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डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की चपेट में आने से किशोरी की मौत
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Fri, 11 Mar 2016 12:06 AM IST
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डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की चपेट में आने से किशोरी की मौत
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रेलवे की बंद अटसलिया क्रासिंग को पार करते समय एक किशोरी लखनऊ से शाहजहांपुर को जा रही डिब्रूगढ़ - अमृतसर एक्सप्रेस की चपेट में आ गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घरवालों द्वारा पोस्टमार्टम न कराने की तहरीर दिए जाने पर पुलिस ने शव का पंचनामा भर लाश को घरवालों को सौंप दिया।
यह वाकया बृहस्पतिवार की सुबह करीब पौने नौ बजे रोजा के पास क्रासिंग संख्या 318 अटसलिया फाटक का है। लखीमपुर खीरी के पसगवां थाना क्षेत्र के सिसोरा नासिर निवासी फुरकान अहमद अपनी बीमार बहन 16 वर्षीय आफरीन को बाइक से लेकर इलाज के लिए शाहजहांपुर आ रहा था। फुरकान ने पुलिस को बताया कि जब वह अटसलिया फाटक के पास पहुंचा, तभी वह फाटक बंद था जिसके कारण वह खड़ा हो गया, लेकिन कुछ लोग बंद फाटक को पैदल पार करने लगे रहे जिसको देख उसकी बहन आफरीन भी फाटक पार करने लगी।
जब आफरीन अप लाइन पर पहुंची, तभी उसी लाइन पर डिब्रू्गढ़ एक्सप्रेस आ गई, जिससे बचने के लिए उसने दौड़कर लाइन पार करने का प्रयास किया और हादसे कि शिकार हो गई।
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ट्रेन की टक्कर लगते ही आफरीन के प्राण पखेरू उड़ गए यद्यपि की वह रेल के पहिए के नीचे नहीं आई, जिस कारण उसका शरीर क्षत विक्षत नहीं हो सका। घटना की सूचना रोजा के स्टेशन मास्टर ने सिविल पुलिस को दी।
मौके पर एसएसआई ओपी गौतम ने शव का पंचनामा भरा, लेकिन परिजन उसका पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं थे लिहाजा तहरीर के आधार पर मृतका के शव के उसके पिता रजी अहमद के सुपुर्द कर दिया गया।
हादसे का पर्याय बना अटसलिया का रेलवे फाटक
रोजा का अटसलिया फाटक इन दिनों मौत का पर्याय बना हुआ है। एक माह में औसत चार हादसे यहां होते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि रेल के लाख प्रयास के बाद भी लोगों में जागरूकता का अभाव है। वह अपनी जान जोखिम डालकर रेल लाइन पार करने का प्रयास करते हैं। हादसे के दो मुख्य कारण है इन दिनों मोहम्मदी क्रासिंग बंद होने के कारण इस रूट का प्रयोग यातायात के लिए किया जा रहा है। जिस कारण अटसलिया मार्ग पर हैवी ट्रैफिक के चलते लोग जाम से बचने के लिए बंद फाटक को पार करने का प्रयास करते है। दूसरा कारण यह है कि फाटक के पास रेलवे लाइन का टर्निग प्वाइंट है लोग अप और डाउन लाइन से आने वाली गाडिय़ों का आंकलन नहीं कर पाते जिससे हादसो का ग्राफ बढ़ा है।
यह वाकया बृहस्पतिवार की सुबह करीब पौने नौ बजे रोजा के पास क्रासिंग संख्या 318 अटसलिया फाटक का है। लखीमपुर खीरी के पसगवां थाना क्षेत्र के सिसोरा नासिर निवासी फुरकान अहमद अपनी बीमार बहन 16 वर्षीय आफरीन को बाइक से लेकर इलाज के लिए शाहजहांपुर आ रहा था। फुरकान ने पुलिस को बताया कि जब वह अटसलिया फाटक के पास पहुंचा, तभी वह फाटक बंद था जिसके कारण वह खड़ा हो गया, लेकिन कुछ लोग बंद फाटक को पैदल पार करने लगे रहे जिसको देख उसकी बहन आफरीन भी फाटक पार करने लगी।
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जब आफरीन अप लाइन पर पहुंची, तभी उसी लाइन पर डिब्रू्गढ़ एक्सप्रेस आ गई, जिससे बचने के लिए उसने दौड़कर लाइन पार करने का प्रयास किया और हादसे कि शिकार हो गई।
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हादसे का पर्याय बना अटसलिया का रेलवे फाटक
रोजा का अटसलिया फाटक इन दिनों मौत का पर्याय बना हुआ है। एक माह में औसत चार हादसे यहां होते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि रेल के लाख प्रयास के बाद भी लोगों में जागरूकता का अभाव है। वह अपनी जान जोखिम डालकर रेल लाइन पार करने का प्रयास करते हैं। हादसे के दो मुख्य कारण है इन दिनों मोहम्मदी क्रासिंग बंद होने के कारण इस रूट का प्रयोग यातायात के लिए किया जा रहा है। जिस कारण अटसलिया मार्ग पर हैवी ट्रैफिक के चलते लोग जाम से बचने के लिए बंद फाटक को पार करने का प्रयास करते है। दूसरा कारण यह है कि फाटक के पास रेलवे लाइन का टर्निग प्वाइंट है लोग अप और डाउन लाइन से आने वाली गाडिय़ों का आंकलन नहीं कर पाते जिससे हादसो का ग्राफ बढ़ा है।