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Cockroach: साड़ी, गल्ला, होटल कारोबार में कॉकरोच की सेंध, हर साल 200 करोड़ खर्च कर रहे बनारसी; परेशानी

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 27 May 2026 02:39 PM IST
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सार

Varanasi News: जिले में कॉकरोच की बढ़ती समस्या अब साड़ी, गल्ला और होटल कारोबार पर भारी पड़ रही है। पक्के महाल की साड़ी दुकानों से लेकर विशेश्वरगंज के गल्ला बाजार तक व्यापारी परेशान हैं। कीटनाशक, सफाई और बचाव उपायों पर शहरवासी हर साल करीब 200 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं, फिर भी समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

Cockroach Infesting Saree Grain Hotel Industries Banarasis Spending 200 Crores Annually to Combat Menace
कॉकरोच की सेंध। - फोटो : AdobeStock
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विस्तार

Cockroach Problem: कॉकरोच पूर्वांचल में व्यापार के बड़े केंद्र वाराणसी के लिए कई साल से समस्या बनी हुई है। काशी में होटल से लेकर, होम स्टे, किराना, कपड़ा, बनारसी साड़ी समेत खानपान  कारोबार करने वाले लोग वर्षों से परेशान हैं। इनसे बचाव में काशी के लोग हर साल करीब 200 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। 



पेस्ट कंट्रोल का व्यापार पिछले पांच साल में तीन गुना तक बढ़ गया है। पेस्ट कंट्रोल कर रहीं कंपनियों से जुड़े एक कर्मचारी बृजेश कुमार बताते हैं कि कॉकरोच से सबसे ज्यादा प्रभावित घाट किनारे के क्षेत्र हैं, जहां खान-पान से लेकर होटल और होम स्टे अधिक हैं। यहां कारोबारियों को साल में तीन से चार बार पेस्ट कंट्रोल कराते हैं। एक बार में करीब 5-10 हजार रुपये का खर्च आता है। 
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इसके अलावा पक्के महाल क्षेत्र में साड़ी कारोबारी और पूर्वांचल की सबसे बड़ी गल्ला मंडी कहे जाने वाले विशेश्वरगंज में हर दूसरे महीने पेस्ट कंट्रोल होता है। जिले में सालाना 80 करोड़ से अधिक कीटनाशक और उन्हें मारने वाली मशीनों का कारोबार है। 
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वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा बताते हैं कि कॉकरोच से अपने व्यापार को बचाने के लिए लोग अपने घर, प्रतिष्ठान, शो रूम आदि में कंट्रोल पेस्ट करा रहे हैं, जिसमें सालाना 200 करोड़ खर्च कर रहे हैं। दूध विनायक, पंचगंगा घाट, चौखंभा, गायघाट, मच्छोदरी, विशेश्वरगंज, दूध कटरा, रविदास घाट, सिगरा, रथयात्रा में अधिक समस्या है। 

गर्मी में 60 फीसदी बढ़ जाती है मांग
कमच्छा क्षेत्र के सीड्स कारोबारी मोहन प्रसाद बताया कि गर्मी और उमस के समय में कॉकरोच, दीमक और कीट मारने वाले पेस्ट कंट्रोल की मांग 60 फीसदी बढ़ जाती है। पहले लोग साल में एक या दो बार ही कीटनाशक का इस्तेमाल करते थे। अब साल में तीन से चार बार खरीदते थे। अमरा के कारोबारी ओमप्रकाश पासवान ने बताया कि कीटनाशक का सालाना कारोबार ही 80-90 करोड़ का है। 

त्वचा के लिए खतरनाक कॉकरोच, हो सकती है एलर्जी 
मंडलीय अस्पताल के स्किन रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकुंद श्रीवास्तव ने बताया कि कॉकरोच गंदगी में ही पनपते हैं। गर्मी और उमस के मौसम में इनसे होने वाली स्किन एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ते हैं। कॉकरोच की लार, उनके मल और उनके शरीर से झड़ने वाले बारीक कणों में एक विशेष प्रकार का प्रोटीन जब संवेदनशील त्वचा के संपर्क में आता है, तो त्वचा पर लाल चकत्ते, तेज खुजली और सूजन की समस्या हो सकती है।

जैविक विधि से कॉकरोच मारे जा रहे हैं। दुकानों पर बवेरिया बैसियाना नाम के जैविक कीटनाशक की बिक्री सबसे अधिक होती है। यह सरकार के कृषि विभाग से अनुदानित भी है। ये कॉकरोच की त्वचा में जाकर नष्ट करते हैं। पूरी तरह सुरक्षित है। - बृजेश विश्वकर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।

आसपास गंदगी के माहौल के कारण कॉकरोच और दीमक पनपने लगते हैं। कपड़े को बचाने के लिए साल में तीन- चार बार पेस्ट कंट्रोल कराना पड़ता है। हर साल करीब 25 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। - एकता अग्रवाल, साड़ी कारोबारी, भैरवनाथ

कूड़ा घर के कारण कॉकरोच, दीमक और चूहे का आतंक हैं। हर तीसरे महीने 5 हजार का पेस्ट कंट्रोल कराया जाता है।  - प्रतीक गुप्ता, किराना कारोबारी  

कॉकरोच से खाने पीने के सामान को बचाना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए सालाना दो से तीन बार पेस्ट कंट्रोल कराना पड़ता है। खर्च भी काफी बढ़ जाता है।  - मोनिका गुप्ता, कैफे संचालक

रात होते ही किचन में कई जगहों पर इनके झुंड दिखाई पड़ते हैं। कीटनाशक का प्रयोग कर इन्हें भगाया जाता है। हर महीने इसी में 500 रुपये तक खर्च हो जाते हैं। फिर भी समस्या खत्म नहीं होती है। -  मोनिका गुजराती, गृहिणी, चौखंभा

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