{"_id":"6a16080fd4b53048050ba3e3","slug":"upgrade-moradabads-testing-lab-to-international-standards-moradabad-news-c-15-1-mbd1061-911199-2026-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: मुरादाबाद की टेस्टिंग लैब को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपग्रेड करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: मुरादाबाद की टेस्टिंग लैब को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपग्रेड करें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मुरादाबाद। धातु हस्तशिल्प सेवा केंद्र पर हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के निर्यातकों के साथ मंगलवार को केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) अमृत राज ने इंटरएक्टिव सेशन एवं ट्रेड डायलॉग सत्र आयोजित किया। हस्तशिल्प उद्योग से जुड़ी कई चुनौतियों पर चर्चा की गई। यह मुद्दा भी उठा कि पीतलनगरी में टेस्टिंग लैब होने के बावजूद विदेशों में उसकी रिपोर्ट मान्य नहीं होती, दोबारा रिपोर्ट करानी पड़ती है।
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि मेटल क्राफ्ट सिटी के रूप में पहचान बनाने वाला मुरादाबाद देश के महत्वपूर्ण हस्तशिल्प क्लस्टरों में से एक है। इस प्रकार के संवाद नीति समर्थन को मजबूत करने, आधारभूत संरचना में सुधार, निर्यात को बढ़ावा देने के साथ ही इस क्षेत्र से जुड़े कारीगरों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एमएचईए) के अध्यक्ष नवेद उर रहमान ने कहा कि मुरादाबाद में टेस्टिंग लैब होने के बावजूद जब प्रोडक्ट विदेश जाता है तो विदेशी कंपनियां इस लैब की रिपोर्ट को मान्यता नहीं देती। जिसके कारण देश में मौजूद अन्य विदेशी कंपनियों की लैब से दोबारा टेस्टिंग रिपोर्ट लेनी पड़ती है। उन्होंने मांग की- मुरादाबाद में मौजूद लैब को ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। ताकि इसी लैब की रिपोर्ट को सभी देशों में मान्यता मिल सके।
विज्ञापन
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि वर्ष 2024-25 के दौरान कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,123 करोड़ रुपये रहा है। ईपीसीएच सरकार और हस्तशिल्प निर्यातक समुदाय के बीच नियमित संवाद के लिए सार्थक मंच तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री से जुड़े अलग-अलग सेक्टर के मुद्दे उठाए गए। हैंडीक्राफ्ट कम्युनिटी की तरफ से चुनौतियों से निपटने के लिए विभागीय मदद मांगी गई।
सेंट्रल रीजन के कन्वीनर अवधेश अग्रवाल ने कहा कि इस तरह की बातचीत एक्सपोर्टर्स, कारीगरों और इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स की जरूरतों को समझने में बहुत काम आती है। विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) ने उद्यमियों के सुझावों और चिंताओं को सुनकर वस्त्र मंत्रालय की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।
इसके बाद ईपीसीएच की ओर से एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीजीसी) के सहयोग से ईसीजीसी प्रोडक्ट्स एंड रिलीफ स्कीम्स विषय पर एक सेमिनार भी आयोजित किया। जिसमें शाखा प्रबंधक (ईसीजीसी) चिरंतन दत्त ने विभिन्न राहत योजनाओं की जानकारी दी। वाईईएस अध्यक्ष जेपी सिंह, रश्मि दुग्गल, रोहित ढल, सलमान आजम, जीशान अली, नजमुल इस्लाम, तान्या भाटिया, विकास अरोड़ा आदि कई प्रमुख उद्यमी व निर्यातक शामिल रहे।
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि मेटल क्राफ्ट सिटी के रूप में पहचान बनाने वाला मुरादाबाद देश के महत्वपूर्ण हस्तशिल्प क्लस्टरों में से एक है। इस प्रकार के संवाद नीति समर्थन को मजबूत करने, आधारभूत संरचना में सुधार, निर्यात को बढ़ावा देने के साथ ही इस क्षेत्र से जुड़े कारीगरों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एमएचईए) के अध्यक्ष नवेद उर रहमान ने कहा कि मुरादाबाद में टेस्टिंग लैब होने के बावजूद जब प्रोडक्ट विदेश जाता है तो विदेशी कंपनियां इस लैब की रिपोर्ट को मान्यता नहीं देती। जिसके कारण देश में मौजूद अन्य विदेशी कंपनियों की लैब से दोबारा टेस्टिंग रिपोर्ट लेनी पड़ती है। उन्होंने मांग की- मुरादाबाद में मौजूद लैब को ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। ताकि इसी लैब की रिपोर्ट को सभी देशों में मान्यता मिल सके।
Trending Videos
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि वर्ष 2024-25 के दौरान कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,123 करोड़ रुपये रहा है। ईपीसीएच सरकार और हस्तशिल्प निर्यातक समुदाय के बीच नियमित संवाद के लिए सार्थक मंच तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री से जुड़े अलग-अलग सेक्टर के मुद्दे उठाए गए। हैंडीक्राफ्ट कम्युनिटी की तरफ से चुनौतियों से निपटने के लिए विभागीय मदद मांगी गई।
सेंट्रल रीजन के कन्वीनर अवधेश अग्रवाल ने कहा कि इस तरह की बातचीत एक्सपोर्टर्स, कारीगरों और इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स की जरूरतों को समझने में बहुत काम आती है। विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) ने उद्यमियों के सुझावों और चिंताओं को सुनकर वस्त्र मंत्रालय की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।
इसके बाद ईपीसीएच की ओर से एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीजीसी) के सहयोग से ईसीजीसी प्रोडक्ट्स एंड रिलीफ स्कीम्स विषय पर एक सेमिनार भी आयोजित किया। जिसमें शाखा प्रबंधक (ईसीजीसी) चिरंतन दत्त ने विभिन्न राहत योजनाओं की जानकारी दी। वाईईएस अध्यक्ष जेपी सिंह, रश्मि दुग्गल, रोहित ढल, सलमान आजम, जीशान अली, नजमुल इस्लाम, तान्या भाटिया, विकास अरोड़ा आदि कई प्रमुख उद्यमी व निर्यातक शामिल रहे।