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Varanasi News: मेडिकल कॉलेज की मान्यता तो मिल गई लेकिन दवाओं की खपत का अंदाजा नहीं, कार्यवाहक MS ने कही ये बात

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 27 May 2026 03:37 PM IST
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सार

Varanasi News: पांडेयपुर स्थित ईएसआईसी अस्पताल में दवाओं की कमी से मरीज परेशान हैं। मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ गई, लेकिन दवा आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई। दर्द, शुगर और बीपी जैसी जरूरी दवाएं भी नहीं मिल रहीं। अस्पताल प्रशासन ने जल्द अतिरिक्त दवाएं मंगाने और लोकल परचेज सुविधा शुरू करने की बात कही है।

Medical College Receives Recognition Drug Consumption Remains Unestimated Acting MS Comments Situation
ईएसआईसी अस्पताल। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

Varanasi News: पांडेयपुर के ईएसआईसी अस्पताल में महीने में तीन बार दवाओं की कमी हो रही है। अस्पताल को 10 महीने पहले मेडिकल कॉलेज की मान्यता मिली थी, मंत्रालय से जारी आदेश पर श्रमिकों के साथ ही सामान्य मरीजों का भी इलाज अस्पताल में शुरू हुआ। इसके बाद भी अस्पताल के अधिकारियों को दवाइयों की खपत का अंदाजा नहीं हुआ। फार्मेसी में महीने में दो-तीन बार दवाइयों की कमी हो रही है। रोज 1000 मरीज और तीमारदार परेशान हो रहे हैं। 

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ओपीडी में रोज औसत 1200 मरीज इलाज के लिए आते हैं। 10 महीने पहले तक 800-1000 लोग इलाज के लिए आते थे। मरीजों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन दवा मंगाने का कोटा पहले जैसा ही है। मरीज बाहर निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। अस्पताल में दर्द की दवा से लेकर शुगर और बीपी की दवा भी मरीजों को नहीं मिल रही है।
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दवाओं का क्लेम भी जटिल: अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि बीमित व्यक्ति को अगर दवाइयां अस्पताल में नहीं मिल पा रही हैं तो वह कहीं से भी दवा खरीदकर बिल क्लेम कर सकता है। उसकी भी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि तीमारदार महीनों तक अस्पताल और डिस्पेंसरी के चक्कर लगाता रहे। गैर बीमित मरीज को दवाओं के लिए पूरा पैसा अपने पास से खर्च करना पड़ रहा है। 

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चोलापुर क्षेत्र के मोहांव गांव के चंद्रमा प्रसाद मंगलवार को अस्पताल में थायराइड का इलाज कराने पहुंचे थे। जांच के बाद चिकित्सक ने उन्हें 75एमजी की थायरॉक्सिन दवा लिख दी। दो घंटे लाइन में लगने के बाद दवा काउंटर से 25 एमजी की दवा दी गई। बताया गया कि इसे ही डोज में तीन गोली खानी होगी। 

शिवपुर के प्रतीक यादव को आंख में इंफेक्शन की शिकायत थी। चिकित्सक ने उन्हें एक सिप्रोफ्लाक्सासिन आई ड्रॉप और एसीक्लोफेनेक दवा लिख दी। 1.30 घंटे लाइन में लगने के बाद उन्हें वापस कर दिया गया कि दवा नहीं है।

मरीजों की संख्या बढ़ी है तो दवाओं की खपत भी बढ़ी है। दवाएं मंगाई जा रही हैं। कुछ दवाओं के आने में देरी हो जाती है, जिसके कारण मरीजों को इस प्रकार की समस्या होती है। इसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। मरीजों के लिए लोकल परचेज की भी सुविधा शुरू करने की तैयारी चल रही है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भी पत्र भेजा जाएगा। - डॉ. प्रभास रॉय, कार्यवाहक एमएस

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