{"_id":"b7f2ac2c-bb73-11e2-811c-d4ae52bc57c2","slug":"pak-election-and-america","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओबामा ने दी पाकिस्तान को बधाई","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
ओबामा ने दी पाकिस्तान को बधाई
Updated Mon, 13 May 2013 07:50 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पाकिस्तान की नई सरकार के साथ अच्छे संबंधों की तमन्ना जताई है।
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रविवार को एक बयान जारी करके कहा, "पाकिस्तान में चुनावों के बाद आने वाली नई सरकार के साथ मेरा प्रशासन पाकिस्तानी जनता को स्थिर, सुरक्षित और खुशहाल भविष्य देने के समर्थन में बराबर के साझीदार की तरह सहयोग जारी रखेगा।"
पाकिस्तान में चुनावों के बाद मुस्लिम लीग नवाज़ को भारी कामयाबी मिली है और पार्टी के नेता नवाज़ शरीफ़ के देश का अगला प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बराक ओबामा ने पाकिस्तानी जनता को चुनावों के सफलतापूर्वक हो जाने पर बधाई देते हुए कहा, "अमेरिका हर पाकिस्तानी के साथ सत्ता के इस ऐतिहासिक, शांतिपूर्ण और स्वच्छ स्थानांतरण का अभिवादन करता है। यह पाकिस्तान में जनतांत्रिक विकास का एक महत्तवपूर्ण मील का पत्थर है।"
Trending Videos
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान में भरपूर तरीके से चुनावी सरगर्मियों और चरमपंथियों की धमकियों के बावजूद खुलकर मतदान किए जाने की तारीफ़ करते हुए कहा कि पाकिस्तानी जनता ने जनतांत्रिक तरीकों से सत्ता परिवर्तन के प्रति अपनी कटिबद्धता जताई है, जो आने वाले कई वर्षों तक सारे पाकिस्तानियों के लिए शांति औऱ संपन्नता हासिल करने के लिए अहम है।
जॉन कैरी
अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने भी पाकिस्तान में चुनावों के सफलतापूर्वक संपन्न हो जाने पर और चरमपंथियों की धमकियों के बावजूद पाकिस्तानियों के इनमें भरपूर तौर पर शामिल होने के लिए बधाई दी।
इसके अलावा अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के डेमोक्रेटिक नेता इलियट एंगल ने भी पाकिस्तानी जनता की हिम्मत की दाद देते हुए कहा, "मैं तो पाकिस्तान की जनता और चुनाव में शामिल प्रत्याशियों की हिम्मत से प्रभावित हुआ हूं जिन्होंने अपनी आवाज़ उठाने के हक के लिए बमों और गोलियों के हमलों की परवाह नहीं की। "
उन्होंने पाकिस्तान में जनतांत्रिक सत्ता परिवर्तन के भविष्य में भी अपनाए जाने की उम्मीद जताई। "मैं अब उम्मीद करता हूं कि अब जो सत्ता का स्थानांतरण होने वाला है उसके बाद भी पाकिस्तान में ऐसे ही जनतांत्रिक स्थानांतरण होंगे। "
पाकिस्तान में इन चुनावों के बाद नवाज़ शरीफ़ के सत्ता संभालने की संभावना के बाद अब अमेरिका में यह अटकलें भी लगने लगी हैं कि क्या पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ़ जंग में अमेरिका का साथ जारी रखेगा या नहीं।
चरमपंथ
नवाज़ शरीफ़ ने चुनावी अभियान के दौरान अमेरिका की चरमपंथ के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई से पाकिस्तान को अलग करने की बात कही थी। नवाज़ शरीफ़ तालिबान के प्रति नर्म रूख भी अख़्तियार करते हैं।
इसके अलावा नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमलों के बारे में भी सख्त रवैय्या रखते हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी ड्रोन हमले पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन है।
अमेरिका में समाचार माध्यमों जैसे टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में भी पाकिस्तान में चुनाव संपंन्न हो जाने और लोगों के भरपूर तरीके से उसमें भाग लेने की भी तारीफ़ की गई है।
लेकिन सभी इस बात पर फ़िक्रमंद हैं कि अब अगली पाकिस्तानी सरकार किस हद तक अमेरिका के साथ मिलकर चरमपंथियों के खिलाफ़ जंग में मददगार साबित होगी।
अमेरिका पाकिस्तान में मौजूद चरमपंथियों के खिलाफ़ अभियान चलाने के बारे में पाकिस्तान पर दबाव डालता रहा है।
अमेरिका सन 2014 में अफ़ग़ानिस्तान से अपनी फ़ौजें भी निकालना चाहता है जिसके लिए भी उसे पाकिस्तानी सरकार की मदद दरकार होगी। औऱ अफ़गानिस्तान में सक्रिय तालिबान के साथ शांति बातचीत में भी पाकिस्तान की मदद चाहता है।
इन मुद्दों पर अमेरिका के कई प्रमुख अख़बार जैसे न्यूयार्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट में नवाज़ शरीफ़ के सत्ता में आने के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ने की संभावना की भी बात की जा रही है।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के कुछ अमेरिकी जानकार यह भी कहते हैं कि नवाज़ शरीफ़ अमरीका के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए काम कर सकते हैं। वह तर्क देते हैं कि इससे पहले जब 1990 के दशक में नवाज़ शरीफ़ सत्ता में थे तो बिल क्लिंटन के दौर में अमरीका के साथ अच्छे रिश्ते रखने की ओर काम करते थे।
इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि अगर नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाना चाहते हैं तो उन्हे अमेरिका की मदद की भी ज़रूरत होगी।
सलीम रिज़वी/न्यूयॉर्क