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Varanasi News: फर्जी फर्मों से 5.97 करोड़ की जीएसटी धोखाधड़ी में कारोबारी गिरफ्तार
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कागजी लेनदेन दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) की टीम ने जीएसटी चोरी के एक मामले में मिर्जापुर कछवा निवासी कारोबारी महेश गुप्ता को मकबूल आलम रोड से गिरफ्तार किया है। अपर आयुक्त पीयूष शुक्ला के अनुसार, आरोपी लंबे समय से विभाग की निगरानी में था। महेश ने गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनके पैन कार्ड और आधार कार्ड का दुरुपयोग किया और उनके नाम पर कई फर्जी फर्में खोल दीं। आरोपी को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। हालांकि, रिमांड मंजूर नहीं होने पर उसे कैंट थाने में दाखिल करा दिया गया। जांच में सामने आया कि फर्जी फर्मों से बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के 5.49 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया। कागजी चालानों से फैक्ट्रियों को 5.97 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी पास किया गया, ताकि गलत तरीके से लाभ उठा सकें। व्यवसायिक स्थलों का सत्यापन किया गया तो सभी फर्में मिली ही नहीं। जिन लोगों के नाम पर फर्में संचालित थीं, उन्होंने पूछताछ में बताया कि उनके दस्तावेज का गलत इस्तेमाल किया गया है। जांच एजेंसियों ने जब बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और धन प्रवाह की पड़ताल की तो पूरे नेटवर्क के सुनियोजित तरीके से संचालित होने का खुलासा हुआ। आरोपी इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य लाभार्थी था, जिसने केवल कागजी लेनदेन दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) की टीम ने जीएसटी चोरी के एक मामले में मिर्जापुर कछवा निवासी कारोबारी महेश गुप्ता को मकबूल आलम रोड से गिरफ्तार किया है। अपर आयुक्त पीयूष शुक्ला के अनुसार, आरोपी लंबे समय से विभाग की निगरानी में था। महेश ने गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनके पैन कार्ड और आधार कार्ड का दुरुपयोग किया और उनके नाम पर कई फर्जी फर्में खोल दीं। आरोपी को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। हालांकि, रिमांड मंजूर नहीं होने पर उसे कैंट थाने में दाखिल करा दिया गया। जांच में सामने आया कि फर्जी फर्मों से बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के 5.49 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया। कागजी चालानों से फैक्ट्रियों को 5.97 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी पास किया गया, ताकि गलत तरीके से लाभ उठा सकें। व्यवसायिक स्थलों का सत्यापन किया गया तो सभी फर्में मिली ही नहीं। जिन लोगों के नाम पर फर्में संचालित थीं, उन्होंने पूछताछ में बताया कि उनके दस्तावेज का गलत इस्तेमाल किया गया है। जांच एजेंसियों ने जब बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और धन प्रवाह की पड़ताल की तो पूरे नेटवर्क के सुनियोजित तरीके से संचालित होने का खुलासा हुआ। आरोपी इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य लाभार्थी था, जिसने केवल कागजी लेनदेन दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया।