद्योग को भी सीधा लाभ मिलेगा।
ईपीसीएच (हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद) ने आर्टिजन पार्क का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर लिया है। हाल ही में वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) और ईपीसीएच के साथ हुई बैठक में इस परियोजना पर चर्चा हुई। विकास आयुक्त ने परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर भेजने को कहा है, ताकि इसे केंद्र सरकार की योजनाओं से जोड़ा जा सके।
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ईपीसीएच के चेयरमैन नीरज खन्ना ने बताया कि प्रस्ताव में आर्टिजन पार्क को एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) में विकसित करने का सुझाव दिया गया है। एसईजेड में पहले से आवश्यक औद्योगिक बुनियादी ढांचा मौजूद है। यहां पार्क बनने से कारीगर सीधे निर्यात इकाइयों से जुड़ सकेंगे और उत्पादन प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
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गैस की लगाई जाएंगी भट्ठियां, उत्पादों की गुणवत्ता में होगा सुधार
-हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े कारीगर छोटे घरों या किराये के कमरों में रहकर काम करते हैं। उनके पास पर्याप्त कार्यस्थल और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव है। आर्टिजन पार्क बनने से कारीगरों को सुरक्षित आवास, बेहतर कार्य वातावरण और नई तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। आर्टिजन पार्क में गैस की भट्ठियां भी लगाई जाएंगी। इससे धातु गलाने, ढलाई और फिनिशिंग की गुणवत्ता में सुधार होगा। ईंधन की खपत नियंत्रित होने से उत्पादन लागत घटेगी और कारीगरों की आय बढ़ेगी।
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युवाओं के लिए बनेगा प्रशिक्षण केंद्र
आर्टिजन पार्क केवल आवासीय या औद्योगिक परिसर के साथ ही प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां युवाओं को आधुनिक डिजाइन, मशीन संचालन, फिनिशिंग, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। कारीगरों के बच्चों के लिए स्कूल की भी व्यवस्था होगी। इससे नई पीढ़ी का हस्तशिल्प व्यवसाय के प्रति रुझान बढ़ेगा। हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट कमेटी के प्रेसिडेंट नोमान मंसूरी ने बताया कि एसईजेड में आर्टिजन पार्क बनने से कारीगरों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा। आवास, कार्यस्थल और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं एक परिसर में मिलने से उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और हस्तशिल्प उद्योग को भी सीधा लाभ मिलेगा।