खंडवा के पुनासा विकासखंड अंतर्गत ग्राम सुलगांव में एक विधवा आदिवासी महिला किसान की जमीन पर हाईटेंशन लाइन के टावर निर्माण को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। यहां विरोध कर रहे किसानों और प्रशासन के बीच जमकर टकराव देखने को मिला है ।
दरअसल एक दिन पहले ही विरोध करने वाले नौ किसान नेताओं पर दर्ज हुई FIR के महज 24 घंटे बाद जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एक बार फिर से रुका हुआ टावर निर्माण का कार्य शुरू करा दिया था। इसको लेकर विरोध कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि, उनकी आवाज दबाने के लिए पहले उनपर मुकदमे दर्ज किए गए, जिसके बाद पुलिस बल के सहारे वहां निर्माण कराया जा रहा है ।
यह पूरा मामला खंडवा जिले की मान्धाता विधानसभा क्षेत्र का है। जहां धनगांव थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम सुलगांव में 132 केवी सनावद आरटीएस निमाड़खेड़ी विद्युत पारेषण लाइन का निर्माण कार्य जारी है। प्रशासन इसे सिंहस्थ के पहले पूरा कराने पर जोर दे रहा है। जबकि इसको लेकर स्थानीय किसानों का आरोप है कि गांव की एक गरीब आदिवासी और विधवा महिला किसान की कृषि भूमि पर बिना उचित सहमति और मुआवजे के कई हाईटेंशन टावर लगाए जा रहे हैं। इसी के विरोध में करीब 10 दिन पहले ही दो जून को स्थानीय किसानों संग किसान संगठनों ने भी प्रदर्शन किया था। वहीं, इस विरोध प्रदर्शन के बाद गुरुवार दोपहर एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी की शिकायत पर नौ किसानों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई थी ।
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अगले दिन इस दौरान टावर निर्माण स्थल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, और पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। जिसके बाद पुलिस बल की मौजूदगी में पावर ट्रांसमिशन कंपनी के कर्मचारियों ने निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया । इसको लेकर जिला प्रशासन का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र की बिजली व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, और सिंहस्थ से पहले इसे पूरा करना आवश्यक है । वहीं, दूसरी ओर किसान संगठनों का आरोप है कि, किसानों को पहले लिखित रूप से आश्वस्त किया गया था कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन बाद में उन्हीं किसानों पर प्रकरण दर्ज कर दिए गए। किसानों का कहना है कि वे किसी विकास कार्य के विरोध में नहीं हैं, बल्कि भूमि स्वामी किसान के अधिकारों और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं ।
इधर इस घटना के बाद से क्षेत्र में किसानों के बीच नाराजगी लगातार बढ़ रही है। किसान संगठन इसे किसान अधिकारों का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि शासकीय परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। इधर इस हंगामे के बाद से सुलगांव में विकास परियोजना और किसान अधिकारों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।